पांच राज्यों की 7 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे भी आए, BJP को मिली कितनी कामयाबी; एक सीट पर बना जीत का नया रिकॉर्ड
महाराष्ट्र की बारामती सीट पर हुए उपचुनाव में सुनेत्रा पवार को कुल 2,18,969 वोट मिले, जबकि उन्हें छोड़कर चुनाव में उतरे अन्य सभी 22 उम्मीदवारों को कुल मिलाकर सिर्फ 4,837 वोट ही हासिल हुए। जो कि सुनेत्रा को मिले वोटों का 1 प्रतिशत भी नहीं है।

देश में चार राज्यों व एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के साथ ही पांच राज्यों की सात सीटों पर हुए उप चुनाव के परिणाम भी सोमवार को घोषित कर दिए गए। इन चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी को खुशखबरी मिली और सात में से चार सीटों पर उसने विजय प्राप्त की, जबकि कांग्रेस को दो सीटों पर व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को एक सीट पर सफलता मिली। ये उपचुनाव महाराष्ट्र और कर्नाटक में दो-दो सीटों पर जबकि गुजरात, नगालैंड और त्रिपुरा में एक-एक सीटों पर हुए थे।
इन उपचुनावों में सबसे बड़ी जीत महाराष्ट्र की बारामती सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस की प्रत्याशी सुनेत्रा अजित पवार ने दर्ज की, उन्होंने जीत का एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए 2,18,034 वोटों से यह चुनाव जीता। पार्टी ने इस जीत को वोटों के मामले में किसी विधानसभा चुनाव की देश की सबसे बड़ी जीत होने का दावा किया है। जबकि इन उपचुनावों में सबसे छोटी जीत नगालैंड में भाजपा प्रत्याशी दाओचिर आई इम्चेन ने हासिल की। उन्होंने 3,123 वोटों से यह चुनाव जीता।
कर्नाटक में हुए उपचुनाव में दोनों सीटों पर कांग्रेस की जीत
कर्नाटक में दो सीटों बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण सीट पर उपचुनाव हुए थे और इन दोनों ही सीटों पर प्रदेश की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने जीत दर्ज की। इस दौरान बागलकोट में कांग्रेस उम्मीदवार एवं राजनीति में नए उमेश मेती ने भाजपा के दिग्गज नेता और तीन बार के विधायक वीरभद्रय्या चरंतिमठ को करारी शिकस्त दी। यह सीट कांग्रेस प्रत्याशी के पिता और पार्टी के पूर्व विधायक HY मेती के निधन की वजह से खाली हुई थी और पिता की सीट को उन्होंने 21,866 वोटों के भारी अंतर से बरकरार रखा।
उधर दूसरी सीट दावणगेरे दक्षिण सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार समर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन ने शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद उल्लेखनीय वापसी करते हुए भाजपा उम्मीदवार श्रीनिवास दासकारियप्पा को 5,708 वोटों से हरा दिया। यह सीट स्थानीय विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण खाली हुई थी। बागलकोट उपचुनाव में कुल नौ उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे जबकि दावणगेरे दक्षिण में 25 उम्मीदवार मैदान में थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बागलकोट में 68.74 प्रतिशत जबकि दावणगेरे दक्षिण में 68.43 प्रतिशत मतदान हुआ था।
महाराष्ट्र में एक सीट पर भाजपा तो दूसरी पर NCP को जीत
महाराष्ट्र में भी दो सीटों पर उपचुनाव हुआ था। इनमें से बारामती सीट पर महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने 2,18,034 मतों के प्रचण्ड अंतर से जीत दर्ज की। यह सीट पूर्व उप मुख्यमंत्री और सुनेत्रा के पति अजित पवार के निधन से खाली हुई थी। इस उपचुनाव में सुनेत्रा को कुल कुल 2,18,969 वोट मिले, जबकि उन्हें छोड़कर चुनाव में उतरे अन्य सभी 22 उम्मीदवारों को कुल मिलाकर सिर्फ 4,837 वोट ही हासिल हुए। जो कि सुनेत्रा को मिले वोटों का 1 प्रतिशत भी नहीं है। दूसरे नंबर पर रहे न्यू राष्ट्रीय समाज पार्टी के प्रत्याशी मात्र 935 वोट ही प्राप्त कर सके।
देश में किसी विधानसभा सीट पर सबसे बड़ी जीत का दावा
