ओवैसी का तेजस्वी को झटका, राज्यसभा चुनाव में कैंडिडेट उतारेगी AIMIM, 5वीं सीट की जंग रोचक
असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट पर अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है। 5 विधायकों वाली ओवैसी की पार्टी ने तेजस्वी यादव के महागठबंधन को कंफ्यूजन में डाल दिया है।

बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पांचवीं सीट पर अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पांचवीं सीट पर महागठबंधन को जिताने के लिए ओवैसी की तरफ निगाहें गढ़ाए बैठे तेजस्वी को इससे झटका लगा है। विधानसभा में संख्या बल के अनुसार राज्यसभा की 5 में से 4 सीटों पर सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की जीत तय है। पांचवीं सीट पर दोनों ही गठबंधन अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे हैं।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने शुक्रवार को राज्यसभा चुनाव 2026 में अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया। उन्होंने दोनों ही प्रमुख गठबंधनों से अपने 'सेकुलर' कैंडिडेट के लिए समर्थन मांगा। इससे महागठबंधन असमंजस की स्थिति में आ गया है।
एनडीए के 3 और RJD के 2 सांसदों का खत्म हो रहा कार्यकाल
बिहार से राज्यसभा की कुल 16 सीटें हैं। इनमें से पांच सीटों के सदस्यों का कार्यकाल इस साल खत्म हो रहा है। इनमें जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह एवं रामनाथ ठाकुर, आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता एवं अमरेंद्र धारी सिंह और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।
4 सीटों पर एनडीए की जीत पक्की
पिछले साल बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड जीत मिली थी। अभी 243 में से 202 विधायक एनडीए के पास हैं। इस संख्या बल के आधार पर सत्तारूढ़ गठबंधन राज्यसभा की 5 में से 4 सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में है। हालांकि, पांचवीं सीट के लिए एनडीए को 3 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी, जिससे एक सीट पर मतदान की स्थिति बन सकती है।
ओवैसी की पार्टी ने सेकुलर पार्टियों से मांगा समर्थन
AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने कहा कि उनकी पार्टी धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की पक्षधर है और संसद से लेकर विधानसभा तक इन मुद्दों को उठाती रही है। इसलिए सेकुलर दलों को AIMIM का समर्थन करना चाहिए। महागठबंधन द्वारा समर्थन नहीं मिलने की स्थिति पर उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में पार्टी आलाकमान आगे की रणनीति पर विचार करेगा।
बिहार में राज्यसभा चुनाव के गणित के तहत एक विधायक के वोट का मूल्य 100 होता है। इस तरह एक सीट जीतने के लिए 40.5 विधायकों के मतों की आवश्यकता होती है, जिसे पूर्णांक में 41 माना जाता है। इस हिसाब से पांचों सीटें जीतने के लिए एनडीए को कम से कम 205 विधायकों का समर्थन चाहिए। मौजूदा संख्या बल के आधार पर वह 4 सीटें आसानी से जीत सकता है।
बिहार विधानसभा में अभी विपक्षी दलों के महागठबंधन के कुल 35 विधायक ही हैं। अगर महागठबंधन राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर एनडीए के खिलाफ अपना प्रत्याशी खड़ा करता है तो आरजेडी-कांग्रेस और लेफ्ट को 5 विधायकों वाली एआईएमआईएम और बसपा के एक विधायक का समर्थन भी हासिल करना होगा।
हालांकि, ओवैसी की पार्टी ने अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर सियासी हलचल पैदा कर दी है। अगर AIMIM या महागठबंधन पाचंवीं सीट पर कैंडिडेट उतारता है और एनडीए भी उसके खिलाफ प्रत्याशी देता है तो मतदान की स्थिति आएगी। ऐसे में जीत के लिए क्रॉस वोटिंग की स्थिति भी बन सकती है।




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