गुजरात विधानसभा में ‘पानी की बोतल’ पर बवाल, कांग्रेस विधायक को स्पीकर ने लगाई फटकार
गुजरात विधानसभा में शुक्रवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस विधायक शैलेश मनुभाई परमार कथित तौर पर प्रदूषित भूजल का सैंपल प्लास्टिक की बोतल में भरकर सदन में ले आए। स्पीकर शंकर चौधरी ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई और दोबारा ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

गुजरात विधानसभा में शुक्रवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस विधायक शैलेश मनुभाई परमार कथित तौर पर प्रदूषित भूजल का सैंपल प्लास्टिक की बोतल में भरकर सदन में ले आए। स्पीकर शंकर चौधरी ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई और दोबारा ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
29 गांव पलूशन से हैं प्रभावित
मामला प्रश्नकाल के दौरान उठा। खेड़ब्रह्मा से कांग्रेस विधायक तुषार चौधरी ने महिसागर जिले के बालासिनोर के जामियतपुरा स्थित Maurya Enviro Project Private Limited के डंपिंग साइट के आसपास मौजूद भूजल में कैमिकल पलूशन को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने दावा किया कि आसपास के करीब 29 गांव इस कथित पलूशन से प्रभावित हैं।
मंत्री बोले- पलूशन से जुड़े बड़े सबूत नहीं
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक- सरकार की ओर से वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीणभाई माली ने बताया कि साल 2024 और 2025 में कुल पांच शिकायतें मिली थीं। इसके आधार पर गुजरात पलूशन कंट्रोल बोर्ड ने 3 फरवरी 2024, 12 अप्रैल 2024, 16 अगस्त 2024, 3 दिसंबर 2024 और 18 अप्रैल 2025 को इकाई परिसर और आसपास से 26 से अधिक भूजल सैंपल लिए थे। मंत्री ने कहा कि जांच में किसी बड़े या दीर्घकालिक प्रदूषण के सबूत नहीं मिले। जांच में केवल मामूली और अस्थायी बदलाव देखे गए।
शिकायत के बावजूद चल रहीं इकाइयां
सरकारी जवाब से असंतुष्ट बयाद के निर्दलीय विधायक धवलसिंह नरेंद्र सिंह जाला ने सरकार से पूछा कि क्या वह इकाई को बंद करने के लिए गंभीर है या नहीं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री को स्थिति से अवगत कराया था, बावजूद इसके इकाई अभी भी चल रही है।
इसी दौरान दाणीलीमड़ा से विधायक शैलेश परमार खड़े हुए और एक प्लास्टिक की बोतल दिखाते हुए दावा किया कि यह प्रभावित गांवों से लिए गए पानी का सैंपल है। उन्होंने कहा कि शिकायतें किसी प्रभावशाली व्यक्ति की नहीं बल्कि ग्रामीणों की हैं। परमार के इस कदम पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
फैक्ट्री को बंद करने का आदेश मिला, लेकिन…
वन एवं पर्यावरण कैबिनेट मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने सदन को बताया कि फैक्ट्री को दो बार बंद करने का आदेश दिया गया था। आखिरी आदेश 27 मई 2024 को जारी हुआ, लेकिन कंपनी को हाईकोर्ट से स्टे मिल गया। उन्होंने यह भी कहा कि इकाई की पर्यावरण की एनओसी अगस्त 2026 तक वैध है। शिकायतों के आधार पर समय आने पर एक्शन लिया जाएगा।
स्पीकर ने कांग्रेस विधायक को फटकारा
प्रश्नकाल के बाद कैबिनेट मंत्री जीतू वघानी ने ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ उठाते हुए परमार के व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई। स्पीकर शंकर चौधरी ने कहा- विधानसभा के नियम किसी भी सदस्य को बाहर से कोई सामान लाकर सदन में प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कदम सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरे हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने भूजल प्रदूषण के मुद्दे के साथ-साथ विधानसभा की मर्यादा और नियमों पर भी नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष जहां ग्रामीणों के स्वास्थ्य का सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार जांच रिपोर्ट का हवाला देकर आरोपों को खारिज कर रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पर्यावरणीय अनुमति की अवधि समाप्त होने से पहले या बाद में सरकार क्या कदम उठाती है।
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