Toddler swallows Hulk toy in Ahmedabad, Civil Hospital doctors saves his life डॉक्टर्स ने 'हल्क' से बचाई डेढ़ साल के बच्चे की जान, गुजरात में सामने आई अलर्ट करने वाली घटना, Gujarat Hindi News - Hindustan
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डॉक्टर्स ने 'हल्क' से बचाई डेढ़ साल के बच्चे की जान, गुजरात में सामने आई अलर्ट करने वाली घटना

डॉक्टर ने बताया कि एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से खिलौने को बाहर निकालने के दौरान हवा की वजह से वह बार-बार फिसल रहा था। इस दौरान उसे हाथ या पैर से खींचने पर वह वाल्व में फंस सकता था, जिससे जान पर बन आ सकती थी।

Tue, 3 Feb 2026 03:30 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, अहमदाबाद, गुजरात
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डॉक्टर्स ने 'हल्क' से बचाई डेढ़ साल के बच्चे की जान, गुजरात में सामने आई अलर्ट करने वाली घटना

गुजरात के अहमदाबाद शहर से छोटे बच्चों के माता-पिता को अलर्ट करने वाला मामला सामने आया है। यहां पर डेढ़ साल के एक बच्चे वंश ने खेल-खेल में प्लास्टिक का एक खिलौना निगल लिया, जो कि दिखने में अमेरिकी कॉमिक्स व फिल्मों के सुपरहीरो 'हल्क' की तरह था। उसे निगलने के बाद बच्चे को घबराहट और उल्टियां होने लगीं और उसकी हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद परिजन उसे शहर के सिविल अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने पहले एक्स-रे किया और फिर पेट में खिलौने की जानकारी लगते ही एंडोस्कॉपी करते हुए उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन इसमें काफी परेशानी आई। हालांकि बड़ी कोशिशों के बाद डॉक्टर्स ने सुरक्षित तरीके से उस खिलौने को बाहर निकाल लिया और बच्चे की जान बचा ली। डॉक्टर्स का कहना है कि अगर वह खिलौना आंत में और अंदर चला जाता, तो आंत फटने का गंभीर खतरा हो सकता था और फिर सर्जरी की जरूरत पड़ती, हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ और बच्चे को नुकसान पहुंचाए बिना वह खिलौना निकाल लिया गया।

यह घटना 18 जनवरी को हुई थी,उस दिन बच्चे को उल्टियां करते देख उसकी मां भाविका बेन को शक हुआ कि बच्चे ने कुछ गलत तो नहीं खा लिया, इसके बाद उन्होंने बेटे वंश के खिलौने देखे तो उनमें से एक छोटा सा प्लास्टिक के हाथ पैर वाला हल्क का खिलौना गायब मिला। जब मां ने बच्चे से उस खिलौने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसने उसे निगल लिया है। इसके बाद घबराए परिजन उसे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने पहले दर्द से परेशान बच्चे का एक्स-रे किया और जांच में पाया कि अंदर कोई छोटा सा प्लास्टिक का टुकड़ा नहीं बल्कि हाथ-पैर वाला पूरा खिलौना फंसा हुआ था।

डॉक्टर ने बताई इलाज मे क्या थी सबसे बड़ी चुनौती

इस मुश्किल घड़ी में बच्चे का इलाज करने वाली मेडिकल टीम के सदस्य डॉक्टर राकेश जोशी ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े खिलौने को खाने की नली और पेट के बीच के नेचुरल वाल्व से निकालना था। उन्होंने कहा कि जब डॉक्टरों ने एंडोस्कोप जैसे नाजुक उपकरण से खिलौने को पकड़ने की कोशिश की, तो पेट में मौजूद हवा के कारण वह बार-बार फिसल रहा था। ऐसे में अगर यह आंतों में चला जाता, तो इससे रुकावट आना या आंतों के फटने की भी आशंका थी।'

डॉक्टर ने आगे बताया कि एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से खिलौने को बाहर निकालने के दौरान हवा की वजह से वह बार-बार फिसल रहा था। इस दौरान उसे हाथ या पैर से खींचने पर वह वाल्व में फंस सकता था, जिससे स्थायी नुकसान हो सकता था। जिसके बाद हमारी सर्जिकल टीम ने बहुत ही सावधानी और धैर्य के साथ, खिलौने को उसके सिर से मजबूती से पकड़ लिया और बिना किसी परेशानी के सावधानी से सफलतापूर्वक वाल्व से बाहर निकाल लिया।

साथ ही डॉक्टर जोशी ने यह भी बताया कि अस्पताल में यह प्रक्रिया 19 जनवरी को की गई थी, जबकि उस दिन डिपार्टमेंट में एक इंटरनेशनल वर्कशॉप चल रही थी। इस इवेंट के बावजूद, डॉ. जोशी ने डॉ. श्वेता और एनेस्थीसिया टीम की मदद से खुद इमरजेंसी इंटरवेंशन का नेतृत्व किया।

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बच्चे के पिता व डॉक्टर्स ने की खास अपील

खिलौना बाहर निकलने के बाद वंश पूरी तरह से ठीक हो गया है और अब स्वस्थ है। इस जटिल प्रक्रिया के बाद बच्चे के पिता भावेशभाई साहनी ने अपने परिवार के साथ एक वीडियो जारी किया और डॉक्टर्स की टीम का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने अन्य माता-पिताओं से भी खेलते समय बच्चों पर नजर रखने की अपील की। ​उधर बच्चे का इलाज करने वाले डॉक्टर जोशी ने भी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी अभिभावकों से बच्चों पर कड़ी नजर रखने की अपील की।

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