17 की उम्र में हीरोइन, 31 में सांसद; अब बगावत से सुर्खियों में, ममता बनर्जी की 'सायोनी' क्यों हुई बागी?
टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें अब थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अभिनेत्री से राजनेत्री बनीं सायनी घोष ने भी बागी सांसदों की सूची में शामिल होकर ममता बनर्जी को तगड़ा झटका दिया है।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के अंदर गहराते असंतोष और बिखराव ने उनके लिए नया सिरदर्द पैदा कर दिया है। अब अभिनेत्री से राजनेत्री बनीं सायोनी घोष ने भी बागी सांसदों की कतार में शामिल होकर ममता बनर्जी को बड़ा झटका दिया है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग बैठक बुलाने की मांग करने वाले 20 टीएमसी सांसदों की सूची में सायोनी घोष का नाम जुड़ गया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह घटना ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दोनों के लिए अप्रत्याशित और गंभीर झटका माना जा रहा है।
सायोनी घोष का सियासी सफर
सायोनी घोष बंगाली सिनेमा और संगीत जगत की लोकप्रिय शख्सियत रही हैं। उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में वर्ष 2010 में टेलीफिल्म 'इच्छे दाना' से अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद कई हिट बंगाली फिल्मों, धारावाहिकों और गायिका के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। 2021 में पहली बार उन्होंने सियासत में कदम रखा और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का हाथ थामा। पार्टी ने उन्हें आसनसोल सीट से विधानसभा चुनाव में उतारा, लेकिन वे हार गईं।
इसके बावजूद पार्टी ने 2023 में उन्हें टीएमसी यूथ विंग की अध्यक्ष बना दिया। पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सायोनी घोष को जादवपुर सीट से चुनावी मैदान में उतारा, जहां से उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की और 31 की उम्र में सांसद बन गईं। हाल ही में उन्हें पार्टी की महिला शाखा की अध्यक्ष भी बनाया गया था। पार्टी उन्हें भविष्य का मजबूत युवा चेहरा मान रही थी।
नाराज होने की मुख्य वजह क्या?
अब सवाल उठता है कि कम समय में पार्टी ने सायोनी घोष को बहुत कुछ दिया, फिर किसी बात को लेकर नाराज चल रही थीं? बताया जा रहा है कि सायोनी घोष पिछले कुछ समय से पार्टी में अपने भविष्य को लेकर काफी नाराज चल रही थीं। उनकी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी दलों ने जब उन्हें निशाना बनाया, तब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने खुलकर उनका समर्थन नहीं किया। बताया जाता है कि उस दौरान सायोनी घोष ने खुद को पूरी तरह अलग-थलग और असहाय महसूस किया। कहा जाता है कि पार्टी की ओर से उन्हें चुनाव प्रचार समय से पहले समाप्त करने का निर्देश दिया गया, जिससे उनका नाराजगी और गुस्सा बढ़ गया। हालांकि, इस पूरे मामले पर सायोनी घोष या टीएमसी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
कितनी संपत्ति की मालकिन हैं सायोनी?
चुनाव आयोग को सौंपे गए हलफनामे के मुताबिक, 12वीं पास सायोनी घोष की कुल संपत्ति 91.89 लाख रुपये है, जबकि उन पर करीब 59 लाख रुपये का कर्ज है।
चल संपत्ति
- नकद: 35,000 रुपये
- बैंक जमा: 10.25 लाख रुपये (HDFC, UCO बैंक और रेकरिंग डिपॉजिट)
- बीमा: 11.03 लाख रुपये (दो LIC और दो HDFC Life पॉलिसी)
- सोना: 8 ग्राम
- वाहन: एक होंडा जैज कार (अनुमानित मूल्य 6 लाख रुपये)
अचल संपत्ति
हलफनामे के अनुसार, कोलकाता के प्रतिष्ठित गोल्फ ग्रीन इलाके में सायोनी घोष का आवासीय मकान है, जिसकी घोषित कीमत 62.64 लाख रुपये है। उनके नाम पर कोई कृषि भूमि, प्लॉट या वाणिज्यिक संपत्ति नहीं है।
टीएमसी में बढ़ता विद्रोह
सायोनी घोष का बागी गुट में शामिल होना टीएमसी के अंदर चल रहे असंतोष की गहराई को उजागर करता है। इससे पहले राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने इस्तीफा देकर पार्टी की सदस्यता त्याग दी थी। उनसे पहले सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी छोड़ चुके हैं। यही कारण है कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट के मजबूत होने की बात कही जा रही है। कहा तो ये भी जा रहा है कि कई लोकसभा सांसद व अन्य नेता भी संपर्क में हैं। यही कारण है कि इस विद्रोह ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है
दूसरी ओर सियासी पंडितों का मानना है कि अगर यह असंतोष और बढ़ा तो तृणमूल कांग्रेस की एकता टूटने का खतरा बढ़ सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व इस संकट को कैसे संभालते हैं। क्या बागी सांसदों को मनाया जा सकेगा या पार्टी में और बड़े फेरबदल होंगे? अब यह आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा। फिलहाल कोलकाता से लेकर दिल्ली तक सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म है।




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