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बंगाल में सब नेता वाली भाषा बोलते हैं, जजों के घेराव पर भड़के CJI; ममता सरकार को सुनाया

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने जमकर नाराजगी जाहिर की है। अदालत का कहना है कि इस घटना की सभी नेताओं को एक सुर में निंदा करनी चाहिए।

Thu, 2 April 2026 12:32 PMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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बंगाल में सब नेता वाली भाषा बोलते हैं, जजों के घेराव पर भड़के CJI; ममता सरकार को सुनाया

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने जमकर नाराजगी जाहिर की है। अदालत का कहना है कि इस घटना की सभी नेताओं को एक सुर में निंदा करनी चाहिए। साथ ही भारत निर्वाचन आयोग को राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती संबंधी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा शीर्ष न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने घटना पर राज्य सरकार और अधिकारियों से कड़े सवाल किए हैं। मालदा जिले में बुधवार शाम 3 महिला जजों समेत 7 अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह घटना पश्चिम बंगाल सरकार और उसके अधिकारियों की तरफ से मुंह मोड़ने जैसा था।

कोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी (DGP), संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और एसएसपी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही, उन्हें 6 अप्रैल को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

सीजेआई सूर्यकांत हुए नाराज

सीजेआई ने राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता से कहा कि पश्चिम बंगाल में सभी 'राजनीतिक की भाषा' बोलते हैं। यह सबसे ज्यादा ध्रुवीकरण वाला राज्य है। साथ ही उन्होंने कहा है कि इस मामले को सीबीआई या एनआईए में से किसी एक को सौंपा जाए। साथ ही रिपोर्ट दाखिल की जाए।

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कोर्ट का आदेश

कोर्ट ने कहा, 'यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की एक निडर कोशिश है, बल्कि यह इस अदालत के अधिकार को भी चुनौती देती है। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि ऐसा लगता है कि यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और बचे हुए मामलों में आपत्ति सुलझाने की चल रही प्रक्रिया को रोकने के लिए सोची-समझी और इरादतन की गई कार्रवाई थी।'

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, 'हम किसी को भी कानून हाथ में लेने या न्यायिक अधिकारियों के दिमाग पर हमला करने की अनुमति नहीं देंगे... यह पश्चिम बंगाल सरकार का अपनी जिम्मेदारी से भागने जैसा भी है। अधिकारियों को यह कारण बताना होगा कि सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकालना क्यों सुनिश्चित नहीं किया।'

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कार्रवाई नहीं होने पर आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट में इस बात पर गौर किया गया कि दोपहर करीब 3 बजकर 30 मिनट पर घेराव शुरू हुआ था। इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट से संपर्क करने के बाद भी कोई कार्रवाई देर शाम त नहीं हुई। कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक मौके पर नहीं पहुंचे थे और उन्हें पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव से बात करनी पड़ी थी।

5 निर्देश जारी किए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात कराएगा। दूसरा, चुनाव आयोग अधिकारियों के आवास पर भी सुरक्षा बल तैनात करे, जिन्हें अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर कोई डर या खतरा महसूस हो रहा है। तीसरा, आयोग और राज्य सरकार न्यायिक अधिकारियों को काम को ठीक से पूरा करने देने के लिए उपाय करे।

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इनके अलावा, गृह सचिव, डीजीपी (DGP), जिला मजिस्ट्रेट और सभी पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि आपत्ति दर्ज करने के लिए परिसर में दो या तीन से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश न दिया जाए। साथ ही, सुनवाई के दौरान एक जगह पर 5 से अधिक लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति न दी जाए। साथ ही मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और राज्य निर्वाचन अधिकारी अनुपालन रिपोर्ट देंगे।