चिंता की बात नहीं, हम पक्के दोस्त हैं; मंत्री के इस्तीफे पर बोले CM DK शिवकुमार, 8 बार के विधायक क्यों हो गए नाराज?
इस्तीफा देने वाले रामलिंगा रेड्डी ने कहा है कि कैबिनेट गठन से पहले उन्हें 2 बार खुद डीके शिवकुमार ने भरोसा दिलाया था। शपथ ग्रहण से एक दिन पहले भी वादा दोहराया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के महज दो दिन बाद ही डीके शिवकुमार को बड़ा झटका लगा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी ने पसंदीदा विभाग न मिलने से नाराज होकर कैमरे के सामने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद अब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का बयान सामने आया है। शिवकुमार ने कहा है कि रामलिंगा रेड्डी उनके अच्छे मित्र हैं और इस मामले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, "रामलिंगा रेड्डी मेरे सहयोगी और बेहद वरिष्ठ नेता हैं। उनकी चिंता यह है कि इस विभाग के साथ उनके लिए गांवों में जाकर बड़े पैमाने पर काम करना शायद संभव न हो, और वह कोई दूसरी जिम्मेदारी संभालना पसंद करेंगे। अगर इस्तीफा पोर्टफोलियो के आवंटन को लेकर है, तो यह उनकी मर्जी थी।" शिवकुमार ने आगे कहा, “मैं इस मामले पर उनसे खुद चर्चा करूंगा और इसे सुलझा लूंगा। चिंता की कोई बात नहीं है। वह अच्छे दोस्त हैं। हम कैबिनेट में सबसे करीबी दोस्तों में से हैं।”
क्यों हो गए नाराज
इससे पहले 72 वर्षीय रामलिंगा रेड्डी को नई सरकार में सिंचाई विभाग दिया गया था, जिससे वे नाराज थे। उन्होंने शुक्रवार को कैमरे के सामने अपने इस्तीफे पर दस्तखत किया है। रेड्डी ने पत्रकारों से कहा कि कैबिनेट गठन से पहले उन्हें डीके शिवकुमार ने खुद भरोसा दिया था कि मुख्यमंत्री बनते ही वह 'बेंगलुरु विकास' विभाग छोड़ देंगे और रेड्डी को इसकी जिम्मेदारी दे दी जाएगी। उनके मुताबिक शपथ ग्रहण से एक दिन पहले भी यही वादा दोहराया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
रेड्डी ने आगे साफ किया कि वह न तो शिवकुमार से नाराज हैं और न ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से, लेकिन वह 'बेंगलुरु विकास' के अलावा कोई दूसरा मंत्रालय स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने बताया है कि अपना इस्तीफा खुद सौंपने के बजाय उन्होंने अपने एक समर्थक के जरिए मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भिजवा दिया है।
कृष्णा बायरे गौड़ा को मिला विभाग
हालांकि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने खुद भी 'बेंगलुरु विकास विभाग' छोड़ दिया है। अब यह अहम जिम्मेदारी वरिष्ठ कांग्रेस नेता कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दी गई है। 53 वर्षीय कृष्णा बायरे गौड़ा बेंगलुरु के बयातरायनपुरा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। वे एक कद्दावर वोक्कालिगा नेता हैं और इससे पहले सिद्धारमैया सरकार में राजस्व मंत्री भी रह चुके हैं। उनके पिता सी. बायरे गौड़ा भी कर्नाटक विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और कृषि मंत्री रह चुके हैं।




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