Vikram Sharma had deep roots in corridors of power and had been living in Uttarakhand for 18 years सत्ता के गलियारों में थी विक्रम की गहरी पैठ, पैर जमाने के लिए रसूखदारों से बढ़ाया था मेलजोल, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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सत्ता के गलियारों में थी विक्रम की गहरी पैठ, पैर जमाने के लिए रसूखदारों से बढ़ाया था मेलजोल

विक्रम शर्मा को 13 अप्रैल 2017 को देहरादून से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वर्ष 2017 से 2021 तक वह जेल में बंद रहा।

Sat, 14 Feb 2026 09:54 AMSourabh Jain हिन्दुस्तान टीम, देहरादून, उत्तराखंड
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सत्ता के गलियारों में थी विक्रम की गहरी पैठ, पैर जमाने के लिए रसूखदारों से बढ़ाया था मेलजोल

झारखंड के गैंगस्टर विक्रम शर्मा की उत्तराखंड और यूपी के सत्ता के गलियारों में भी मजबूत पैठ थी। 18 साल से ज्यादा वक्त उत्तराखंड में पहचान छिपाकर रहे शर्मा न केवल जनप्रतिनिधियों के साथ अच्छी दोस्ती गांठी, बल्कि कुछ हाईप्रोफाइल नौकरशाहों के साथ भी अपने करीबी रिश्ते बना लिए थे। यही वजह थी कि सुदूर झारखंड से आए गैंगस्टर को न केवल यहां सेफ सेल्टर मिल गया, बल्कि बल्कि स्टोन क्रशर के धंधे में भी एंट्री हो गई।

शुक्रवार को राजपुर रोड स्थित एक मॉल में हत्या के बाद जैसे ही विक्रम का ब्योरा सामने आया, उसके थोड़़ी देर बाद ही सोशल मीडिया में उसके कई जाने-अनजाने किस्से भी मय फोटो के साथ तैरने शुरू हो गए थे। सू्त्रों के अनुसार खुद को झारखंड में पुलिस की आंखों की किरकिरी बनता देख विक्रम ने डेढ़ दशक पहले ही उत्तराखंड का रुख कर लिया था।

पैर जमाने के लिए रसूखदारों से बढ़ाई मेलजोल

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 से पहले ही उसने अपने पैर यहां जमा लिए थे। यहां अपनी जड़ें जमाने के लिए उससे पहला काम उत्तराखंड के रसूखदारों के साथ मेलजोल बढ़ाने का किया। विक्रम की हकीकत का पहली बार तब पता चला जब वर्ष 2017 में झारखंड पुलिस ने देहरादून में दबिश डालकर उसे गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। तब ही पता चला था कि विक्रम यहां एक दशक से डेरा जमाए हुए है। विक्रम के सोशल मीडिया पेज पर कई चौंकाने वाले फोटो भी हैं। इनमें वो कुछ नेताओं-अफसरों के साथ बगलगीर बना है। कुछ अफसरों की तारीफ में उसने पुल बांधे हुए हैं।

देहरादून से गिरफ्तारी के बाद जेल में बंद भी रहा

विक्रम शर्मा को 13 अप्रैल 2017 को देहरादून से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वर्ष 2017 से 2021 तक वह जेल में बंद रहा।

स्टोन क्रशर को लेकर थी दोनों भाइयों में तनातनी

इस हत्याकांड के पीछे विक्रम शर्मा की अपने छोटे भाई अरविंद शर्मा से तनातनी को वजह माना जा रहा है। शर्मा बंधुओं में विवाद की मुख्य जड़ बाजपुर स्थित स्टोन क्रशर को बताया जा रहा है। यह बाजपुर में छोई मोड़ पर साल 2014 से संचालित है। पहले इस स्टोन क्रशर का संचालन छोटा भाई अरविंद शर्मा करता था, जिसने इसे लीज पर दिया हुआ था। करीब दो-तीन साल पहले हुए आपसी बंटवारे के बाद से इस स्टोन क्रशर का संचालन विक्रम शर्मा द्वारा किया जा रहा था। विक्रम ने भी इसे वर्तमान में लीज पर दे रखा है। दून में हत्या की वारदात के बाद विक्रम के पैतृक गांव पिपलिया में स्थिति फिलहाल सामान्य बनी हुई है।

दो दशक की इंटेलिजेंस चूक की अब होगी जांच

कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा देहरादून के पॉश इलाके में सालों से रह रहा था। दून पुलिस और उसकी लोकल इंटेलिजेंस यूनिट को इसकी भनक तक नहीं लगी। शुक्रवार को हुए इस हत्याकांड ने पुलिस के खुफिया तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना स्थानीय पुलिस की मिलीभगत या घोर लापरवाही के इतना बड़ा अपराधी शहर में स्टोन क्रशर और प्रॉपर्टी का कारोबार कैसे जमा बैठा। कानून व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जिला पुलिस से तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

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राज्य में प्रॉपर्टी डीलरों का डेटाबेस बनाया जाएगा

इस घटना के बाद आईजी राजीव स्वरूप ने स्पष्ट किया है कि अब शहर में कंस्ट्रक्शन और प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में लगे लोगों की गहनता से जांच होगी। पुलिस ऐसे सभी लोगों का डेटा तैयार करेगी। कोई अपराधी इन व्यवसायों की आड़ में छिपा मिला, तो सख्त कार्रवाई होगी।

झारखंड पुलिस से मांगी गई मदद

गोलीबारी में मारा गया विक्रम झारखंड का हिस्ट्रीशीटर है। उसके लिंक, रंजिश और मारने की फिराक में लगे लोगों का पता लगाने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने झारखंड पुलिस संपर्क साधा है। यहां एक टीम भी झारखंड रवाना कर दी गई है। शुक्रवार देर रात पुलिस हत्यारों का सुराग नहीं जुटा पाई।

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