रामधनी गया, अब कनबुच्चा का राज! सुल्तानगंज गंगा घाट से कमाई की खूनी लड़ाई में शहीद हुए कृष्ण भूषण
Ramdhani Yadav Vs Kanbuchha Yadav: सुल्तानगंज नगर परिषद के ईओ कृष्ण भूषण की हत्या ने श्रावणी मेला से पहले गंगा के इस पावन घाट से अवैध कमाई को लेकर रामधनी यादव और कनबुच्चा यादव गैंग की लड़ाई को फोकस में ला दिया है।

Ramdhani Yadav Vs Kanbuchha Yadav in Sultanganj: सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण की हत्या से देवघर बाबाधाम की कांवड़ यात्रा शुरू करने के केंद्र सुल्तानगंज के गंगा घाट से होने वाली अवैध कमाई की आपराधिक लड़ाई फोकस में आ गई है। लंबे समय से इस घाट पर लगने वाली दुकानों, बस स्टैंड, पार्किंग वगैरह से अवैध वसूली को लेकर स्थानीय माफिया रामधनी यादव और रंजीत यादव उर्फ कनबुच्चा यादव गैंग के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। आज सुबह रामधनी यादव के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद फिलहाल घाट पर कनबुच्चा यादव का एकछत्र राज कायम होता दिख रहा है।
सुल्तानगंज के दोनों माफिया रामधनी और कनबुच्चा ने अपराध और राजनीति में बराबर पांव पसार रखा है, इसलिए दोनों की लड़ाई चुनाव से लेकर अंडरवर्ल्ड तक फैली हुई थी। रामधनी यादव की पत्नी नीलम देवी नगर परिषद की सभापति रही हैं और फिलहाल उपसभापति हैं। कनबुच्चा की पत्नी दयावती देवी भी नगर परिषद की दो बार अध्यक्ष रही हैं, जिनको अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाकर ही नीलम देवी पहली बार अध्यक्ष बनी थीं। नगर परिषद के मौजूदा सभापति राज कुमार गुड्डू को कनबुच्चा यादव का समर्थन हासिल है, जिसकी वजह से रामधनी की कनबुच्चा के साथ-साथ राज कुमार से भी लड़ाई चल रही थी।
2023 के फरवरी में जब रामधनी यादव को गोली मारी गई थी तो कनबुच्चा यादव के साथ-साथ राज कुमार का नाम भी आया था। उसी साल नवंबर में जब घर में घुसकर कनबुच्चा यादव को गोली मारी गई तो उस केस में रामधनी यादव का नाम आया था। दोनों गैंग के बीच खून-खराबा कई सालों से हो रहा है। ईओ हत्याकांड के बाद पुलिस का इकबाल कायम करने के लिए रामधनी यादव को मुठभेड़ में मार गिराया गया है।
सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ ट्रस्ट की करीब 50 एकड़ जमीन पर रामधनी यादव का वर्षों से अवैध कब्जा है। नदी क्षेत्र की इस जमीन की कीमत 100 करोड़ बताई जा रही है। इसी जमीन पर रंजीत यादव उर्फ कनबुच्चा भी कब्जा जमाता रहा है। दोनों के बीच अदावत की एक वजह यह भी है। घाट पर लगने वाली दुकानों से बट्टी (अवैध वसूली) भी रामधनी और कनबुच्चा के बीच झगड़े का कारण रहा। दोनों अपने-अपने प्रभाव वाले इलाके में वसूली करते थे। पुराने घाट को फिर से चालू करने की चर्चा से भी रामधनी यादव हिला हुआ था, क्योंकि वह इलाका कनबुच्चा के कंट्रोल में है। चर्चा है कि राज कुमार गुड्डू पुराने घाट को चालू करवाने की कोशिश में हैं, जिससे नमामि गंगे घाट पर आ रहे लोगों के पास दूसरे घाट का विकल्प तैयार हो सकता है।
राज कुमार गुड्डू और कनबुच्चा यादव के हाथ मिला लेने से रामधनी यादव की अवैध कमाई बंद हो रही थी। गंगा से बालू की अवैध ढुलाई में हर ट्रैक्टर से 500 रुपए की कमाई बंद हो गई। दो साल से ठेका-पट्टा भी रामधनी के विरोधियों को मिलने लगा। राज कुमार गुड्डू के समर्थकों को श्रावणी मेला समेत दूसरे ठेकों से करोड़ों की कमाई होने लगी। समय के साथ राज कुमार गुड्डू का राजनीतिक कद बढ़ा और वो इलाके में भाजपा के चेहरा बन गए।
रामधनी की पत्नी नीलम देवी ने 2020 में लोजपा के टिकट पर सुल्तानगंज से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। इस चुनाव में नीलम की हार के बाद रामधनी और राज कुमार गुड्डू की दुश्मनी बढ़ती ही चली गई। दो दिन पहले भी ठेका खुला था, जिसमें रामधनी यादव गिरोह को कोई काम नहीं मिला। रामधनी को लगने लगा कि राज कुमार गुड्डू के रहते उसकी कमाई मुश्किल है और पत्नी का भी अध्यक्ष बनना दूभर है। रामधनी यादव ने अपने आपराधिक साम्राज्य को डूबने से बचाने के लिए राज कुमार गुड्डू को रास्ते से हटाने की योजना बनाई और नगर परिषद के कार्यालय पर ही हमला बोल दिया। दुर्भाग्य यह रहा कि अपराधियों से भिड़ गए ईओ कृष्ण भूषण की गोली लगने से मौत हो गई।




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