बचपन में उठा पिता का साया, भाई ने पाला; झारखंड के एयर एंबुलेंस हादसे में पटना के पारामेडिकल कर्मी की मौत
परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद ‘रेड बर्ड’ कंपनी का कोई अधिकारी सहायता के लिए आगे नहीं आया और न ही झारखंड सरकार की ओर से अपेक्षित सहयोग मिली। शव को पटना लाने में भी परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

झारखंड के चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे ने पटना के एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी। विमान हादसे में जिन सात लोगों की जान गई, उनमें कुर्जी के पारामेडिकल कर्मी 24 वर्षीय सचिन कुमार मिश्रा भी शामिल थे। मंगलवार की शाम जैसे ही उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, मां बेसुध हो गईं। पिता के निधन के बाद बड़े भाई के सहारे पले-बढ़े सचिन परिवार की उम्मीद थे। सचिन 2017 से नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े थे। सचिन कुर्जी स्थित जय प्रकाश नगर में मां और भाइयों के साथ किराये के मकान में रहते थे। वैसे उनका पैतृक घर सीवान जिले के तेलकथू था।
पिछले 20 वर्षों से परिवार पटना में रह रहा है। इससे पहले सभी झारखंड में ननिहाल में रहते थे। सचिन के नाना कुर्जी स्थित देवी स्थान में पुजारी थे। नाना के निधन के बाद उनके मामा वहां पुजारी बने। झारखंड के चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे में जान गंवाने वाले कुर्जी के 24 वर्षीय सचिन कुमार मिश्रा के सिर से बचपन में ही पिता का साया छिन गया था। पिता जितेंद्र मिश्रा का निधन तभी हो गया था जब सचिन काफी छोटे थे। इसके बाद बड़े भाई विनीत मिश्रा ने उन्हें बेटे की तरह पाला-पोसा।
बड़े भाई पुजारी हैं। मंझले भाई गुजरात में सेफ्टी ऑफिसर हैं, जबकि सबसे छोटा भाई सेफ्टी ऑफिसर की पढ़ाई कर रहा है। एक बहन भी हैं। परिजनों के अनुसार, सचिन वर्ष 2017 से नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े थे। बीएससी नर्सिंग पूरी करने के बाद पिछले 3 वर्षों से वह ‘रेड बर्ड’ एयर एंबुलेंस में पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में कार्यरत थे।
सोमवार की रात करीब एक बजे चतरा अस्पताल से हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां खबर सुनते ही बेसुध हो गईं। परिजन उसी रात निजी वाहन से झारखंड के लिए रवाना हुए और मंगलवार शाम सड़क मार्ग से शव लेकर पटना पहुंचे। कुर्जी में शव पहुंचते ही भीड़ उमड़ पड़ी ।
कोई सहायता नहीं मिली
परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद ‘रेड बर्ड’ कंपनी का कोई अधिकारी सहायता के लिए आगे नहीं आया और न ही झारखंड सरकार की ओर से अपेक्षित सहयोग मिली। शव को पटना लाने में भी परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। परिजनों ने मांग की कि ड्यूटी पर जान गंवाने वाले पैरामेडिकल कर्मियों को सम्मानजनक मुआवजा मिले। हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सचिन के बड़े भाई भावुक होकर बोले, पिता के बाद वही घर की उम्मीद था। मैंने उसे अपने बेटे की तरह पाला और पढ़ाया। उसके बिना परिवार अधूरा हो गया।
औरंगाबाद निवासी डॉक्टर की भी गई जान
औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के मनिका निवासी डॉ. विकास कुमार गुप्ता की भी इस हादसे में मौत हो गई। वे बजरंगी प्रसाद के पुत्र थे और रांची सदर अस्पताल में पदस्थापित थे। डॉ.विकास की पत्नी मिनी राय स्टेट बैंक में कार्यरत हैं। उनका एक पुत्र आठ वर्षीय मोहुल कुमार है। बजरंगी प्रसाद ने कहा कि उनके पुत्र ने ओडिशा के कटक से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी।
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