जून में गोचर करेंगे गुरु कर्क राशि में, मेष से केकर मीन राशि पर पड़ेगा प्रभाव
Guru Gochar Kark Rashi Jupiter Transit in Cancer Horoscope 2026 : रु के कर्क के राशि में आने पर हंस राजयोग बनता है, जो पंच महापुरुष राजयोग में से एक है। यह 12 र्ग्ष के बाद बनने वाला शक्तिशली राजयोग है। इस बार गुरु अतिचारी तेज गति में रहेंगे। इ

Guru Gochar Kark Rashi Jupiter Transit : ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति देवगुरु को नवग्रहों में सबसे शुभ माना गया है। धर्म, ज्ञान, विवाह, संतान भाग्य और समृध्दि के कारक बृहस्पति ग्रह अपनी दृष्टी कुंडली के जिस भाव में भी रखते हैं। उसके प्रभाव बढ़ा देते हैं। 12 साल के बाद एक ऐसा संयोग बन रहा है। जिसमें देव गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु का कर्क राशि में गोचर दो जून को रात में दो बजकर पच्चीस मिनट पर होगा, जो 31 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेंगे। इसके बाद सूर्य की सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। यह संयोग कई राशियों पर संकारत्मक प्रभाव डालेगा। गुरु के कर्क के राशि में आने पर हंस राजयोग बनता है, जो पंच महापुरुष राजयोग में से एक है। यह 12 र्ग्ष के बाद बनने वाला शक्तिशली राजयोग है। इस बार गुरु अतिचारी तेज गति में रहेंगे। इसका मतलब है कि बदलाव बहुत तेजी से और तीव्रता के साथ होंगे। गुरु के कर्क राशि में गोचर का समय विवाह, संतान, उच्च शिक्षा, व्यापार, संपति, धार्मिक यात्रा, निवेश के लिए महत्वपूर्ण है।
जून में गोचर करेंगे गुरु कर्क राशि में, मेष से केकर मीन राशि पर पड़ेगा प्रभाव
मेष: गुरु चतुर्थ भाव में उत्तम, गृह सुख माता का स्वास्थ्य व संपति में वृध्दि मकान खरीदने के लिए अच्छा समय मानसिक शांति मिलेगी।
वृषभ: गुरु तृतीय भाव में पराक्रम, यात्रा मीडिया और लेखन क्षेत्र में अवसर। भाई बहन से मतभेद संभव उधम में सतकर्ता रखें।
मिथुन: गुरु द्वितीय भाव में धन वृध्दि परिवार में खुशी वाणी से लाभ वर्ष उतरार्ध में आर्थिक सुधार निशिचत।
कर्क: गुरु स्वयं लग्न में कई जन्मों का पुण्य फल मिलेगा, विवाह, व्यापार संतान स्वास्थ्य में अभूतपूर्व उन्नति यह आपके जीवन का स्वर्णिम काल हो सकता है।
सिंह: गुरु दशम भाव में खर्च बढ़ेगा पर आध्यात्मिक लाभ और विदेश से अवसर मिलेंगे। विदेश यात्रा व बसने के योग हैं। मोक्ष की दिशा में प्रवृति।
कन्या: गुरु एकदाश भाव में बडी इच्छाएं पूरी होंगी। आर्थिक लाभ विवाह के लिए अनुकूल वर्ष का उतरार्ध उत्तम।
तुला: गुरु दशम भाव में कॉरिअर में बड़ा अवसर नाम प्रतिष्ठा, पदोन्नति, व्यापार में विस्तार राजनीति में जाने वालों के लिए सर्वोत्तम।
वृश्चिक: गुरु नवम भाव में भाग्यशाली गोचर, भाग्योदय, विवाह, विदेश यात्रा, पिता से संपति यह आपके जीवन का सर्व श्रेष्ठ बन सकता है।
धनु: अष्टम भाव में गुरु अपनी राशि से पंचमेश होकर कर्क में संतान, बुध्दि और भाग्य का अभूतपूर्व विकास, विरासत या बीमा से लाभ, अध्यात्मक सिध्दि काल।
मकर: सप्तम भाव में विवाह के शुभयोग, जीवन साथी से सुख व्यापार साझेदारी में लाभ संबधों में सुधार होगा।
कुभ: गुरू षष्ठम भाव में रहेंगे प्रतिस्पर्धा पर विजय, ऋण से मुक्ति, चिकित्सा, कानून क्षेत्र में सफलता, थोडी स्वास्थ्य सतकर्ता बनाएं।
मीन: पंचम भाव में गुरु स्वयं मीन राशि के स्वामी है और पंचम भाव में यह गज केसरी जैसे अदभुत योग है। संतान प्रेम, शिक्षा, निवेश में सफलता जीवन का स्वर्णिम काल है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




साइन इन