CJI Suryakant slams Bengal Chief Secretary and DGP over Gherao of Judicial Officers amid SIR in Malda orders NIA probe आप पूरी तरह नाकाम, माफी मांगिए; बंगाल के मुख्य सचिव को CJI की कड़ी फटकार, बोले- था प्री प्लान, India News in Hindi - Hindustan
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आप पूरी तरह नाकाम, माफी मांगिए; बंगाल के मुख्य सचिव को CJI की कड़ी फटकार, बोले- था प्री प्लान

पिछले हफ़्ते मालदा में जब चुनाव अधिकारियों को बंधक बनाया गया था, तब राज्य के मुख्य सचिव ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाया था। कोर्ट ने उनसे कहा, यह आपकी और आपके प्रशासन की पूरी तरह नाकामी है।

Mon, 6 April 2026 06:47 PMPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
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आप पूरी तरह नाकाम, माफी मांगिए; बंगाल के मुख्य सचिव को CJI की कड़ी फटकार, बोले- था प्री प्लान

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद-142 के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव से जुड़े मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसके साथ ही मालदा की घटना को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के फोन कॉल का जवाब नहीं देने पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाई है और उनसे माफी मांगने को कहा है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब उन्होंने पाया कि राज्य पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप हैं।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, "हमें बताया गया है कि चुनाव आयोग ने जांच NIA को सौंप दी है। NIA ने एक शुरुआती स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की है। हमने पाया कि जिन FIRs का ज़िक्र किया गया है, वे राज्य पुलिस ने दर्ज की थीं और राज्य/स्थानीय पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। हम NIA को निर्देश देते हैं कि वह उन FIRs को अपने हाथ में ले ले, चाहे उनमें कोई भी वजह बताई गई हो। इसलिए, अनुच्छेद 142 के तहत हम निर्देश देते हैं कि ऐसी FIRs को NIA अपने हाथ में ले ले, चाहे उनमें कोई भी वजह हो। अगर हमारे आदेश में उदाहरण के तौर पर बताए गए अपराध में अलग-अलग वजहों से दूसरे लोग भी शामिल पाए जाते हैं, तो NIA को और FIRs दर्ज करने की पूरी आज़ादी होगी।" कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि समय-समय पर कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट जमा की जानी चाहिए।

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पिछले हफ्ते क्या हुआ था?

दरअसल, पिछले हफ़्ते मालदा में जब न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था, तब राज्य के मुख्य सचिव ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाया था। कोर्ट ने उनसे कहा, "यह आपकी और आपके प्रशासन की पूरी तरह नाकामी है।" इस पर जब अधिकारी ने जवाब दिया कि वह फ़्लाइट में थे और उन्हें कोई फोन नहीं आया, तो कोर्ट ने कहा कि अगर उन्होंने अपना नंबर शेयर किया होता, तो उन्हें शाम को फोन मिल जाता। जब अधिकारी ने माफ़ी मांगी और उनके वकील सफाई देने लगे, तो नाराज CJI ने कहा, “उनका बचाव मत कीजिए।”

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नौकरशाही की विश्वसनीयता कम हो रही

शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से कहा कि राज्य की नौकरशाही की विश्वसनीयता कम हो रही है और सचिवालय तथा सरकारी कार्यालयों में राजनीतिक दखल बढ़ रहा है। उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया कि मालदा में एसआईआर प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों के घेराव से जुड़ी घटना के सिलसिले में पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से गिरफ्तार 26 लोगों से एनआईए पूछताछ करे। सुप्रीम कोर्ट ने बंधक बनाए जाने की स्थिति पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की रिपोर्ट देखी और कहा कि अब यह मामला केंद्रीय एजेंसी पूरी तरह से स्थानीय पुलिस से अपने हाथ में ले लेगी।

SC ने लिया था स्वत: संज्ञान

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, "मालदा में एसआईआर के काम में शामिल न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना पूर्व नियोजित और उकसावे का नतीजा थी।" बता दें कि मालदा ज़िले में 1 अप्रैल को, चुनावी सूचियों के SIR (विशेष सारांश संशोधन) के काम में लगे सात न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिला जज भी शामिल थीं, को उन लोगों ने घंटों तक घेरे रखा, जो वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाए जाने का विरोध कर रहे थे। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस घटना का संज्ञान लेते हुए एक मामला दर्ज किया था। 2 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का आदेश दिया था।