Who brought Samrat Choudhary into BJP How he ascend to CM post in just 8 years full story सम्राट चौधरी को भाजपा में कौन लाया था? 8 साल में ही कैसे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए, पूरी कहानी, Bihar Hindi News - Hindustan
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सम्राट चौधरी को भाजपा में कौन लाया था? 8 साल में ही कैसे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए, पूरी कहानी

बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 8 साल पहले ही भाजपा में आए थे। इससे पहले उन्होंने आरजेडी में लंबी पारी खेली। फिर जेडीयू और हम में भी रहे। भाजपा में आने के बाद सम्राट ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उन्हें एक के बाद एक अहम जिम्मेदारियां मिलती रहीं।

Wed, 15 April 2026 11:23 AMJayesh Jetawat हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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सम्राट चौधरी को भाजपा में कौन लाया था? 8 साल में ही कैसे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए, पूरी कहानी

Samrat Choudhary: बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पहले मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी की पार्टी में एंट्री 8 साल पहले ही हुई थी। भाजपा में आने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जो जिम्मेदारी मिलती रही, उसे वे बखूबी निभाते रहे। यही कारण है कि वह भाजपा शीर्ष नेतृत्व के चहेते बन गए और इतनी कम अवधि में प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और डिप्टी सीएम बनने के बाद अब मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं। बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेताओं में से एक शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी ने लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। वह राबड़ी देवी की सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री भी रहे थे।

सम्राट चौधरी ने भाजपा में आने के बाद कम अवधि में ही सरकार से लेकर संगठन तक में अहम जिम्मेदारी निभाई। बिहार भाजपा में नेतृत्व को लेकर पैदा हुए खालीपन को भरने में उन्होंने कामयाबी हासिल की। भाजपा में आने के बाद उन्होंने राजनीतिक बुलंदियों को पाया। इसी का परिणाम रहा कि वे सूबे की सत्ता के शीर्ष पद पर आसीन हो रहे हैं।

सम्राट चौधरी को भाजपा में कौन लाया था?

पूर्व मंत्री पिता शकुनी चौधरी के साथ आरजेडी में लंबी पारी खेलने वाले सम्राट चौधरी कुछ समय के लिए नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में रहे। फिर जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) में गए। 2018 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। उन्हें भाजपा में लाने वाले पार्टी के दिवंगत नेता सुशील कुमार मोदी थे।

उस समय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय थे। सम्राट को नित्यानंद की टीम में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली थी। साल 2020 में जब एनडीए की सरकार बनी तो सम्राट चौधरी पंचायती राज मंत्री बनाए गए। जब 2021 में एनडीए गठबंधन टूट गया तो सम्राट चौधरी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई।

सदन में उन्होंने विरोधी दल के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। जनहित के मुद्दे पर सम्राट चौधरी ने सरकार को कई बार असहज किया। विपक्षी नेता के तौर पर सम्राट चौधरी के तेवर को देखते हुए उन्हें मार्च 2023 में सांसद संजय जायसवाल के स्थान पर बिहार भाजपा की कमान सौंपी गई।

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सुशील मोदी के खालीपन को सम्राट ने भरा

बतौर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने संगठन को धारदार बनाया। खासकर लालू प्रसाद यादव, राजद और महागठबंधन सरकार पर वे काफी हमलावर रहे। एक तरह से सुशील मोदी के बाद जो पार्टी में नेतृत्व को लेकर रिक्तता दिख रही थी, सम्राट चौधरी ने उसे बखूबी पूरा किया। यही कारण रहा कि जब जनवरी 2024 में फिर से एनडीए की सरकार बनी तो पार्टी ने उन्हें सरकार में दो नंबर की कुर्सी यानी उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।

बतौर वित्त एवं वाणिज्यकर मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने बजट भाषण में कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। लोकसभा चुनाव के समय सम्राट चौधरी ही बिहार भाजपा के प्रमुख थे। पार्टी 12 सीटों पर जीत हासिल की। एक व्यक्ति एक पद के तहत सम्राट चौधरी ने जुलाई 2024 में पार्टी की कमान छोड़ दी।

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वित्त मंत्री और गृह मंत्री रहे

बतौर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में ही भाजपा नवंबर 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ी। सरकार की ओर से की गई तमाम जनकल्याणकारी घोषणाओं का श्रेय सम्राट चौधरी को ही जाता है। माना जाता है कि सरकार की ओर से जो भी निर्णय लिए गए, नीतीश कुमार की सहमति पर वह सम्राट चौधरी ही लेते रहे। नौकरशाह भी सम्राट चौधरी से भी दिशा-निर्देश लिया करते। ऐसा पहली बार हुआ जब भाजपा गठबंधन में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।

एनडीए के 202 में से भाजपा ने 89 सीटों पर जीत हासिल की। सम्राट चौधरी की कार्यक्षमता को देखते हुए ही पार्टी ने दुबारा उन पर भरोसा किया और वे उपमुख्यमंत्री बनाए गए। यही नहीं, एनडीए के इतिहास में पहली बार गृह विभाग मुख्यमंत्री से हटकर सम्राट चौधरी के जिम्मे आया। गृह मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने कई घोषणाएं कीं। खासकर अपराधियों को गया में पिंडदान करने जैसे उनके वाक्य कानून-व्यवस्था को लेकर उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता रहा।

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नीतीश को हटाने के लिए बांध लिया था मुरेठा

सम्राट चौधरी अपने बेबाकी स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। विरोधियों पर वे आक्रामक तरीके से हमला करते हैं। एक समय उन्होंने नीतीश कुमार को गद्दी से हटाने के लिए प्रतीकात्मक तौर पर मुरेठा (पगड़ी) बांध लिया था। हालांकि जनवरी 2024 में एनडीए की सरकार बनने पर उन्होंने अयोध्या में मुंडन करा अपना मुरेठा उतार दिया था।

(हिन्दुस्तान ब्यूरो की रिपोर्ट)

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