एक विभाग, कई बीमार: क्या है बेंगलुरु की कहानी, जिसे लेकर CM शिवकुमार के मंत्रियों में बढ़ा विवाद
Ramalinga Raddy: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मंत्रिमंडल से वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी ने पसंदीदा मंत्रालय न मिलने के चलते इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि डीके ने पहले उनसे वादा किया था , लेकिन बाद में शपथ ग्रहण के बाद भी इसे पूरा नहीं किया।

CM DK Shivakumar: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का कायापलट हो चुका है। डीके शिवकुमार राज्य के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं। लेकिन इसके साथ ही नया विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामालिंगा रेड्डी ने शिवकुमार मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि रामलिंगा रेड्डी उनका पसंदीदा बेंगलुरु विकास विभाग न मिलने की वजह से नाराज थे। इसलिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना इस्तीफा दे दिया। हालांकि, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि चिंता को कोई बात नहीं है।
कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री भले ही इस इस्तीफे को सामान्य करार दे रहे हों। लेकिन इसने बेंगलुरु विकास प्राधिकरण को लेकर मंत्रियों के बीच में चलने वाले उस विवाद की तरफ ध्यान आकर्षण किया है, जो पहले भी चलता रहा है। भारत का 'सिलिकॉन वैली' कहे जाने वाले बेंगलुरू को संभालने वाले इस विभाग को राज्य का सबसे प्रभावशाली और प्रतिष्ठित मंत्रालय माना जाता है। इसका महत्व आप इस तरीके से समझ सकते हैं कि 2023 में जब कांग्रेस के जीतने के बाद सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया, तो डीके शिवकुमार को साधने के लिए उन्हें बेंगलुरू की जिम्मेदारी दी गई।
रामलिंगा रेड्डी का क्या है तर्क?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामालिंगा रेड्डी ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह इस विभाग का न मिलना बताया। सिंचाई विभाग दिए जाने से नाराज रेड्डी ने पत्रकारों से कहा कि कैबिनेट गठन से पहले शिवकुमार ने मुझे भरोसा दिया था कि मुझे यही मंत्रालय दिया जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी मुझे यह नहीं दिया गया। शपथ ग्रहण के बाद भी यही वादा दोहराया गया, लेकिन इसके बाद भी इसे पूरा नहीं किया गया।
दरअसल, रामलिंगा रेड्डी के लिए बेंगलुरू विकास विभाग इसलिए भी ज्यादा महत्व रखता है। क्योंकि उनकी ज्यादातर राजनीतिक पकड़ इसी क्षेत्र में मौजूद है। वह दशकों से यहां की जनता का नेतृत्व करते रहे हैं। ऐसे में अगर उन्हें यह विभाग मिलता है, तो वह अपने वोटर्स पर सीधे नियंत्रण रख सकते हैं। इससे क्षेत्र में उनका प्रभाव और भी ज्यादा मजबूत होगा। इसके अतिरिक्त विभाग का बड़ा बजट भी एक बड़ा कारण है।
शिवकुमार ने अभी कृष्णा बायरे को दिया यह मंत्रालय
कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के बाद इस विभाग का नियंत्रण तत्कालनी उप मुख्यमंत्री पद पर बैठे डीके शिवकुमार ने अपने पास रखा था। बेंगलुरु के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार इस विभाग का नेतृत्व करने की वजह से शिवकुमार लगातार हेडलाइंस में बने रहे। इससे न केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर उनकी दावेदारी मजबूत हुई। बल्कि शहरी प्रशासन से लोगों के मन में उनके प्रति एक अलग छवि भी पैदा हुई।
वर्तमान में इस विभाग की जिम्मेदारी डीके शिवकुमार ने अपने खास सहयोगी और वरिष्ठ विधायक कृष्णा बायरे को सौंपी है। वह इससे पहले राजस्व मंत्री भी रह चुके हैं। उनका संबंध लंबे समय से प्रशासन और शहरी मुद्दों को लेकर रहा है। उनकी नियुक्ति इस बात का संकेत देती है कि मुख्यमंत्री शिवकुमार बेंगलुरू का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में देना चाहते हैं, जिसे प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ शहर की चुनौतियों की भी गहरी समझ हो।
क्यों खास है यह मंत्रालय?
आईटी सेक्टर का हब कहे जाने वाला बेंगलुरु देश के अन्य शहरों से अलग है। यहीं पर हजारों स्टार्टअप्स, मल्टीनेशनल कंपनियां मौजूद हैं। इसकी वजह से यहां पर बड़े स्तर पर रियल स्टेट का काम भी होता है। इस रियल स्टेट और एमनसी्स की वजह से ही बेंगलुरू कर्नाटक के राजस्व उत्पादन में एक बड़ा हिस्सा देता है। देश भर से आने वाले लोग यहां पर रहते हैं। ऐसे में यहां की महत्वपूर्ण परियोजनाओं, फ्लाई ओवर, सुरंगे और भूमि व्यवस्था का खबरें देश भर के स्तर पर जाती है। जनसंख्या ज्यादा होने की वजह से लोकल लेवल पर भी लोगों के बीच में इसको संभालने वाले मंत्री की चर्चा तेज रहती है। सीधी बात यह है कि पूरे कर्नाटक में लगातार काम करने के बाद भी किसी नेता का इतना नाम नहीं होता है, जितना बेंगलुरू के लिए काम करने पर होता है। बीडीए ही वह विभाग है, जो राज्य सरकार के फेल होने या पास होने का पता लगाने का सबसे बड़ा तरीका है।




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