after making shooter cell in bihar miscreants killed two people in patna danapur paras hospital Patna Crime: शूटर सेल बनने के अगले ही दिन पटना में सुबह-सुबह दो मर्डर, पारस अस्पताल और दानापुर में खून-खराबा, Bihar Hindi News - Hindustan
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Patna Crime: शूटर सेल बनने के अगले ही दिन पटना में सुबह-सुबह दो मर्डर, पारस अस्पताल और दानापुर में खून-खराबा

Patna Crime: अभी दानापुर पुलिस इस हत्याकांड की शुरुआती जांच-पड़ताल में ही जुटी थी कि दानापुर से कुछ ही दूर पटना के शास्त्रीनगर में स्थित पारस अस्पताल में मर्डर हो गया। बड़ी हैरानी की बात है कि अपराधियों ने पारस अस्पताल के आईसीयू में घुसकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया है।

Thu, 17 July 2025 10:09 AMNishant Nandan लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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Patna Crime: शूटर सेल बनने के अगले ही दिन पटना में सुबह-सुबह दो मर्डर, पारस अस्पताल और दानापुर में खून-खराबा

Patna Crime: बिहार पुलिस की तरफ से बुधवार को ही शूटर सेल बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अगले ही दिन यानी गुरुवार को राजधानी पटना में सुबह-सुबह हत्या की दो वारदातों को अंजाम देकर अपराधियों ने लॉ एंड ऑर्डर को खुलेआम चुनौती दे दी। सबसे पहले पटना से सटे दानापुर में एक हत्याकांड की खबर आई। यहां 20 साल के बंटी नाम के एक युवक को धारदार हथियार से काट डाला गया।

जानकारी के मुताबिगक, दानापुर शाहपुर थाना क्षेत्र के हथियाकांध में अपराधियों ने घर के पास ही धारदार हथियार से एक युवक की सुबह-सुबह ही हत्या कर दी। मृतक की पहचान स्थानीय निवासी राकेश सिंह के पुत्र शिवम उर्फ बंटी (20) के रूप मे की गई है। इस हत्याकांड से आसपास के इलाकों में सनसनी फैल गई। आननफानन में पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची। पुलिस इस घटना की छानबीन में जुटी है।

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पारस अस्पताल में मर्डर

अभी दानापुर पुलिस इस हत्याकांड की शुरुआती जांच-पड़ताल में ही जुटी थी कि दानापुर से कुछ ही दूर पटना के शास्त्रीनगर में स्थित पारस अस्पताल में मर्डर हो गया। बड़ी हैरानी की बात है कि अपराधियों ने पारस अस्पताल के आईसीयू में घुसकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया है। पारस अस्पताल पटना का एक बड़ा अस्पताल है। इस अस्पताल में निजी सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहते हैं। यह अस्पताल काफी भीड़भाड़ वाले इलाके में मौजूद है। इस अस्पताल से कुछ ही दूरी पर पटना के कई वीआईपी इलाके भी हैं।

पटना के प्रतिष्ठित पारस अस्पताल में बेउर जेल के एक कैदी चंदन मिश्रा की हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि अस्पताल के आईसीयू में दिनदहाड़े चार अपराधी घुसे थे और उन्होंने यहां इलाजरत चंदन मिश्रा को गोली मार दी। हैरानी इस बात को लेकर है कि एक बड़े अस्पताल में भर्ती मरीज को गोली मारकर चारों ही अपराधी बड़े आराम से वहां से फरार हो गए और पुलिस या अस्पताल प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लग सकी।

chandan mishra (File photo)

चंदन मिश्रा के बारे में मिली जानकारी के मुताबिक, वो बक्सर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के सोनबरसा गांव के रहने वाला है। जेल में बंद चंदन पैरोल पर बाहर निकला था। इलाज कराने पारस अस्पताल पटना गया था जहां उसे गोली मारी गई है। बता दें कि एक समय अपराध की दुनिया में शेरू और चंदन का नाम था। दोनों ने मिलकर कई वारदातों को अंजाम दिया था।

पारस अस्पताल में मर्डर से पटना पुलिस की कार्यशैली कटघरे में आ गई है। सवाल उठ रहे हैं आखिर इतनी भीड़भाड़ वाले इलाके में एक सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देकर अपराधी किधर भाग गए? पुलिस को इसका पता क्यों नहीं चल सका? आईसीयू के बाहर भी अस्पताल कर्मी तैनात रहते हैं और आम लोगों को इस अस्पताल के इस बेहद ही संवेदनशील स्थान पर आने की अनुमति नहीं रहती है तो फिर आखिर अपराधी आईसीयू में घुसे कैसे?

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राजधानी पटना में अपराधियों ने सरेआम यह तांडव तब मचाया है जब एक दिन पहले ही पुलिस ने शूटर सेल बनाने का ऐलान किया था। दरअसल सुपारी लेकर हत्या करने वाले सुपारी किलरों की निगरानी के लिए बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक अलग सेल गठित किया है। एसटीएफ के अधीन काम करने वाला यह कॉन्ट्रैक्ट किलर सेल नये-पुराने सभी शॉर्प शूटरों से संबंधित डेटाबेस इकट्ठा करेगा। उनकी गतिविधि पर नजर बनाये रखेगा। इससे संबंधित तैयार डोजियर सभी जिलों को मुहैया कराया जाएगा।

बिहार पुलिस के एडीजी (मुख्यालय सह एसटीएफ) कुंदन कृष्णन ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी थी। व्यवसायी गोपाल खेमका, अधिवक्ता जितेंद्र मेहता और दानापुर के स्कूल संचालक हत्याकांड में सुपारी किलरों की भूमिका पर एडीजी ने कहा कि हत्याओं में जिन सुपारी किलर की भूमिका पाई गई है, उनकी तस्वीर, नाम, पता और हुलिया की जानकारी भी इस सेल को दी जा रही है। इसके अलावा जेल में बंद सुपारी किलरों पर भी नजर रखी जा रही है। जेल से छूटने वाले ऐसे अपराधियों की निगरानी भी थाना स्तर पर करने का निर्देश दिया गया है।

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मई, जून और जुलाई में हत्या की घटनाएं अधिक

बिहार में अपराधिक घटनाएं बढ़ने के सवाल पर कुंदन कृष्णन ने कहा था कि ऐसा नहीं है। मई, जून और जुलाई में हमेशा से हत्या की घटनाएं अधिक होने का ट्रेंड रहा है। इसके पीछे ग्रामीण क्षेत्रों का सामाजिक ताना-बाना है। बताया कि सालभर में औसत 300 हत्याएं होती हैं। 80 लाख की आबादी वाले पटना जिले में इस माह दस हत्याएं हुई। अपराध की दुनिया में कम उम्र के युवा और नाबालिगों की बढ़ती संख्या समाज को भी कठघरे में खड़ा करती है।

अभिभावकों को भी अपने किशोर और युवा बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है। जिस तरह नाबालिगों के गाड़ी चलाते पकड़े जाने पर अभिभावक या वाहन मालिक को दोषी माना जाता है, उसी तरह अगर नाबालिग आर्म्स एक्ट में पकड़ा जायेगा। और आर्म्स की जानकारी अभिभावक को होगी तो जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जायेगी।

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