What happened in Bengal that kept CJI Surya Kant awake until 2 AM and kept the High Court Chief Justice awake as well बंगाल में क्या हुआ कि रात 2 बजे तक जागते रहे CJI सूर्यकांत, HC के चीफ जस्टिस को भी जगाए रखा, India News in Hindi - Hindustan
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बंगाल में क्या हुआ कि रात 2 बजे तक जागते रहे CJI सूर्यकांत, HC के चीफ जस्टिस को भी जगाए रखा

जब पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव आयोग को एक पक्ष के रूप में काम नहीं करना चाहिए तो CJI ने कड़ा पलटवार किया।

Thu, 2 April 2026 12:35 PMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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बंगाल में क्या हुआ कि रात 2 बजे तक जागते रहे CJI सूर्यकांत, HC के चीफ जस्टिस को भी जगाए रखा

पश्चिम बंगाल के मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाए जाने की गूंज दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक में सुनाई दी। इस घटना ने देश की सर्वोच्च अदालत को झकझोर कर रख दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने इस घटना को न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला करार देते हुए इसे सुनियोजित और प्रेरित बताया है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) या एनआईए (NIA) से कराने और खुद इसकी निगरानी करने का फैसला किया है।

क्या है पूरा मामला?

मालदा में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान कुछ लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए थे। इससे नाराज प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कल दोपहर लगभग 3:30 बजे सात न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया, जिनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। इन अधिकारियों को बीडीओ ऑफिस में नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा गया। देर रात करीब 1:00 बजे पुलिस और अर्धसैनिक बलों की एक बड़ी टुकड़ी ने उन्हें रेस्क्यू किया। बचाव अभियान के दौरान भी प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों की गाड़ियों पर पत्थरों और लाठियों से हमला किया जिससे वाहनों के शीशे टूट गए।

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इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार और प्रशासन के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। CJI ने कहा, "यह घटना केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह इस अदालत के अधिकार को सीधी चुनौती है। यह कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और चल रही कानूनी प्रक्रिया को रोकने की एक सोची-समझी साजिश जान पड़ती है।"

रात 2 बजे तक जागते रहे सीजेआई

अदालत ने पश्चिम बंगाल को देश का सबसे ध्रुवीकृत राज्य बताते हुए कहा कि वहां हर कोई राजनीतिक भाषा बोलता है। CJI ने यह भी खुलासा किया कि वे खुद रात 2:00 बजे तक स्थिति की निगरानी कर रहे थे और कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डीजीपी और गृह सचिव को फोन करना पड़ा था।

जांच और सुरक्षा के कड़े निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह इस घटना की जांच CBI या NIA को सौंपे। जांच एजेंसी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी होगी। इसके अलावा कोर्ट ने भविष्य के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सुनवाई या आपत्ति दर्ज कराने के दौरान केवल 2-3 व्यक्तियों को ही अंदर जाने की अनुमति होगी। सुनवाई स्थल के आसपास 5 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गृह सचिव, डीजीपी और जिला मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करना होगा कि न्यायिक अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा मिले ताकि वे अपना काम पूरा कर सकें।

ममता सरकार की खिंचाई

जब पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव आयोग को एक पक्ष के रूप में काम नहीं करना चाहिए तो CJI ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रही है और अधिकारियों को यह बताना होगा कि सूचना मिलने के बावजूद सुरक्षित निकासी में देरी क्यों हुई। जस्टिस जोयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि ये विशेष अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर काम कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा करना अदालत की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर इस हिंसा की निंदा करने की अपील की।