Jharkhand High Court refuses to interfere in 25-year-old appointments झारखंड हाईकोर्ट का 25 साल पुरानी नियुक्तियों में दखल से इनकार, अदालत ने क्या तर्क दिया?, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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झारखंड हाईकोर्ट का 25 साल पुरानी नियुक्तियों में दखल से इनकार, अदालत ने क्या तर्क दिया?

झारखंड हाईकोर्ट ने फिजिक्स के लेक्चरर पद पर नियुक्ति को लेकर दायर रिट याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि लगभग 25 वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति में अब हस्तक्षेप करना न्यायसंगत नहीं होगा।

Thu, 5 Feb 2026 06:43 AMRatan Gupta हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड हाईकोर्ट का 25 साल पुरानी नियुक्तियों में दखल से इनकार, अदालत ने क्या तर्क दिया?

झारखंड हाईकोर्ट ने फिजिक्स के लेक्चरर पद पर नियुक्ति को लेकर दायर रिट याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि लगभग 25 वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति में अब हस्तक्षेप करना न्यायसंगत नहीं होगा। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उन्होंने मगध विवि से प्रथम श्रेणी में एमएससी (फिजिक्स) उत्तीर्ण की है और बिहार कॉलेज सेवा आयोग की अनुशंसा के बावजूद उन्हें जेएम कॉलेज, भुरकुंडा में लेक्चरर पद पर नियुक्ति नहीं दी गई। साथ ही आरक्षण नीति के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।

वहीं, हस्तक्षेपकर्ता बिनोद कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि तीसरे पद की नियुक्ति विज्ञापन संख्या 1418/1994 के तहत हुई थी, जिसमें केवल एक ही पद था और उस पर आरक्षण लागू नहीं होता। उन्होंने यह भी बताया कि वे 19 अप्रैल 2000 से सेवा में हैं और 2011 में उनकी पुष्टि भी हो चुकी है। जिन शिक्षकों की नियुक्ति को चुनौती दी गई है, वे लगभग 25 वर्षों से सेवा में कार्यरत हैं।

कोर्ट ने कहा कि जब आयोग की एक वैध प्रक्रिया के तहत नियुक्तियां हो चुकी हैं और लंबे समय से उन पर अमल हो रहा है, तो अब यू-टर्न लेना उचित नहीं होगा। अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए रिट याचिका खारिज कर दी। लंबित सभी अंतरिम अर्जियां भी निस्तारित कर दी।

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झारखंड हाईकोर्ट की एक अन्य खबर की तरफ भी रुख कर लेते हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) पर गंभीर टिप्पणी करते हुए यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को गुरुवार की सुबह 10.30 बजे अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है। जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने पीएचडी प्रवेश से जुड़े मामले में विश्वविद्यालय द्वारा दाखिल शपथ पत्र को प्रथम दृष्टया झूठा और भ्रामक करार दिया है।

याचिकाकर्ता अमित कुमार चौबे ने इंटरनेशनल रिलेशंस विभाग में वर्ष 2023-24 सत्र की पीएचडी प्रवेश नीति को चुनौती दी है। यूनिवर्सिटी ने 22 अगस्त 2025 को दाखिल पूरक शपथ पत्र में दावा किया था कि उक्त सत्र में तीन ओबीसी सीटें खाली थीं, जिन्हें सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को नहीं दिया जा सकता था और इन्हें अगले सत्र के लिए कैरी फॉरवर्ड कर दिया गया। वहीं, याचिकाकर्ता ने 13 नवंबर 2025 के शपथ पत्र में इसका खंडन करते हुए सीट मैट्रिक्स पेश किया, जिसमें कुल 6 सीटों का उल्लेख था-एससी-1, एसटी-0, ओबीसी-4, ईडब्ल्यूएस-0 और यूआर-वन।