Where did 10000 crore rupees go from Jharkhand treasury? Babulal Marandi asks Soren government झारखंड के खजाने से 10000 करोड़ कहां गए? बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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झारखंड के खजाने से 10000 करोड़ कहां गए? बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एक्स पर किए ट्वीट में सरकार को घेरते हुए पूछा- झारखंड सरकार के खजाना का 10,000 करोड़ रुपया कहाँ गया, इसका पता नहीं चल रहा।

Wed, 4 Feb 2026 01:48 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड के खजाने से 10000 करोड़ कहां गए? बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार पर फिर हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर किए ट्वीट में सरकार को घेरते हुए पूछा- "झारखंड सरकार के खजाना का 10,000 करोड़ रुपया कहाँ गया, इसका पता नहीं चल रहा।" मरांडी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन ने झारखंड को दिवालियापन की कगार पर ला खड़ा किया है।

शिक्षा की बदहाली पर सरकार को घेरा

उन्होंने अपने ट्वीट में शिक्षा की बदहाली का जिक्र करते हुए लिखा- “झारखंड के शिक्षा विभाग के पास वेतन देने तक के लिए बजट नहीं बचा है। स्थिति यह है कि राज्य के 10 जिलों में हाई स्कूल शिक्षकों को पिछले 6 महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि 161 शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन का 6.18 करोड़ रुपये बकाया है। छात्रों की छात्रवृत्ति, पोशाक योजना, मिड-डे मील, किताबें और अन्य शैक्षणिक योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।”

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खजाने के 10000 करोड़ कहां गए?

मरांडी ने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी करने का आरोप लगाते हुए लिखा- राज्य का खजाना खाली हो चुका है। विकास योजनाओं के नाम पर लूट, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार ने झारखंड को इस स्थिति में पहुंचा दिया है। हेमंत सोरेन के ऊर्जा विभाग के खाते से 100 करोड़ की डकैती हो चुकी है। कुल मिलाकर झारखंड सरकार के खजाना का ₹10,000 करोड़ कहाँ गया, इसका पता नहीं चल रहा।"

जब तक शिक्षकों के वेतन का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के वेतन पर भी रोक लगाई जानी चाहिए। आपको बताते चलें कि बाबूलाल मरांडी झारखंड के वरिष्ठ नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं। वे वर्तमान में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। मरांडी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सामाजिक आंदोलनों से की और बाद में भाजपा से जुड़कर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाई। वर्ष 2000 में झारखंड राज्य गठन के बाद वे इसके पहले मुख्यमंत्री बने। आदिवासी हितों, भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रुख और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर वे लगातार आवाज उठाते रहे हैं।