major initiative to reduce human-elephant conflict in Jharkhand, rescue center built by Rs 1 crore मानव-हाथी संघर्ष कम करने झारखंड सरकार का बड़ा कदम, 1 करोड़ की लागत से यहां बनाएगी रेस्क्यू सेंटर, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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मानव-हाथी संघर्ष कम करने झारखंड सरकार का बड़ा कदम, 1 करोड़ की लागत से यहां बनाएगी रेस्क्यू सेंटर

राज्य में पिछले कुछ दिनों में हाथियों के हमलों से बड़ी संख्या में कैजुअल्टी की सूचना प्राप्त हुई है। राज्य के रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला, दुमका आदि जिला में हाथियों के हमलों से पिछले कुछ महीनों में लगभग 27 लोगों की मृत्यु हुई है।

Sun, 15 Feb 2026 10:32 AMSourabh Jain हिन्दुस्तान टीम, जमशेदपुर, झारखंड
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मानव-हाथी संघर्ष कम करने झारखंड सरकार का बड़ा कदम, 1 करोड़ की लागत से यहां बनाएगी रेस्क्यू सेंटर

प्रदेश के कोल्हान क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती घटनाओं और घायल वन्यजीवों के उपचार की चुनौतियों को देखते जमशेदपुर के डिमना में हाथियों के लिए अत्याधुनिक रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। वन विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह कोल्हान का पहला हाथी रेस्क्यू सेंटर होगा। इसका निर्माण अप्रैल से शुरू होने की संभावना है।

रेस्क्यू सेंटर में मिलेंगी इतनी सुविधाएं

डिमना लेक के पास करीब 7 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस केंद्र में किचन, फीडिंग सेंटर, ऑपरेशन थियेटर (ओटी), क्वारेंटाइन क्षेत्र, जलस्रोत और सुरक्षित बाड़े जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां घायल, बीमार या भटके हाथियों को लाकर उपचार, निगरानी और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।

इन इलाकों को होगा सबसे ज्यादा फायदा

वर्तमान में कोल्हान क्षेत्र विशेषकर पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में घायल हाथियों को इलाज के लिए टाटा स्टील जू के अस्पताल भेजना पड़ता है, जिससे उपचार में देरी होती है और वन्यजीवों की स्थिति गंभीर हो जाती है। नया रेस्क्यू सेंटर बनने से समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और हाथियों की मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी। यह केंद्र मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में भी सहायक होगा।

हाथियों को सही समय पर मिलेगा इलाज

इस बारे में जानकारी देते हुए दलमा वन्यजीव अभयारण्य के DFO सबा आलम अंसारी ने कहा रेस्क्यू सेंटर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे हाथियों को सही समय पर इलाज मिल सकेगा। सरकार ने इसके लिए जमीन का आवंटन कर दिया है।

बता दें कि राज्य में पिछले कुछ दिनों में हाथियों के हमलों से बड़ी संख्या में कैजुअल्टी की सूचना प्राप्त हुई है। राज्य के रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला, दुमका आदि जिला में हाथियों के हमलों से पिछले कुछ महीनों में लगभग 27 लोगों की मृत्यु हुई है।

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ऐसी घटनाओं को देखने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा है कि जिन क्षेत्रों में हाथियों द्वारा जान-माल की हानि पहुंचाई जा रही है, उन क्षेत्रों के ग्रामीणों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देकर एलीफेंट रेस्क्यू टीम तैयार की जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र से हाथी के विचलन को रोकने के लिए तमाम उपाय किए जाएं। ग्रामीणों को मशाल जलाने के लिए डीजल, पुराने टायर, टॉर्च, सोलर सायरन इत्यादि उपलब्ध कराए जाएं ताकि ग्रामीणों को हाथी भगाने में सहूलियत हो सके। साथ ही कहा है कि वन विभाग प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जागरूकता अभियान और सुरक्षा के जरूरी उपाय करे।