Disputes with children then the rights of the elderly at home, Jharkhand High Court decision बच्चों के साथ विवाद तो घर पर बुजुर्गों का हक; घरेलू विवाद में झारखंड हाई कोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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बच्चों के साथ विवाद तो घर पर बुजुर्गों का हक; घरेलू विवाद में झारखंड हाई कोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

कोर्ट ने कहा कि यदि संतान संपत्ति में अधिकार चाहती है, तो माता-पिता के प्रति कर्तव्य भी निभाना होगा। हाईकोर्ट ने उपायुक्त रामगढ़ का आदेश रद्द करते हुए बुजुर्ग दंपति को राहत दी और कहा कि बुजुर्गों को उनके ही घर में असुरक्षित छोड़ना कानून की मंशा के खिलाफ है।

Mon, 16 Feb 2026 08:58 AMSourabh Jain हिन्दुस्तान टीम, रांची, झारखंड
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बच्चों के साथ विवाद तो घर पर बुजुर्गों का हक; घरेलू विवाद में झारखंड हाई कोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बुजुर्ग माता-पिता को उनके ही घर में प्रताड़ना सहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि यदि बुजुर्ग माता-पिता और उनके बच्चे साथ शांति से नहीं रह सकते, तो घर में रहने का अधिकार बुजुर्गों का ही होगा। जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने रामगढ़ के एक बुजुर्ग दंपति की याचिका पर सुनवाई करते हुए उपायुक्त रामगढ़ के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है और कानून भी यही कहता है।

यह है पूरा मामला

यह मामला रामगढ़ के 75 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी कमाई से घर बनाया था। दंपति का आरोप था कि बेटा और बहू उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे, जिससे घर में शांतिपूर्ण जीवन संभव नहीं रह गया था। इस पर उन्होंने वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत एसडीएम कोर्ट में आवेदन दिया था।

DC ने बदल दिया था SDM का फैसला

एसडीएम ने वर्ष 2022 में बेटे और बहू को घर खाली करने का आदेश दिया था। बाद में बेटे-बहू ने इस आदेश को चुनौती दी और डीसी के पास अपील की। उपायुक्त ने पहले दिए गए आदेश में बदलाव कर दिया। इससे असंतुष्ट बुजुर्ग दंपती ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

HC बोला- दोनों पक्षों में हैं गंभीर मतभेद

हाईकोर्ट ने कहा कि विवादित मकान बुजुर्गों की स्वयं अर्जित संपत्ति है। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद हैं और साथ रहना मुश्किल है। अदालत ने कहा कि जब एक ही घर में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व संभव न हो, तो कानून बुजुर्गों के पक्ष में खड़ा होता है। जिन्होंने जीवनभर मेहनत कर घर बनाया, उन्हें अंतिम समय में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए।

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वरिष्ठ नागरिक कानून का उद्देश्य याद दिलाया

अदालत ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2000 का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून बुजुर्गों के जीवन और संपत्ति की रक्षा के लिए बनाया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि संतान संपत्ति में अधिकार चाहती है, तो माता-पिता के प्रति कर्तव्य भी निभाना होगा। हाईकोर्ट ने उपायुक्त रामगढ़ का आदेश रद्द करते हुए बुजुर्ग दंपति को राहत दी और कहा कि बुजुर्गों को उनके ही घर में असुरक्षित छोड़ना कानून की मंशा के खिलाफ है।