GPS, जियो टैगिंग और CAPF... बंगाल चुनाव में EC का क्या है फुल प्रूफ सुरक्षा वाला ये प्लान
West Bengal Election: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव प्रबंधन में ज़्यादा पारदर्शिता लाने की दिशा में यह एक अहम और दूरदर्शी कदम है। स्वतंत्र और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

West Bengal Election: आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए चुनाव आयोग (EC) ने इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। आयोग इस बार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की भारी तैनाती के साथ-साथ जियो-टैगिंग, GPS ट्रैकिंग और रियल-टाइम निगरानी जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों को लागू करने जा रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य में कुल 2,400 CAPF कंपनियों की तैनाती की जा रही है। इनमें से लगभग 480 कंपनियां पहले ही 10 मार्च तक तैनात हो चुकी हैं, जो संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च कर मतदाताओं में भरोसा जगा रही हैं। बाकी 1,920 कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से 31 मार्च और 7, 10, 13 व 17 अप्रैल को तैनात किया जाएगा। इनकी आवाजाही के लिए विशेष ट्रेनों के भी इंतजाम किए गए हैं।
जियो-टैगिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
इस बार चुनाव आयोग ने एक नया कदम उठाते हुए CAPF की तैनाती की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू किया है। खास बात यह है कि इन तस्वीरों में लोकेशन की सटीक जानकारी (latitude-longitude) भी शामिल है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सुरक्षा बल वास्तव में बताए गए स्थानों पर मौजूद हैं या नहीं।
GPS और कैमरों से होगी निगरानी
सिर्फ जियो-टैगिंग ही नहीं, बल्कि आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए CAPF के वाहनों में GPS ट्रैकर लगाए हैं। इनके अलावा क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और मोबाइल यूनिट्स में विशेष कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे रियल-टाइम घटनाओं की रिकॉर्डिंग करेंगे। इन उपायों से किसी भी घटना या आरोप-प्रत्यारोप की सटीक जांच संभव हो सकेगी।
संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर
राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए एक संयुक्त समिति बनाई गई है, जो प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती का आकलन करेगी। इसका उद्देश्य है कि जहां खतरा अधिक है, वहां अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। चुनाव के दौरान अक्सर सुरक्षा बलों की मौजूदगी और उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जियो-टैगिंग और GPS आधारित निगरानी जैसे कदम विश्वास बहाली और जवाबदेही सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
पारदर्शिता लाने की दिशा में दूरदर्शी कदम
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इन उपायों का मुख्य मकसद सुरक्षा बलों के काम-काज और उनकी मौजूदगी को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों और जवाबी आरोपों का प्रभावी ढंग से जवाब देना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव प्रबंधन में ज़्यादा पारदर्शिता लाने की दिशा में यह एक अहम और दूरदर्शी कदम है। स्वतंत्र और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालाँकि, सूत्रों के अनुसार, अधिकारी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की तकनीकी पहल न केवल चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी, बल्कि भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।




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