इस जीत के बाद राकांपा ने विधानसभा चुनावों में जीत के सबसे बड़े अंतर का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने का दावा किया। पार्टी ने बताया कि सुनेत्रा ने भाजपा के सुनील कुमार शर्मा के बनाए रिकॉर्ड को तोड़ दिया। शर्मा ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में साहिबाबाद सीट पर 2.14 लाख मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। सुनेत्रा पवार की जीत का अंतर उनके दिवंगत पति की जीत के अंतर से भी अधिक रहा, जिन्होंने 2019 में भाजपा के गोपीचंद पाडलकर को 1,65,265 मतों से हराया था। 2024 के चुनावों में, अजित पवार की जीत का अंतर घटकर करीब 1 लाख वोट रह गया था।
उधर राज्य में दूसरा उपचुनाव ‘राहुरी’ सीट पर हुआ था, यहां भाजपा के अक्षय शिवाजीराव कार्डिले ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और NCP (पवार गुट) के उम्मीदवार गोविंद मोकाटे को 1,12,587 वोटों से करारी शिकस्त दी। पूर्व भाजपा विधायक शिवाजी कार्डिले के निधन की वजह से यहां उपचुनाव की नौबत आई थी। भाजपा ने उनके बेटे को प्रत्याशी बनाया था, जिन्हें कुल 1,40,093 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर के प्रत्याशी गोविंद मोकाटे केवल 27,506 मत ही हासिल कर सके। यह चुनाव अक्षय कार्डिले के राजनीतिक करियर का पहला चुनाव था।
गुजरात में हुए उपचुनाव में BJP की जीत
गुजरात में उमरेठ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार हर्षद भाई परमार ने बाजी मार ली। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस उम्मीदवार भृगुराजसिंह चौहान को 30,743 वोटों से हरा दिया। भाजपा प्रत्याशी को जहां 85,500 वोट हासिल हुए, वहीं कांग्रेस कैंडिडेट को 54,757 वोट ही मिले। इस उपचुनाव में कुल छह प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। बाकी चार उम्मीदवारों में तीन निर्दलीय और एक भारतीय नेशनल जनता दल का उम्मीदवार शामिल रहा।
वोटों के मामले में तीसरे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी महेंद्र भाई नटवर भाई परमार रहे, जिन्हें कुल 786 वोट मिले। उनके बाद भारतीय नेशनल जनता दल प्रत्याशी मौलिक विनुभाई शाह को कुल 773 वोट मिले। अन्य दो निर्दलीयों ने 626 और 435 वोट प्राप्त किए। NOTA को 2335 वोट मिले।
नगालैंड में भाजपा प्रत्याशी की जीत
नगालैंड के कोरिडांग विधानसभा क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार दाओचिर आई इम्चेन ने 3,123 मतों से जीत हासिल की। यह सीट उनके पिता और पांच बार के विधायक इम्कोंग एल इम्चेन के निधन की वजह से खाली हुई थी। दाओचिर इम्चेन को कुल 7,317 वोट मिले, उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी तोशिकाबा को हराया, जिन्हें कुल 4,194 वोट मिले। एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार इम्तिवापांग 3,633 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे, जबकि NPP (नेशनल पीपुल्स पार्टी) उम्मीदवार आई.अबेनजान को 3,219 वोट मिले। कांग्रेस कैंडिडेट टी. चालुकुम्बा आओ को मात्र 144 मत मिले, जबकि नोटा को 48 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ इम्चेन मात्र 35 वर्ष की आयु में सबसे युवा विधायक के रूप में नगालैंड की 14वीं विधानसभा में प्रवेश करेंगे।
त्रिपुरा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार की बड़ी जीत
उत्तर त्रिपुरा की धर्मनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार जाहर चक्रवर्ती ने जीत दर्ज की। चक्रवर्ती ने अपने निकटतम प्रत्याशी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अमिताभ दत्त को 18,290 वोटों से पराजित किया। चक्रवर्ती को जहां 24,291 वोट मिले, वहीं अमिताभ दत्त को केवल 6,001 वोट ही मिल सके। कांग्रेस उम्मीदवार चयन भट्टाचार्जी को 5,936 वोट प्राप्त हुए। नोटा विकल्प के तहत 444 वोट दर्ज किए गए। यह उपचुनाव दिसंबर में विधानसभा अध्यक्ष विश्वबंधु सेन के निधन के कारण खाली हुई सीट पर हुआ। जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार चयन भट्टाचार्जी को 1,080 मतों के अंतर से हराया था। उस समय कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन होने के कारण माकपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था।




साइन इन