बिहार चुनाव: कांग्रेस विधायक बीजेपी के टिकट पर लड़ने को बेचैन, बिक्रम विधानसभा में चुनावी मुकाबला होगा दिलचस्प
बिहार चुनाव: विधायक सिद्धार्थ सौरव ने कहा कि बिक्रम क्षेत्र के सभी गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने का कार्य हुआ है। बिक्रम में जनता द्वारा 25 वर्षों से की जा रही ट्रामा सेंटर की मांग पूरी हुई। नौ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले ट्रामा सेंटर का शिलान्यास के साथ टेंडर हुआ और अब निर्माण कार्य जारी है।
बिहार चुनाव: सोन नद के पूरबी तट पर बसे बिक्रम में खेती जितनी मुश्किल होती जा रही लोगों के लिए वहां की राजनीति को समझना भी उतनी ही टेढ़ी खीर साबित हो रही। वजह प्रत्यशियों का पाला बदलना। बिक्रम से तीन बार विधायक रह चुके अनिल कुमार आज कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, तो वर्तमान विधायक सिद्धार्थ सौरव ने भी पाला बदल लिया है। भले ही वह कांग्रेस में रहते हुए दो चुनाव जीतने में कामयाब रहे, लेकिन तीसरी पारी वह भाजपा से खेलने को बेचैन हैं।
क्षेत्र में चार बार जीती भाकपा
बिक्रम विधानसभा क्षेत्र भूमिहार बहुल है। सिर्फ कांग्रेस, भाजपा और जनता पार्टी के उम्मीदवार ही यहां से चुनाव नहीं जीते, बल्कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रामनाथ यादव ने लगातार चार बार यहां का प्रतिनिधत्व किया। भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले कैलाशपति मिश्र और स्थानीय नेता खदेरन सिंह भी बिक्रम से विधानसभा तक पहुंचे। जनता पार्टी की सरकार में कैलाशपति मिश्र वित्तमंत्री भी बने थे। सन 1952, 57 और 62 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मनोरमा देवी ने बिक्रम सीट पर जीत दर्ज की। सन् 1967 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में महावीर गोप इस सीट से विधायक बने।
इस सीट पर कांग्रेस पार्टी को पहला झटका सन् 1969 के मध्यावधि चुनाव में लगा। तब भारतीय क्रांति दल के प्रत्याशी खदेरन सिंह जीते थे। दोबारा 1972 में भी उन्हें जीत मिली। सन् 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार कैलाशपति मिश्र इस सीट से विजयी हुए। 1980 में जनता पार्टी की सरकार गिर गई और प्रदेश में मध्यावधि चुनाव हुआ। इस चुनाव में पहली बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार रामनाथ यादव की जीत हुई। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी दिवाकर शर्मा को पराजित किया। 1980 से लेकर 1995 तक इस सीट पर वह जीतते रहे।
पहली बार 2000 में भाजपा ने जमाया कब्जा
बिक्रम में पहली बार भाजपा प्रत्याशी रामजनम शर्मा ने सन् 2000 में विजय पताका फहरायी। वर्ष 2010 के चुनाव में अनिल कुमार भाजपा के ही टिकट पर विजयी हुए। सन् 2020 में वह दोबारा चुनाव जीते। तब अनिल कुमार निर्दलीय मैदान में थे। विधायक सिद्धार्थ सौरव ने कहा कि बिक्रम क्षेत्र के सभी गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने का कार्य हुआ है। बिक्रम में जनता द्वारा 25 वर्षों से की जा रही ट्रामा सेंटर की मांग पूरी हुई। नौ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले ट्रामा सेंटर का शिलान्यास के साथ टेंडर हुआ और अब निर्माण कार्य जारी है। नौबतपुर में लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए फ्लाईओवर का शिलान्यास हुआ। बिक्रम के दतियाना में सीएचसी का निर्माण हुआ।
पांच साल में दिखा बदलाव
1. बिक्रम में नौ करोड़ की लागत से हो रहा ट्रामा सेंटर का निर्माण।
2 गांव - गांव में बिछा सड़कों का जाल।
3 बिक्रम प्रखंड के दतियाना गांव में हुआ सीएचसी का निर्माण।
4 सरकार की लाभकारी योजनाओं की लाभ घर घर तक पहुंचने से लोगों की आर्थिक तरक्की हो रही है। बाजारों में दिख रहा चहल पहल।
वहीं पूर्व विधायक अनिल कुमार ने कहा कि बिक्रम विधानसभा क्षेत्र के लोग आजादी के वर्षों बाद भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बिक्रम - नौबतपुर मे एक भी ऐसा अस्पताल नहीं है, जिससे लोगों को गंभीर हालत में इलाज हो सके। मामूली रोगों के इलाज के लिए भी रोगियों को पटना रेफर होना पड़ता है। सिंचाई और पेयजल की समस्याएं पहले की तरह बरकरार है। वाहनों की बढ़ते दबाव के कारण एन एच 139 जर्जर हालत में है।
वायदे जो पूरे नहीं हुए
● सवा सौ साल पुराना पटना सोन नहर का आधुनिकीकरण नहीं हुआ।
● बिक्रम के ऐतिहासिक गांधी आश्रम, लोकनायक जयप्रकाश नारायण के बचपन का निवास स्थल और जिला परिषद का डाकबंगला का जीर्णोद्धार नहीं हुआ।
● सरकारी स्तर पर कोई बड़ा तकनीकी एवं व्यासायिक संस्थान की स्थापना नहीं हुई।
● पेयजल की समस्या का उचित समाधान नहीं हुआ।
इसबार चुनाव में होंगे ये मुद्दे
● बिक्रम बाजार में प्रतिदिन सड़क जाम की समस्या से लोगों मुक्ति दिलाना।
● एनएच. 139 को यथाशीघ्र चौड़ीकरण कराना।
● बिक्रम विधानसभा के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल को समस्या को दूर करना। नहर से समुचित सिंचाई सुविधा के लिए समय पर पानी उपलब्ध कराना।
● घनी आबादी वाले क्षेत्रों से बालू लदे वाहनों की परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना।
जयप्रकाश नारायण का बचपन भी बीता था यहां
ऐतिहासिक एवं भौगोलिक दृष्टिकोण से बिक्रम विधानसभा क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है। बिक्रम की महत्ता को ब्रिटिश हुकूमत ने भी समझी थी। इसी कारण जब ब्रिटिश हुकूमत में पुलिस व्यवस्था कायम हुई तब बिक्रम में थाना बना। जमीन की खरीद बिक्री शुरू हुई तो बिक्रम में रजिस्ट्री कार्यालय खुला। 1912 यहां अस्पताल बना। लोकनायक जयप्रकाश नारायण का बचपन कुछ वर्षों तक बिक्रम में बीता था।
उनके पिता हरसू दयाल जी नहर विभाग में जिलेदार के पद पर कार्यरत थे। उनका कार्यकाल 1909 से 1912 तक रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी बिक्रम में आगमन हुआ था।




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