क्या सूरत शहर में बनेगी गुजरात हाई कोर्ट की खंडपीठ, केंद्र सरकार ने दिया यह जवाब
मंत्री ने बताया कि हाई कोर्ट बेंचें जसवंत सिंह कमीशन की सिफारिशों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए फैसले के अनुसार बनाई जाती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसा प्रस्ताव हर तरह से पूरा होना चाहिए और इसमें राज्य के राज्यपाल की मंजूरी भी शामिल होना चाहिए।

गुजरात में लंबे समय से हाईकोर्ट की खंडपीठ बनाने की मांग की जा रही है, समय-समय पर इस बारे में अलग-अलग शहरों के वकीलों द्वारा अभियान भी चलाए गए, हालांकि कभी कुछ फैसला नहीं हो पाया। वहीं अब एकबार फिर पिछले कुछ समय से यही मांग लगातार उठ रही है। कुछ महीनों पहले सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के लोगों को सस्ता और जल्दी न्याय दिलाने के लिए 27 सीनियर वकीलों ने एक पैनल ने राजकोट में हाई कोर्ट की खंडपीठ खोलने की मांग की थी। वहीं ऐसी ही मांग सूरत के वकीलों की तरफ से भी की जा रही थी। जिसके बाद हाल ही में राज्यसभा में इस बारे में एक सवाल पूछा गया। इस दौरान गुजरात के एक सांसद ने सूरत में हाई कोर्ट की बेंच खोलने के बारे में एक सवाल पूछा, जिसके जवाब में गुरुवार को केंद्र सरकार ने बताया कि फिलहाल सूरत या किसी अन्य शहर में गुजरात हाई कोर्ट की बेंच खोलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इस बारे में 'बार एंड बेंच' की एक रिपोर्ट में बताया गया कि गुजरात से राज्यसभा सांसद गोविंदभाई लालजीभाई ढोलकिया ने राज्यसभा में गैर तारांकित प्रश्न लगाते हुए केंद्र सरकार से तीन सवाल पूछे थे। इस दौरान उन्होंने पूछा था, (a) क्या संविधान का आर्टिकल 214 हर राज्य के लिए एक हाई कोर्ट का प्रावधान करता है, जबकि राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 51 मुख्य सीट से दूर बेंच बनाने का प्रावधान करता है। (b) इस प्रावधान के तहत राज्यों में बनाए गए हाई कोर्ट की बेंचों का ब्यौरा क्या है, और (c) क्या सूरत में गुजरात हाई कोर्ट की बेंच बनाने के लिए सरकार के पास कोई प्रस्ताव विचाराधीन है?
इस सवाल का जवाब केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दिया। उन्होंने बताया कि अभी सूरत में हाई कोर्ट बेंच बनाने का कोई पूरा प्रस्ताव भारत सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। मंत्री ने साफ किया कि हाई कोर्ट बेंचें जसवंत सिंह कमीशन की सिफारिशों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए फैसले के अनुसार बनाई जाती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसा प्रस्ताव हर तरह से पूरा होना चाहिए और इसमें राज्य के राज्यपाल की मंजूरी, संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश और राज्य सरकार की तरफ से जरूरी खर्च और इंफ़्रास्ट्रक्चरल सुविधाएं देने का भरोसा भी शामिल होना चाहिए।
मेघवाल ने बताया कि अभी सूरत में हाई कोर्ट बेंच बनाने के लिए भारत सरकार के पास कोई पूरा प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
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