नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा या रीना पासवान, बिहार से किस-किस को राज्यसभा भेजेगी भाजपा?
Bihar Rajya Sabha Elections: बिहार में 5 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा या बीजेपी-जेडीयू के समर्थन से एनडीए 5 की 5 सीट जीत लेगी, यह तेजस्वी यादव की राजद के लड़ने या मैदान छोड़ने से तय होगा। सबकी नजर बीजेपी की लिस्ट और समर्थन पर है।

अप्रैल में खाली हो रही बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के चुनाव के ऐलान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इन 5 सीटों में सिर्फ 2 पर अगले सांसद का फैसला ही पटना में हो सकता है, क्योंकि नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) अपने 85 विधायकों के साथ 2 सीट जीत सकती है। बाकी 3 सीट का फैसला दिल्ली से होगा, जिसके लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का नेतृत्व खुद या सहयोगी दलों के नेताओं का नाम तय करेगा। वोटिंग की नौबत तभी आएगी, जब तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन या किसी और तरह से छठा कैंडिडेट मैदान में आता है। राजद और सहयोगी दलों के विधायकों को टूटने से बचाने के लिए तेजस्वी मैदान छोड़ देते हैं, तो मतदान की नौबत ही नहीं आएगी और एनडीए के 5 नेता सांसद बनकर दिल्ली चले जाएंगे।
राज्यसभा चुनाव के निर्धारित नियमों के मुताबिक बिहार में 5 सीटों के चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 41 वोट चाहिए। एनडीए में बीजेपी के 89, जेडीयू के 85 विधायकों के साथ चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) के 19, जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के 5 और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के 4 विधायक हैं। 202 विधायकों वाले एनडीए 4 सीट आराम से और 5वीं सीट विपक्ष में थोड़ी तोड़फोड़ से निकाल सकती है। 41 वोट के हिसाब से एनडीए को 3 वोट कम पड़ रहे हैं। तेजस्वी के लिए कमी 6 वोट की है। असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के तेवर से तेजस्वी के लिए आगे मुश्किल ही दिख रही है। तेजस्वी अगर ओवैसी और मायावती की पार्टियों से 6 वोट का जुगाड़ कर भी लेते हैं तो गारंटी नहीं है कि राजद, कांग्रेस समेत विपक्ष के विधायक क्रॉस वोटिंग ना करें। क्रॉस वोटिंग मतलब एक पार्टी का विधायक पार्टी लाइन को तोड़कर दूसरी पार्टी के कैंडिडेट को वोट कर दे।
बिहार विधानसभा के अंकगणित और राज्य के राजनीतिक माहौल के हिसाब से 3 सीट का फैसला भाजपा के हाथों होना है। 2 सीट बीजेपी आराम से निकाल सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन कैंडिडेट हो सकते हैं। अगर बीजेपी नितिन को राज्यसभा लाने का मूड बनाती है तो नितिन के लिए पार्टी गिनकर 41 वोट ही नहीं रखेगी। कोई वोट रद्द हो जाए या कुछ और हो तो, इसके लिए एहतियातन पार्टियां बड़े नेता के लिए जरूरत से ज्यादा वोट करवाती हैं। ऐसे में नितिन के लिए 45 या उससे ज्यादा विधायकों का वोट रखना होगा। पार्टियां अपने-अपने विधायकों को बता देती हैं कि वो अपने ही एक से अधिक कैंडिडेट में भी किसे वोट करेंगे।
नितिन नवीन के अलावा तय जीत वाली दूसरी सीट पर भाजपा अपने ही किसी नेता को लड़ाएगी या विधानसभा चुनाव से चल रही चर्चा के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा या चिराग पासवान की माता रीना पासवान को उतारेगी, इसमें सस्पेंस बना हुआ है। कुशवाहा और पासवान की नजर इस दूसरी सीट पर है, जिसे लड़ना और जीतना तय है। अगर तेजस्वी कैंडिडेट नहीं देते हैं और कोई छठा प्रत्याशी नहीं आता है तो एनडीए 5 सीटों पर क्लीन स्वीप कर जाएगा। लेकिन छठा आया तो मतदान होगा।
ऐसे में बीजेपी की कोशिश हो सकती है कि कुशवाहा को मंत्री बेटे दीपक प्रकाश की विधान परिषद या अपनी राज्यसभा में कोई एक सीट चुनने कहा जाए। कुशवाहा की पार्टी में काफी विवाद चल रहा है और वो अपने ही दल में काफी दबाव में चल रहे हैं। सम्राट चौधरी के मजबूत होने से कोइरी वोटर पर बीजेपी की सीधी पकड़ बन रही है और अब कुशवाहा बीजेपी की मजबूरी नहीं रह गए। लेकिन, बीजेपी सहयोगियों के साथ उदार भी रहती है, तो संभव है कि कुशवाहा वापस राज्यसभा भेजे जाएं, क्योंकि सदन के बाहर कुशवाहा बोल-बोलकर तनाव दे सकते हैं। विधानसभा चुनाव में नाराजगी के बाद कुशवाहा बीजेपी के नेता चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली ले गए थे और जब वो लौटे तो झोली भरकर। उनकी पार्टी को 5 सीट मिली, उनके 2 नेता एनडीए के दूसरे दलों के सिंबल पर लड़े।
चिराग पासवान के लिए राज्यसभा में एक सीट की दावेदारी उपेंद्र कुशवाहा के मुकाबले मजबूत है। चिराग के पास खुद के 19 विधायक हैं। अगर विपक्ष से कोई कैंडिडेट आता है और चुनाव की नौबत आती है तो चिराग पासवान को पांचवीं सीट लड़कर जीतने कहा जा सकता है। इस स्थिति में बीजेपी ऑपरेशन लोटस से क्रॉस वोटिंग करा सकती है। मतदान हुए तो विधायकों के सबसे ज्यादा वोट पाने वाले 5 कैंडिडेट जीतेंगे। बीजेपी के चुनाव प्रबंधन में 5वीं सीट के लिए कुछ वोट का इंतजाम अनोखी बात नहीं है। बीजेपी नेतृत्व के सामने असली मसला यह रहेगा कि चौथी और पांचवीं सीट पर भाजपा के नेताओं को राज्यसभा ले जाएं या फिर कुशवाहा और पासवान को तोहफे में दें।




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