यूएई से ईरान तक फंसे हैं बिहारी, जंग की दहशत से परेशान परिवारों में दुआओं का दौर
Iran-America War: दोहा, सऊदी अरब और बहरीन में कार्यरत संतोष, जयप्रकाश, अंकित सहित अन्य कामगारों ने भी फैक्ट्रियां बंद होने और सुरक्षा अलर्ट जारी होने की पुष्टि की है। इधर, गांवों में परिजन चिंतित हैं। शनिवार की रात अधिकांश परिवारों की आंखों में नींद नहीं थी।

Iran-America War: मध्य-पूर्व के देशों में उत्पन्न हालात से इन देशों में रहने वाले बिहारी कामगार और प्रवासी खौफजदा हैं। ईरान में रह-रहकर हो रहे धमाकों के बीच उनकी जिंदगी दहशत में कट रही है। उधर, बिहार के उन गावों में बुजुर्ग माता-पिता या पत्नी खाड़ी देशों में रहने वाले अपने-अपने परिजनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। इन देशों में रहने वाले लोगों के मुताबिक सायरन बजते ही खौफ का माहौल बन जाता है। संयुक्त अरब अमीरात में बड़ी संख्या में बिहार के नागरिक फंस गए हैं, क्योंकि उड़ानें रद्द हैं। कई शहरों में खाने-पीने की दुकानें भी बंद हैं। इंटरनेट की सेवा भी बाधित है।
खाड़ी देशों में जारी बमबारी की घटनाओं के बीच बिहार के कई लोग भी विदेशों में फंस गए हैं।कटिहार जिले में थावे प्रखंड के उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके सदस्य रोजगार के सिलसिले में विदेशों में कार्यरत हैं। दुबई, दोहा (कतर), सऊदी अरब, बहरीन सहित कई स्थानों से कामगारों ने तनावपूर्ण स्थिति की जानकारी दी है। वहां सुरक्षा कारणों से फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
सभी कर्मचारियों को अपने-अपने आवास में रहने का निर्देश दिया गया है। बाहर निकलने पर सख्त मनाही है। कामगारों ने बताया कि संबंधित कंपनियां समय-समय पर फोन के माध्यम से कर्मचारियों से संपर्क कर स्थिति की जानकारी ले रही हैं। आवश्यक खाद्य सामग्री और जरूरत का सामान उपलब्ध कराने का प्रयास भी किया जा रहा है।
हालांकि, इंटरनेट सेवाएं बाधित होने से परिजनों से संपर्क साधना कठिन हो गया है। वहां किसी भी प्रकार का फोटो या वीडियो साझा करने पर रोक लगा दी गई है। कामगारों के अनुसार हर धमाके के साथ भय और अनिश्चितता का माहौल गहरा हो जाता है। वृंदावन सदासी राय गांव निवासी मनीष, जो दुबई में कार्यरत हैं, ने बताया कि हालात सामान्य नहीं हैं। सभी लोग क्वार्टर में ही रह रहे हैं।
सभी कर्मचारियों को अपने-अपने आवास में रहने का निर्देश दिया गया है। बाहर निकलने पर सख्त मनाही है। कामगारों ने बताया कि संबंधित कंपनियां समय-समय पर फोन के माध्यम से कर्मचारियों से संपर्क कर स्थिति की जानकारी ले रही हैं। आवश्यक खाद्य सामग्री और जरूरत का सामान उपलब्ध कराने का प्रयास भी किया जा रहा है। हालांकि, इंटरनेट सेवाएं बाधित होने से परिजनों से संपर्क साधना कठिन हो गया है। वहां किसी भी प्रकार का फोटो या वीडियो साझा करने पर रोक लगा दी गई है। कामगारों के अनुसार हर धमाके के साथ भय और अनिश्चितता का माहौल गहरा हो जाता है। वृंदावन सदासी राय गांव निवासी मनीष, जो दुबई में कार्यरत हैं, ने बताया कि हालात सामान्य नहीं हैं। सभी लोग क्वार्टर में ही रह रहे हैं।
