रीना पासवान की दावेदारी से चिराग का इनकार, उपेंद्र कुशवाहा के राज्यसभा का रास्ता साफ?
चिराग पासवान ने शुक्रवार को अपनी मां रीना पासवान के सक्रिय राजनीति में आने और उनकी राज्यसभा सीट के लिए दावेदारी की अटकलों को खारिज कर दिया है।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपनी मां रीना पासवान की राज्यसभा दावेदारी से इनकार कर दिया है। इसे राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के लिए राहत वाली बात कही जा सकती है। दरअसल, बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव होने वाले हैं। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से चार सीटों पर एनडीए की जीत तय मानी जा रही है। इनमें से दो नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) अपने सांसद बना सकती है। बाकी दो सीटों पर कौन राज्यसभा जाएगा यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथ में है।
सियासी गलियारे में चल रही चर्चा और कयासों के अनुसार, भाजपा अपने कोटे की एक सीट पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्यसभा भेज सकती है। वहीं, दूसरी सीट सहयोगी दलों के लिए छोड़ सकती है।
बिहार से राज्यसभा की जो पांच सीटें खाली होने जा रही हैं, उनमें से एक राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की भी है। लोकसभा चुनाव 2024 में काराकाट सीट से हार के बाद कुशवाहा, भाजपा और जेडीयू के सहयोग से राज्यसभा सांसद बने थे।
अब अगर उन्हें अपनी सांसदी को बरकरार रखना है तो एक बार फिर भाजपा का सहयोग जरूरी होगा। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सीट बंटवारे से पहले उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे थे। फिर उन्हें भाजपा के नेता मनाने के लिए दिल्ली गए थे।
शीर्ष नेतृत्व से बातचीत के बाद कुशवाहा रालोमो को विधानसभा चुनाव में 5 सीटें लेकर राजी हुए थे। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि उस समय रालोमो चीफ को भाजपा द्वारा दोबारा राज्यसभा भेजे जाने और एक एमएलसी सीट देने का वादा किया गया।
कुशवाहा उसी आधार पर फिर से राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। हालांकि, राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद एनडीए में एक और सहयोगी चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी दावेदारी कर दी। इससे कुशवाहा की सीट पर सस्पेंस बढ़ गया।
लोजपा-आर की ओर से चिराग की मां रीना पासवान के राज्यसभा सांसद बनने की अटकलें चलने लगीं। हालांकि, अब खुद चिराग पासवान ने मीडिया के सामने आकर इन अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि उनकी मां रीना पासवान सक्रिय राजनीति में नहीं आ रही हैं और राज्यसभा सीट के लिए उनकी दावेदारी नहीं है।
चिराग के इस बयान के बाद उपेंद्र कुशवाहा की राज्यसभा की राह क्लियर होती दिख रही है। हालांकि, अब गेंद पूरी तरह भाजपा के पाले में है। वह अपने कोटे से कुशवाहा को फिर से राज्यसभा भेजेगी, या फिर अपनी पार्टी के किसी नेता का नाम इसके लिए आगे बढ़ाएगी। आने वाले दिनों में इस सस्पेंस से पर्दा उठ जाएगा।
मार्च में राज्यसभा चुनाव
बिहार की पांच समेत देश भर की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव अगले महीने होगा। 5 मार्च को नामांकन का आखिरी दिन है। बिहार की पांच में से चार पर एनडीए की जीत पक्की है। पांचवीं सीट जीतने के लिए एनडीए को 3 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। अगर विपक्ष राज्यसभा चुनाव में कैंडिडेट नहीं उतारता है तो एनडीए पांचों सीटें जीत जाएगा।
वहीं, अगर तेजस्वी यादव की आरजेडी अपना एक कैंडिडेट उतारती है, तो 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। विपक्ष में आरजेडी के 25, कांग्रेस के 6, लेफ्ट के 9 और आईआईपी के एक मिलाकर कुल 35 विधायक हैं।
इस स्थिति में महागठबंधन को एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए 6 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। आरजेडी की नजर 5 विधायकों वाली असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और एक विधायक वाली बसपा पर है। हालांकि, ओवैसी की पार्टी ने अपना कैंडिडेट उतारने का ऐलान कर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के सामने ही कंफ्यूजन पैदा कर दी है।
वहीं, एनडीए को भी पांचवीं सीट जीतने के लिए 3 और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। अगर बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ तो पांचवीं सीट का मुकाबला काफी रोचक होगा। AIMIM की नजरें सभी पर टिकी हैं। मतदान हुआ तो विधायकों की क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है।




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