बंगाल की एक बूथ से कटे सभी मुस्लिम वोटरों के नाम, BLO का नाम तक गायब; बवाल
चुनाव आयोग की ओर से जारी पश्चिम बंगाल के मतदाताओं की पहली पूरक सूची से 12 लाख नाम हटा दिए गए हैं। सोमवार को जारी की गई इस सूची में जांच के दायरे में आए करीब 32 लाख मतदाताओं के नामों पर फैसला कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले चुनावों से पहले बशीरहाट नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र की एक बूथ से कथित तौर पर सभी मुस्लिम वोटरों के नाम कट जाने के बाद जमकर बवाल मच गया है। विवाद तब शुरू हुआ जब एक ही बूथ से 340 वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। यह मामला हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा पूरक मतदाता सूची जारी करने के बाद सामने आया।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक हटाए गए सभी लोग बोरों गोबरा गांव के बूथ नंबर 5 से हैं और सभी मुस्लिम समुदाय से जुड़े हैं। जानकारी के मुताबिक इन लोगों के नाम पहले ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में ‘अंडर एडजुडिकेशन’ के रूप में डाले गए थे, यानी इनकी जांच होनी थी। हालांकि मंगलवार शाम 5 बजे जारी पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट में इनके नाम हटा दिए गए। मामला तब और गंभीर हो गया, जब पता चला कि उसी बूथ के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मोहम्मद शफिउल आलम का नाम भी लिस्ट से हटा दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला बशीरहाट ब्लॉक-2 के बेगमपुर बीबीपुर ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 5 से जुड़ा है, जहां कुल 992 रजिस्टर्ड वोटर हैं। इनमें से 38 नाम सामान्य कारणों जैसे मौत या जगह बदलने की वजह से हटाए गए थे। इसके अलावा 358 वोटरों को उनकी पात्रता की जांच के लिए बुलाया गया था। ड्राफ्ट लिस्ट में इनमें से 18 मामलों का निपटारा हो गया था, जबकि बाकी 340 को “अंडर एडजुडिकेशन” में रखा गया था। लेकिन 23 तारीख को जारी सप्लीमेंट्री लिस्ट में इन सभी 340 नामों को डिलीट कर दिया गया।
विरोध शुरू
बड़े पैमाने पर लिस्ट से नाम हटा दिए के बाद इलाके के लोगों ने इसका जमकर विरोध किया है। रिपोर्ट के मुताबिक 100 से ज्यादा लोगों ने BLO के घर और आसपास की सड़कों पर प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई समुदाय के आधार पर टारगेट करके की गई है। प्रभावित लोगों और लोकल अधिकारियों ने चुनाव अधिकारियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
BLO ने क्या बताया?
BLO मोहम्मद शफिउल आलम ने बताया कि उन्होंने इस मामले में बशीरहाट ब्लॉक-2 के ब्लॉक डिवेलपमेंट ऑफिसर से संपर्क किया लेकिन उन्हें जवाब मिला कि अब कुछ नहीं किया जा सकता। वहीं इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर से संपर्क नहीं हो पाया है। शफिउल आलम ने कहा कि वह इस मामले को ट्रिब्यूनल में लेकर जाएंगे और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। प्रभावित वोटरों में से एक काजीरुल मंडल ने कहा कि चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक 11 में से सिर्फ एक वैध डाक्यूमेंट देना जरूरी होता है, लेकिन कई लोगों ने 3-4 डाक्यूमेंट जमा किए थे, फिर भी उनके नाम हटा दिए गए।




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