बिहार के 9 जिलों में बाढ़ का खतरा; फरक्का बराज के सभी 108 गेट खोले गए, उफान पर गंगा
गंगा के तटबंध की निगरानी के लिए प्रत्येक एक किलोमीटर पर एक-एक सुरक्षाकर्मी (600 तटबंध सुरक्षाकर्मी) को तैनात किया गया है। 45 से अधिक कनीय अभियंताओं को भी सतत निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। विभाग के वरीय अभियंता के नेतृत्व में तटबंध की रात्रि पेट्रोलिंग भी शुरू कर दी गयी है।

बिहार में बक्सर से कहलगांव तक गंगा नदी में उफान के बाद एहतियात के तौर पर फरक्का बराज के सभी 108 गेट खोल दिये गये हैं। पटना और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा सोमवार की रात फरक्का में भी लाल निशान को पार कर गई। मंगलवार की सुबह पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर जबकि फरक्का में चार सेंटीमीटर ऊपर था। जलस्तर बढ़ने से तटबंधों पर दबाव बना है। जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की निगरानी के लिए 600 तटबंध सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।
पड़ोसी राज्यों में भारी बारिश के बाद गंगा नदी का जलस्तर बक्सर से फरक्का तक लगातार बढ़ रहा है। बक्सर में तो नदी का जलस्तर बीते साल की तुलना में छह मीटर से अधिक ऊपर है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में इस अवधि में गंगा नदी में बीते 15 वर्षों में इतना पानी कभी नहीं आया। इससे तटबंधों पर भारी दबाव है। जुलाई के पहले सप्ताह में गंगा नदी में पिछले साल के मुकाबले पांच मीटर अधिक पानी था। सिर्फ पटना में ही गंगा बीते साल से दो मीटर ऊपर बह रही थी। पटना में जुलाई के पहले सप्ताह में गंगा का जलस्तर 37 से 46 मीटर था। पिछले साल नदी का जलस्तर 35 से 44 मीटर था।
उधर, सरकार ने गंगा के तटबंध की निगरानी के लिए प्रत्येक एक किलोमीटर पर एक-एक सुरक्षाकर्मी (600 तटबंध सुरक्षाकर्मी) को तैनात किया गया है। 45 से अधिक कनीय अभियंताओं को भी सतत निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। विभाग के वरीय अभियंता के नेतृत्व में तटबंध की रात्रि पेट्रोलिंग भी शुरू कर दी गयी है। फरक्का बराज के गेट खोलने के बाद गंगा का पानी तेजी से निकलने लगा है। हालांकि, गंगा नदी में अप्रत्याशित जलस्राव के कारण बक्सर, पटना, मुंगेर, भागलपुर के दियारा इलाकों में पानी का फैलाव हो रहा है। कई इलाके जलमग्न हैं।
9 जिलों पर खतरा मंडराया
नेपाल में भारी बारिश के बाद कोसी और गंडक पूरे उफान पर है। इन दोनों नदियों की वजह से गंगा का जलस्तर बढ़ा है और तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। जिस तरह पानी का दबाव है, उसमें यदि तटबंध टूटे तो कई जिलों में तबाही मच सकती है। इसलिए बक्सर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, मुंगेर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और भागलपुर में खतरा मंडरा रहा है।
कोसी-बूढ़ी गंडक भी खतरे के निशान के पार
नेपाल के तराई वाले इलाकों में भारी बारिश के बाद कोसी और बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर है। बूढ़ी गंडक खगड़िया में खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। कोसी सुपौल व सहरसा में मंगलवार की देर शाम लाल निशान के पार पहुंच गयी है।
भागलपुर के कई इलाकों में कटाव
गंगा की तेज धारा से कटाव की वजह से भागलपुर जिले के सबौर, कहलगांव और पीरपैंती में कृषि योग्य भूमि नदी में समा रही है। उधर, मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बरियारपुर विद्युत सबस्टेशन के निचले भाग में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।




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