फिर राहुल गांधी से नहीं मिल सके पप्पू यादव, कांग्रेसी झंडा लेकर कहीं और बंद कराते दिखे, क्या समस्या?
राहुल गांधी जब भी पटना आते हैं, कांग्रेस के नेता पप्पू यादव को बुलाना ही भूल जाते हैं। पप्पू 16 महीने पहले जाप पार्टी के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे। पटना में दोनों के बार-बार ना मिल पाने के तार तेजस्वी यादव से जोड़े जाते हैं।

कांग्रेस में अपनी 9 साल पुरानी जन अधिकार पार्टी (जाप) का 16 महीने पहले दिल्ली में विलय करने के बाद भी पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना में पुराने कांग्रेसी नेता पार्टी में घुसने नहीं दे रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव से ही तन समर्पित, मन समर्पित जप रहे पप्पू ने तो यहां तक कह रखा है कि अब तो उनकी शवयात्रा कांग्रेस के झंडे में निकलेगी। लेकिन पप्पू यादव की कांग्रेस के सर्वेसर्वा राहुल गांधी से पटना में मुलाकात में कोई ना कोई खलल हर बार हो रही है। बिहार बंद के लिए राहुल गांधी पटना आए लेकिन पप्पू यादव कांग्रेस का झंडा हाथ में लिए उनसे 3 किलोमीटर दूर सचिवालय हॉल्ट पर ट्रेन रोकते देखे गए।
पप्पू यादव ने कोशिश नहीं की, ऐसा नहीं है। लेकिन कांग्रेस पार्टी वालों ने उन्हें एक बार फिर राहुल के आसपास फटकने नहीं दिया। आयकर गोलंबर पर जिस खुले ट्रक पर राहुल सवार हुए थे, उस पर पप्पू यादव ने चढ़ने की कोशिश भी की लेकिन सुरक्षा वालों ने उन्हें रोक दिया। पप्पू यादव को रोकने बाद हमेशा राहुल के साथ दिखने वाले एक नेता ने सुरक्षा जवानों को इशारा करके प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार, शकील अहमद खान समेत तीन लोगों को ट्रक पर चढ़वाया। पप्पू के लिए कोई इशारा नहीं किया गया, जबकि वो बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे। पप्पू के अलावा कन्हैया कुमार को भी नहीं चढ़ने दिया गया। दोनों को रोकने का वीडियो अब वायरल हो गया है।
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पप्पू यादव के समर्थकों ने सचिवालय हॉल्ट पर ट्रेन रोकी। पप्पू यादव के पास जाप के जमाने से समर्थकों की जो फौज थी, आजकल वो कांग्रेस का झंडा उठाए घूम रही है लेकिन उनके लीडर को बिहार के कांग्रेसी नेता पार्टी की चहारदीवारी के बाहर लटका रखे हैं। पप्पू के समर्थकों ने पटना-आरा रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन कुछ देर बाधित किया। ट्रेन चलाने के लिए प्रयास कर रहे आरपीएफ जवानों से उनकी नोंक-झोंक भी हुई। लेकिन राहुल गांधी आए, मार्च किया, भाषण दिए और चले गए। पप्पू यादव दूर ही रह गए।
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राहुल गांधी साल की शुरुआत से ही लगातार बिहार आ रहे हैं। कभी दलितों से संवाद करने तो कभी संविधान की सुरक्षा का सवाल उठाने। लेकिन संयोग नहीं बन पा रहा है कि लोकसभा में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ साथ रहने वाले राहुल और पप्पू का मिलन हो जाए। राजनीतिक गलियारों से लेकर चाय की दुकान तक यह चर्चा आम है कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव को पप्पू से असहजता है। शायद इसलिए बिहार कांग्रेस राहुल और पप्पू को पटना में मिलने नहीं दे रही है।
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याद दिला दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पप्पू कांग्रेस में पार्टी के साथ गए थे क्योंकि 2019 के चुनाव में पूर्णिया सीट कांग्रेस लड़कर हारी थी। जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष उदय सिंह तब कांग्रेस कैंडिडेट थे जो पहले भाजपा के टिकट पर सांसद रह चुके थे। पप्पू को उम्मीद थी कि सीट कांग्रेस के खाते में आएगी और उन्हें लड़ाया जाएगा। लेकिन पप्पू के हाजिरी लगाने के बावजूद लालू यादव ने खेला कर दिया। कांग्रेस से पूर्णिया सीट ली और जेडीयू विधायक बीमा भारती को बुलाकर राजद से लड़ा दिया।
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पप्पू यादव के पास कोई रास्ता नहीं बचा तो वो फिर निर्दलीय लड़ गए। पूर्णिया से वो लोकसभा का चुनाव पहली बार निर्दलीय ही जीते थे और 1999 में दोबारा निर्दलीय सांसद बने। 2024 में पप्पू तीसरी बार निर्दलीय एमपी बने हैं। बीमा भारती के लिए तेजस्वी का कैंप करना तक काम ना आया। 27120 वोट के साथ बीमा और आरजेडी की जमानत जब्त हो गई। विश्लेषक बिहार कांग्रेस में पप्पू को लेकर असहजता की जड़ राजद में देखते हैं। जैसे लोजपा-आर में पासवान परिवार के बाहर कोई पासवान नेता नहीं बनाया जाता, उसी तरह कोई दूसरा यादव प्रभावी हो जाए, ये राजद को मंजूर नहीं है।




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