कुटुंबा विधानसभा सीट: राजेश राम के बढ़े सियासी कद और तीसरी पारी की होगी परीक्षा
बिहार की कुटुंबा विधानसभा सीट से राजेश राम लगातार दो बार से विधायक हैं। राजेश के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह सीट खासी चर्चा में है। 2025 के विधानसभा चुनाव में उनकी नजर हैट्रिक पर है।

कल तक राजनीतिक चर्चाओं में ‘अनजान’ औरंगाबाद जिले का कुटुंबा विधानसभा सीट अब बिहार की चुनावी राजनीति में ‘खास’ बन चुकी है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में कुटुंबा का किला फतह करने वाले राजेश राम इस साल चुनाव के पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं। इस वजह से सभी की निगाहें इस सीट पर हैं। यहां के विधायक राजेश राम के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन पर पूरे प्रदेश में अपनी पार्टी के प्रदर्शन को सुधारने का कार्यभार है तो दूसरी तरफ कुटुंबा में अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखते हुए हैट्रिक बनाना है। एनडीए इस सीट को हर हाल में हासिल करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता।
अनुसूचित जाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीट कुटुंबा 2008-09 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इससे पहले यह सीट 1977 से देव विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थी। 2010 में यहां हुए पहले विधानसभा चुनाव में जदयू के ललन राम ने राजद के सुरेश पासवान को हराकर जीत हासिल की थी। तब कांग्रेस के राजेश राम को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। लेकिन, जब महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस के कोटे में आई तो राजेश राम की स्थिति मजबूत हो गई। 2015 और 2020 के चुनावों में राजेश राम की जीत हुई।
2015 में दो दिग्गजों के बेटों में हुई थी चुनावी जंग
कुटुंबा सीट पर 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान बिहार की राजनीति के दो दिग्गज नेताओं के बेटों के बीच चुनावी जंग हुई थी। एक तरफ पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दलित चेहरा रहे दिवंगत दिलकेश्वर राम के बेटे राजेश राम थे, तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन (वर्तमान में मंत्री) खड़े थे। राजेश राम ने संतोष सुमन को 10 हजार वोटों के अंतर से हराकर यह सीट जीती थी। संतोष सुमन वर्तमान में औरंगाबाद जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। 2020 के चुनाव में भी राजेश राम ने अपनी जीत का सिलसिला कायम रखा।
कुटुंबा जब देव विधानसभा का हिस्सा था, तब राजेश के पिता दिलकेश्वर राम ने 1080 और 1985 में जीत हासिल की थी। उस दौरान वे तत्कालीन कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे और उनके कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय कार्य हुए।
कुटुंबा विधानसभा सीट एक नजर में
कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र (सु.) में तीन प्रखंडों की 34 पंचायतें शामिल हैं। इनमें कुटुंबा प्रखंड की 20, नवीनगर प्रखंड की 10 और देव प्रखंड की 4 पंचायतें हैं। कृषि प्रधान इस क्षेत्र में उत्तर कोयल नहर और बटाने सिंचाई परियोजना योजना शुरू की गई। दोनों परियोजनाएं अधूरी होने के कारण सिंचाई की समस्या बनी हुई है। यह परियोजनाएं पूरी होने पर सैकड़ों हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा मिलती।
कुटुंबा के उत्तर में अरवल जिला, दक्षिण में झारखंड का पलामू, पूर्व में गयाजी जिला और पश्चिम में औरंगाबाद जिले के हिस्से एवं रोहतास जिला पड़ता है। कुटुंबा में कुल मतदाताओं की संख्या 2,87,310 है। इनमें पुरुष वोटर 151,111 और महिला 1,36,196 हैं। 18 से 19 साल के युवा मतदाताओं की संख्या 3761 है।
अंबा सप्तबहिनी मंदिर में माथा टेकते हैं लोग
कुटुंबा का इतिहास शेरशाह सूरी के शासनकाल से जुड़ा है। यह क्षेत्र लंबे समय तक मुगल साम्राज्य का हिस्सा भी रहा। यहां के जमींदारों और राजाओं ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। राष्ट्रीय राजमार्ग-139 के किनारे अंबा में सतबहिनी मंदिर है। चुनाव अभियान शुरू करने से पहले प्रत्याशी यहां माथा टेकते हैं।
घोषणाएं / वायदे, जो पूरे हुए
1. क्षेत्र में 18 बड़े पुलों और 37 छोटी पुलियों का निर्माण।
2. 300 से अधिक ग्रामीण संपर्क पथों का निर्माण।
3. प्रत्येक गांव तक बिजली पहुंचाई गई।
4. कुटुंबा, देव और नवीनगर में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर प्लस टू विद्यालयों की स्थापना।
5. दो दर्जन से अधिक अस्पताल भवनों की स्वीकृति और निर्माण।
घोषणाएं / वायदे, जिनका इंतजार
⦁ उत्तर कोयल नहर के कुटकु डैम में नहीं लगा फाटक
⦁ बटाने सिंचाई परियोजना के डैम का वेल्डिंग किया फाटक आज भी जस का तस
⦁ एनएच 139 फोरलेन सड़क नहीं बन सकी
⦁ कई गांवों को अब भी संपर्क पथ नहीं
⦁ जाम की समस्या से नहीं मिला निजात
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सह कुटुंबा विधायक राजेश राम का कहना है कि यहां के लोगों के साथ उनका गहरा लगाव रहा है। यह लगाव उनके पिता दिलकेश्वर राम के कार्यकाल से चला आ रहा है। कुटुंबा प्रखंड के पहरा और देव के पथरा में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर प्लस टू स्कूल सह छात्रावास का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में भी उन्हें जनता का सकारात्मक समर्थन और सहयोग मिलेगा।
वहीं, एनडीए (हिंदुस्तान आवाम मोर्चा) के पूर्व प्रत्याशी श्रवण भुइंया का कहना है कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से स्थानीय प्रतिनिधि की मांग करती रही है। महागठबंधन से लोगों का मोहभंग हो चुका है। एनडीए के कार्यकाल में क्षेत्र में विकास की धारा बही है, जिसे जनता ने सराहा है। क्षेत्रवासी चाहते हैं कि एनडीए का प्रतिनिधि चुना जाए, ताकि विकास की गति को और तेज किया जा सके।




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