बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट और खास सॉफ्टवेयर, बिहार में बॉर्डर के पास फर्जी आधार कार्ड बन रहे; सरगना धराया
बरामद सामग्री में मूल आधार कार्ड, उनकी छायाप्रतियां, जन्म प्रमाण पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, राशन कार्ड, पेंशन योजना के आवेदन पत्र, उज्ज्वला योजना से जुड़े दस्तावेज समेत लगभग 500 प्रतियां शामिल हैं। इसके अलावा ऑप्टिकल फिंगर स्कैनर जैसे उपकरण भी जब्त किए गए हैं

बिहार में किशनगंज पुलिस ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय फर्जी दस्तावेज और अवैध आधार कार्ड बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना को शनिवार की रात खगड़िया से गिरफ्तार कर लिया। इस अभियान में खगड़िया और अररिया पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी में एसटीएफ की भी भागीदारी रही। पुलिस के अनुसार, तीन दिनों पहले टेढ़ागाछ थाना क्षेत्र में दर्ज कांड के मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के बाद लगातार छापेमारी की जा रही थी। इसी क्रम में शनिवार की रात इस गिरोह के मास्टरमाइंड कुंदन कुमार (26 वर्ष) को खगड़िया जिले से गिरफ्तार किया गया।
आरोपी मोबाइल दुकान की आड़ में फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर अवैध तरीके से आधार कार्ड बनाने का नेटवर्क चला रहा था। जांच में सामने आया है कि आरोपी विभिन्न दुकानों पर जाकर आधार कार्ड बनाने की सुविधा देता था और इसके लिए क्लोन बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट तथा विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था। पुलिस ने उसकी दुकान से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन और सैकड़ों की संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं।
जांच में क्या-क्या सामान मिला
बरामद सामग्री में मूल आधार कार्ड, उनकी छायाप्रतियां, जन्म प्रमाण पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, राशन कार्ड, पेंशन योजना के आवेदन पत्र, उज्ज्वला योजना से जुड़े दस्तावेज समेत लगभग 500 प्रतियां शामिल हैं। इसके अलावा ऑप्टिकल फिंगर स्कैनर जैसे उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल बायोमेट्रिक डेटा की नकल करने में किया जाता था।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सीमावर्ती इलाकों में एक संगठित गिरोह फर्जी दस्तावेज बनाकर अवैध आधार कार्ड तैयार कर रहा है। इसके बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें साइबर थाना और जिला आसूचना इकाई के अधिकारी शामिल थे। टीम ने लगातार सूचना संकलन कर इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
कई राज्यों में फैला है नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और इसमें कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 और आईटी एक्ट 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामला दर्ज है, जिससे उसके आपराधिक इतिहास की पुष्टि होती है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के जरिए बड़ी संख्या में फर्जी पहचान पत्र तैयार किए गए होंगे, जिससे सरकारी योजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।
फिलहाल पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा और इसमें शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। इस कार्रवाई को सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे फर्जी दस्तावेज रैकेट के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।




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