इसी तरह दोहा, सऊदी अरब और बहरीन में कार्यरत संतोष, जयप्रकाश, अंकित सहित अन्य कामगारों ने भी फैक्ट्रियां बंद होने और सुरक्षा अलर्ट जारी होने की पुष्टि की है। इधर, गांवों में परिजन चिंतित हैं। शनिवार की रात अधिकांश परिवारों की आंखों में नींद नहीं थी। लोग बार-बार फोन कर अपनों की कुशलक्षेम जानने का प्रयास करते रहे। संपर्क होने पर ही थोड़ी राहत मिल पा रही है। विदेशों में जहां कामगार भय और अनिश्चितता के बीच दिन गुजार रहे हैं, वहीं यहां उनके परिजन हर पल दुआ और प्रार्थना में लगे हैं।
दुबई में फंसे मनीष कुमार ने कहा कि स्थिति तनावपूर्ण है। बाहर निकलने की मनाही है। शनिवार पूरी रात धमाकों की आवाज सुनाई देती रही। कंपनी फोन कर हालचाल ले रही है, लेकिन डर का माहौल बना हुआ है। दोहा में रहने वाले संतोष कुमार ने कहा कि हर धमाके के साथ दिल दहल उठता है। इंटरनेट बंद होने से घर वालों से बात करना मुश्किल हो गया है। जरूरी सामान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, पर हालात चिंताजनक हैं।
बहरीन में रह रहे अंकित ने कहा कि हमारे आसपास बमबारी तो नहीं हुई, पर पूरी रात नींद नहीं आई। कंपनी समय-समय पर कॉल कर जानकारी ले रही है, लेकिन कब हालात सामान्य होंगे, यह कहना मुश्किल है। सऊदी अरब में फंसे जयप्रकाश ने कहा कि काम पूरी तरह रोक दिया गया है। सभी को क्वार्टर में रहने के लिए कहा गया है। फोटो या वीडियो साझा करने पर रोक है। बाहर क्या हो रहा है, कुछ जानकारी नहीं है। बस धमाके की आवाज सुनाई दे रही है।
होली पर घर आने का टूटा सपना
तीन साल बाद होली में घर आने की खुशी थी, लेकिन अचानक सब कुछ बदल गया। यह कहना है सीवान जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के इटहरी गांव निवासी 24 वर्षीय जितेंद्र प्रसाद का। वे कतर के दोहा स्थित गल्फ एशिया कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं। कंपनी द्वारा कराए गए टिकट पर वे और उनके साथ मुकेश कुमार, हरेंद्र साह, सत्येंद्र साह समेत अन्य युवक पटना लौटने वाले थे। इनके अलावा करीब 20 अन्य युवक भी अलग-अलग फ्लाइट से बिहार लौटने वाले थे।
जितेंद्र बताते हैं कि दोहा एयरपोर्ट पहुंचने पर पता चला कि उड़ानें रोक दी गई हैं। शनिवार और फिर रविवार तड़के उनके बेस कैंप से करीब दस किलोमीटर दूर जोरदार बमबारी हुई। धमाकों की आवाज से हम सब सहम गए। उन्हें पास के अमेरिकी आर्मी बेस कैंप में ठहराया गया है। उधर, दुबई से आने वाले माधोपुर के विमलेश कुमार को भी फ्लाइट रद्द होने से लौटना पड़ा। होली पर घर पहुंचने की उम्मीद फिलहाल अधूरी रह गई है। सारण के रसूलपुर थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव निवासी अनिल प्रसाद ने बताया कि वह शनिवार रात ही अपने साले जितेंद्र प्रसाद को पटना एयरपोर्ट से रिसीव करने की तैयारी कर चुके थे, लेकिन फ्लाइट रद्द होने की सूचना मिली।
भाई की शादी में आना मुश्किल
बिहार के दरभंगा जिले के सिमरी वस्तवार के निवासी मो. वसीम (32 साल) उनलोगों में शामिल हैं, जो पश्चिम एशिया में बमबारी के बीच फंसे हैं। इराक के एक शहर में रहने वाले वसीम बताते हैं कि गत रात अचानक एक के बाद एक बम के धमाके दिल को दहलाने वाली थी। इसके साथ ही सायरन की आवाज आने लगी। लोगों को घरों में सुरक्षित रहने की सलाह दी जा रही थी। धमाकों और सायरन के बीच खौफ में रात गुजारनी पड़ रही है। उन्हें इसी माह भाई की शादी में दरभंगा आना था। मो. वसीम से फोन पर ‘हिन्दुस्तान’ संवाददाता ने फोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान वह खौफजदा हैं। बताया कि इरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले और बदले में इरान की ओर से मिसाइल दागे जाने से यहां रह रहे बिहार के लोग सहमे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि अभी खाने-पीने की समस्या तो नहीं है। लेकिन युद्ध लंबा खिंच गया तो बहुत ज्यादा संकट हो जाएगा। वैसे ईरान सरकार और भारतीय दूतावास की ओर से एडवाइजरी (सलाह) जारी हुई है। किसी भी तरह की समस्या पर तुरंत संपर्क करने के लिए अधिकारियों के फोन नंबर उपलब्ध कराये गये हैं। बातचीत के दौरान वसीम की आवाज में दर्द साफ महसूस की जा सकती है। वे कहते हैं कि हवाईअड्डा बंद हो गया है। इसी माह 24 मार्च को मेरे भाई की शादी थी। इसमें आना था। लेकिन अब समस्या खड़ी हो गई है। अल्लाह से दुआ करते हैं कि जल्द युद्ध रुक जाए। सब कुछ सामान्य हो जाए, ताकि भाई की शादी में अपने घर दरभंगा लौट सकें।
कुवैत में ब्लैक आउट हो गया
पटना के गोला रोड निवासी इंजीनियर श्रवण कुमार कुवैत ऑयल कंपनी में कार्यरत हैं। उन्होंने रविवार को फोन पर युद्ध की भयावहता बताई। उन्होंने बताया कि कुवैत में रविवार की देर रात को आठ से दस धमाके सुने गए। एयरपोर्ट के टर्मिनल -1 पर हुए ड्रोन से हमले में एक व्यक्ति के मरने की सूचना मिली है। सरकार ने देर रात को कुवैत में ब्लैक आउट किया था। कुवैत में रह रहे भारतीयों को भारतीय दूतावास के पोर्टल और विभिन्न न्यूज एजेंसियों से अद्यतन खबरें मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि कुवैत सरकार ने देर रात को कुवैत में ब्लैक आउट किया था। सभी लोगों से खुले जगह में एकत्रित नहीं होने और सावधानी बरतने को कहा गया है। कुवैत सिटी में मॉल खुले हुए हैं, जहां से लोग जरूरी सामान की खरीदारी कर रहे हैं।
दुबई-रियाद में इंटरनेट ठप होने से बातचीत मुश्किल
पश्चिम एशिया में ताबड़तोड़ हमलों के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं। दुबई में रह रहे अररिया के फारबिसगंज के रामपुर निवासी मोहम्मद तालिब ने व्हाट्सएप के जरिए को बताया कि हमले के बाद कंपनियों ने छुट्टी दे दी है और सभी प्रवासियों को कमरों में बंद रहने का निर्देश दिया गया है। धमाकों की आवाज लगातार सुनाई दे रही है। पास के एक सेवन स्टार होटल में भी बमबारी हुई है। हम लोग फारबिसगंज, अररिया, सुपौल और छातापुर के 22-23 साथी एक हॉल में साथ रह रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट की है। तालिब के अनुसार रोजा खोलने के समय दो घंटे के लिए ही इंटरनेट मिलता है, क्योंकि दुबई भारत से दो घंटे पीछे है।
इंटरनेट कटते ही घरवालों से संपर्क टूट जाता है। फिलहाल बीच बीच में इंटरनेट सेवा मिलती है मगर कब बंद हो जाय पता नहीं। वहीं कूढ़ेली निवासी अंजार, जो रियाद में कार्यरत हैं, ने बताया कि कामकाज पूरी तरह ठप है और कई जगह कर्फ्यू लगा है। हमें घर में रहने को कहा गया है। इंटरनेट अधिकतर समय नहीं रहता। इधर रामपुर दक्षिण, रामपुर उत्तर और कूढ़ेली सहित अन्य गांवों में परिजन झुंड बनाकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल से अपनों की सलामती जान रहे हैं। खाड़ी में बिगड़ते हालात का असर यहां परिवारों की बढ़ती धड़कनों में साफ दिख रहा है।




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