Four days ago birthday now fairwell how influential is 75 year old Nitish Kumar in Delhi चार दिन पहले बर्थडे, अब विदाई की बेला; दिल्ली में 75 साल के नीतीश का कितना जलवा?, Bihar Hindi News - Hindustan
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चार दिन पहले बर्थडे, अब विदाई की बेला; दिल्ली में 75 साल के नीतीश का कितना जलवा?

4 दिन पहले जन्मदिन मनाने वाले 75 साल के नीतीश कुमार ने गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद से औपचारिक विदाई का ऐलान कर दिया। अब वे राज्यसभा सांसद बनकर केंद्र की राजनीति में लौट रहे हैं। दिल्ली में उनका कितना जलवा रहेगा, यह देखने वाली बात होगी।

Thu, 5 March 2026 09:19 PMJayesh Jetawat लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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चार दिन पहले बर्थडे, अब विदाई की बेला; दिल्ली में 75 साल के नीतीश का कितना जलवा?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दो दशक बाद नई राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं। उन्होंने अपने जन्मदिन के चार दिन बाद राज्यसभा जाने की घोषणा की। नीतीश 75 साल के हो गए हैं। राज्यसभा का नामांकन करने से पहले सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने गुरुवार को कहा कि वह अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं। संसदीय जीवन शुरू करने के समय ही उनके मन में इच्छा थी कि वह बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बने। इसी के लिए वह इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहे हैं।

राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 मार्च को होगा। बताया जा रहा है कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। फिर पटना से निकलकर दिल्ली की राजनीति में कदम रखेंगे। उनके पद छोड़ने के बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा। अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से होगा, इसकी चर्चा जोरों पर है।

अटल सरकार में रेल मंत्री रहे नीतीश

नीतीश कुमार का बिहार और केंद्र की राजनीति में अब तक जलवा रहा है। बीते दो दशक से बिहार में किसी भी गठबंधन की सरकार को सत्ता के केंद्र में नीतीश ही रहे। 2005 में बिहार का मुख्यमंत्री बनने से पहले वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल और कृषि मंत्री रहे।

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रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने कई रेल परियोजनाओं और सुरक्षा सुधारों पर काम किया। 1999 में पश्चिम बंगाल के गैसल ट्रेन हादसा के बाद उन्होंने नैतिकता के तौर पर पद से इस्तीफा दे दिया था। इस दुर्घटना में 285 लोगों की मौत हुई थी।

सुशासन बाबू की छवि

नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने न केवल केंद्र सरकार में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक लंबे समय तक अपना वर्चस्व कायम रखा है। समाजवादी विचारधारा से प्रभावित नीतीश को बिहार में उनके विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए 'सुशासन बाबू' के नाम से भी जाना जाता है।

महिलाओं में खासे लोकप्रिय

बिहार में नीतीश कुमार का कद काफी ऊंचा है। उनके नाम सर्वाधिक 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड है। अपने दो दशक के कार्यकाल के दौरान नीतीश ने महिलाओं और पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग के बीच खासी पहचान बनाई। जीविका दीदी, महिला रोजगार योजना, महिला आरक्षण जैसी योजनाओं और फैसलों से वे बिहार की महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

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बिहार में शराबबंदी जैसे अहम निर्णय लेकर उन्होंने नवाचार किए। अलग-अलग कार्यकाल में वे सात निश्चय लेकर आए और बिहार के विकास के संकल्प लिए। उन्हें पूरा करने के लिए विभिन्न परियोजनाएं शुरू कीं।

नीतीश कुमार हमेशा जमीनी नेता रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए वे जनता के बीच जाकर अपनी योजनाओं का फीडबैक लेते रहे हैं। पिछले साल एनडीए की नई सरकार के गठन के बाद वे समृद्धि यात्रा पर निकल गए। इस दौरान उन्होंने प्रगति यात्रा के दौरान शुरू किए गए विकास कार्यों का जायजा लिया।

अब आगे क्या?

नीतीश अब पटना की सियासत छोड़ दिल्ली का रुख कर रहे हैं। उन्हें केंद्र की राजनीति का भी लंबा अनुभव रहा है। 1989 से 2004 तक वे 6 बार लोकसभा के सांसद रहे और तीन बार केंद्र में मंत्री बने। अब वे राज्यसभा सांसद के रूप में नई पारी शुरू कर रहे हैं।

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नीतीश के राज्यसभा नामांकन के दौरान पटना पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल स्वर्णिम और बेदाग छवि वाला रहा है। उन्होंने कहा कि नीतीश अब केंद्रीय राजनीति में लौट रहे हैं।

केंद्र और बिहार में मौजूदा एनडीए सरकार में नीतीश की पार्टी जेडीयू की भूमिका महत्वपूर्ण है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए जेडीयू और टीडीपी दो अहम पिलर हैं। वहीं, बिहार में भी तोड़-फोड़ किए बिना जेडीयू के बगैर एनडीए की सरकार नहीं बन सकती। नीतीश भले ही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे हैं, लेकिन दिल्ली की राजनीति में भी उनका जलवा कायम रहेगा।

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