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बंगाल, केरल से तमिलनाडु तक बने रिकॉर्ड, भारत के राजनीतिक नक्शे में क्या-क्या बदला

5 राज्यों के चुनावी नतीजों ने बड़े उलटफेर किए हैं। इससे देश के राजनीतिक नक्शे में कई बदलाव आए हैं। लेफ्ट अब राजनीतिक सत्ता से पूरी तरह बाहर हो गया है। वहीं भाजपा की अब 21 राज्यों में सरकार है या फिर वह उसका हिस्सा है। गंगोत्री से गंगासागर तक उसका पावर कॉरिडोर है।

Mon, 4 May 2026 03:05 PMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान
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बंगाल, केरल से तमिलनाडु तक बने रिकॉर्ड, भारत के राजनीतिक नक्शे में क्या-क्या बदला

पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव ने देश के राजनीतिक नक्शे में कई बदलाव कर दिए हैं। एक तरफ रिकॉर्ड बने हैं तो वहीं दूसरी तरफ तस्वीर ही बदल गई है। इसका असर आने वाले दिनों में राज्यसभा में दिखेगा तो वहीं राज्यों की सत्ता में भी भगवा प्रतिनिधित्व बढ़ता जा रहा है। इस चुनाव ने केरल, बंगाल, तमिलनाडु और असम समेत देश के 5 राज्यों में रिकॉर्ड की बारिश कर दी है। सबसे बड़ा रिकॉर्ड तो यही है कि भाजपा को पहली बार बंगाल में सरकार बनाने का मौका मिला है। यह उसके लिए एक सपने के साकार होने जैसा है।

यही वह राज्य है, जहां के जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी रहने वाले थे। यही नहीं आरएसएस की विचारधारा के भी बंगाल काफी करीब रहा है। संघ की विचारधारा में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले स्वामी विवेकानंद यहीं के थे। ऐसे में भाजपा का यहां पहली बार जीतना मायने रखता है। इस तरह ये चुनावी नतीजे कई रिकॉर्ड बना रहे हैं।

बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार

पहला रिकॉर्ड तो बंगाल की जीत ही है। यहां ममता बनर्जी की सरकार 15 साल की सत्ता के बाद गई है तो भाजपा को पहली बार चांस मिला है। चुनाव के दौरान मीडिया की हेडलाइंस इसी पर थीं कि ममता चौथी बार या पहली बार भाजपा सरकार। इनमें से दूसरी बात सही साबित हुई और पहली बार भाजपा सरकार बन रही है। इस जीत ने भाजपा के लिए नए द्वार खोल दिए हैं। इसका असर राज्यसभा चुनावों में भी दिखेगा। यही नहीं कई तरह के मुद्दों के चलते भाजपा को बैकफुट में माना जा रहा था, लेकिन इस जीत से उसे फिर से नई ताकत मिलेगी।

लेफ्ट अब कहीं नहीं रहा, केरल में ढहा आखिरी किला

कभी बंगाल और केरल वामपंथी किले माने जाते थे। खराब वक्त में भी लेफ्ट का यहां शासन बना रहा था। 2011 में ममता बनर्जी ने यहां जीत हासिल की थी और तब से अब तक लेफ्ट यहां से सत्ता से बाहर है। उसके बाद केरल ही एकमात्र राज्य था, जहां उसकी सरकार थी। अब केरल में कांग्रेस की लीडरशिप वाले यूडीएफ को जीत मिली है। इसके साथ ही लेफ्ट का भारत के राजनीतिक नक्शे से एग्जिट हो चुका है।

तमिलनाडु में ऐक्टर विजय ने चौंकाया

भाषायी अस्मिता और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति करने वाली डीएमके को करारा झटका तमिलनाडु में लगा है। एमके स्टालिन की 10 साल पुरानी सरकार विदा हो गई है। इसके अलावा ऐक्टर विजय थलापति की पार्टी टीवीके ने अकेले ही 110 सीटों पर बढ़त बना रखी है। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेताओं के नेता बनने का पुराना इतिहास रहा है। हालांकि स्टालिन खुद को काफी मजबूत मान रहे थे। ऐसे में नौसिखाय कहे जा रहे विजय की बंपर जीत ने सारे समीकरण ही उलट-पलट दिए हैं। तमिलनाडु में जादुई आंकड़ा 117 का है। इस तरह वह अकेले दम पर भी सत्ता हासिल करने के करीब हैं।

भाजपा का मिशन फतह 21 राज्यों तक पहुंचा

अब भगवा लहर की बात की जाए तो यह 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है। यह भाजपा के लिए कामयाबी के नक्शे पर बढ़ते कदम जैसा है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, असम, ओडिसा, पुडुचेरी, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और आंध्र प्रदेश में फिलहाल भाजपा या फिर उसके नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार है।

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पूरा हुआ PM मोदी का सपना

बंगाल की जीत ने पीएम मोदी के सपने को पूरा कर दिया है। उन्होंने कहा था कि हमारा भविष्य में लक्ष्य होगा कि बंगाल और ओडिशा में जीत मिले। 2024 के आम चुनाव के साथ ही ओडिशा में भाजपा को जीत मिली थी। अब बंगाल का किला भी उसने फतह कर लिया है।

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