बिहार चुनाव: महागठबंधन के गढ़ में सेंधमारी की कोशिश में NDA, डेहरी विधानसभा सीट पर कड़ी टक्कर
डेहरी विधानसभा से मोहम्मद इलियास हुसैन पांच बार जीत हासिल की है। खास बात यह है कि उन्होंने 1990, 1995, और 2000 में लगातार तीन बार (हैट्रिक) जीत दर्ज की। डेहरी विधानसभा सीट की एक और दिलचस्प बात यह है कि पिछले 18 चुनावों में केवल 10 नेताओं ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है।
कभी बिहार का सर्वाधिक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र रहा डेहरी आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है। डेहरी विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1951 में हुई थी। जो 2008 में परिसीमन के बाद बनाए गए काराकाट लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। डेहरी विधानसभा की राजनीतिक यात्रा अन्य क्षेत्रों से कुछ भिन्न रही है। 1950 के दशक में बिहार में कांग्रेस का बोलबाला था। वहीं डेहरी की जनता ने आरंभिक दो चुनावों में समाजवादी उम्मीदवारों को चुना। बसावन सिंह ने 1952 में सोशलिस्ट पार्टी से और 1957 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जीत दर्ज की। इसके बाद कांग्रेस ने चार चुनाव लगातार जीते।
बसावन सिंह ने 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर फिर से यह सीट जीती। कांग्रेस ने 1985 में आखिरी बार यह सीट जीती थी। उसके बाद जनता पार्टी, राजद और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो बार जीत हासिल किया। डेहरी विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक कहानी बिहार की किसी भी अन्य विधानसभा क्षेत्र से अलग है। यहां अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को भी को कई बार सफलता मिली है। 1951 से लेकर 2020 तक हुए कुल 18 विधानसभा चुनावों में से 11 बार मुस्लिम उम्मीदवारों ने यहां जीत का परचम लहराया है।
डेहरी विधानसभा से मोहम्मद इलियास हुसैन पांच बार जीत हासिल की है। खास बात यह है कि उन्होंने 1990, 1995, और 2000 में लगातार तीन बार (हैट्रिक) जीत दर्ज की। डेहरी विधानसभा सीट की एक और दिलचस्प बात यह है कि पिछले 18 चुनावों में केवल 10 नेताओं ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है। 1960 से 1970 के दशक में कांग्रेस का डेहरी पर मजबूत पकड़ था। 1962 से 1985 तक कांग्रेस ने पांच बार जीत दर्ज की लेकिन 1985 के बाद कांग्रेस फिर कभी यहां से नहीं जीत पाई।
यहां समाजवादी धारा के दलों का दबदबा रहा हे। मोहम्मद इलियास हुसैन की अयोग्यता के बाद हुए उपचुनाव में सत्यनारायण यादव ने भाजपा के टिकट पर पहली बार डेहरी में भाजपा का खाता खोला। हालांकि 2020 में हुए चुनाव में राजद ने वापसी कर ली। लेकिन जीत बहुत मामूली 464 वोटों की थी, इसलिए आगामी चुनाव में भाजपा वापसी की उम्मीद कर रही है, तो राजद कि कोशिश गढ़ बरकरार रखने की होगी।
विधायक फते बहादुर सिंह ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकता रही है। क्योंकि शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है। पांच साल के कार्यकाल में क्षेत्र के सभी पंचायतों में कुल 32 पुस्तकालय शुरू कराया है। अगले पांच साल में लक्ष्य होगा कि प्रत्येक गांव में पुस्तकालय हो।
पूर्व विधायक सत्यनारायण यादव ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में विगत पांच साल में जहां भी भूमि उपलब्ध था, वहां पीएचसी का भवन बनाया गया। क्षेत्र में लोगों के बीच जागरूकता लाकर राहत कोष से हर गंभीर रूप से बीमार का इलाज और ऑपरेशन संभव किया गया है। करोना काल में तत्परता के साथ कार्य कर ऑक्सीजन की कमी डेहरी अनुमंडलीय अस्पताल में नहीं होने दी गई थी। आगे भी शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधारभूत संरचना पर कार्य जारी रहेगा।
मैं डेहरी के विकास और समृद्धि के लिए सदा प्रयासरत रहा हूं। इस बार जनता मौका देती है तो बंद पड़े रोहतास उद्योग समूह में रेल कारखाना शुरू कराने की प्राथमिकता होगी। कदवन जलाशय का निर्माण पूर्ण कराया जाएगा। पाली रेलवे ब्रिज की मरम्मति कार्य खत्म होते ही शुरू करा दिया जाएगा। डेहरी के विकास के लिए बिंदुवार योजनाएं बनाई गई हैं, जिन्हें कार्यान्वित किया जाएगा।
जो वायदे पूरे नहीं हुए
● डालमियानगर में रेल कारखाना शुरू नहीं हो सका
● सोन नदी पर मैरिन ड्राइव नहीं बन सका
● अकोढ़ीगोला में नहीं खुला सरकारी डिग्री कॉलेज
● क्रशर उद्योग शुरू नहीं हुआ
● मकराइन-पाली अंडरपास का निर्माण नहीं हुआ
पिछले पांच वर्षों में क्या बदला
● ग्रामीण क्षेत्र में सौ से अधिक सड़कों और पुल-पुलिया का निर्माण
● पंचायतों के पंचायत भवन में पुस्तकालय की शुरूआत
● विद्यालयों और पीएचसी के आधारभूत संरचना में सुधार, भवन निर्माण
● इको पार्क जनता को समर्पित
● वाटर ट्रिटमेंट प्लान पर चल रहा काम
इस बार के चुनावी मुद्दे
● रोहतास उद्योग में रेल कारखाना शुरू किया जाए
● डेहरी को जिला बनाया जाये
● पाली पुल को जल्द मरम्मति कर शुरू किया जाए
● पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सोन नदी के किनारे मैरिन ड्राइव बनाना।
5- स्टेडियम का निर्माण
साल- प्रत्याशी और पार्टी
1952- बसावन सिंह - सोशलिस्ट पार्टी
1957- बसावान सिंह- प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
1962- अब्दुल कय्यूम - कांग्रेस पार्टी
1967- अब्दुल कय्यूम- कांग्रेस
1969- अहमद करीम- कांग्रेस
1972- अब्दुल कय्यूम- कांग्रेस
1977- बसावन सिंह- जनता पार्टी
1980- मो इलयास हुसैन- जनता पार्टी
1985- खालिद अनवर अंसारी- कांग्रेस
1990- मो इलयास हुसैन- जनता पार्टी
1995- मो इलयास हुसैन- जनता पार्टी
2000- मो इलयास हुसैन- राजद
2005 फरवरी- मो इलयास हुसैन- राजद
2005- अक्टूबर- प्रदीप जोशी- निर्दलीय
2010- रश्मि जोशी- निर्दलीय
2015- मो इलयास हुसैन- राजद
2019- उपचुनाव- सत्य नारायण यादव, भाजपा
2020- फते बहादुर सिंह, आरजेडी




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