Story of gangster Vikram Sharma who entered the world of crime from the world of sports खेल की दुनिया से अपराध की दुनिया में आया था विक्रम; जो दूसरों के साथ किया, वही हश्र खुद का भी हुआ, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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खेल की दुनिया से अपराध की दुनिया में आया था विक्रम; जो दूसरों के साथ किया, वही हश्र खुद का भी हुआ

मूल रूप से उत्तराखंड निवासी विक्रम शर्मा के पिता गोविंद शर्मा टाटा स्टील में नौकरी करते थे। परिवार पहले सिदगोड़ा में टाटा स्टील के क्वार्टर में रहता था। इस दौरान विक्रम शर्मा ने बच्चों को कराटे का प्रशिक्षण देना शुरू किया

Sat, 14 Feb 2026 09:00 AMSourabh Jain हिन्दुस्तान टीम, देहरादून, उत्तराखंड
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खेल की दुनिया से अपराध की दुनिया में आया था विक्रम; जो दूसरों के साथ किया, वही हश्र खुद का भी हुआ

गैंगस्टर विक्रम शर्मा का आखिरकार वही हश्र हुआ जो अब तक वह दूसरों के साथ करता आया था। विक्रम ने खेल की दुनिया से अपराध की दुनिया में कदम रखा था और उस पर हत्या और अपहरण सहित सात मुकदमे चल रहे हैं। उसने फर्जी दस्तावेजों से कई राज्यों में अकूत संपत्तियां जुटाईं। वर्ष 1998 में पहली बार झारखंड के काबरा अपहरण और हत्याकांड में उसका नाम सामने आया था। वह जेल में बंद झारखंड के कुख्यात अखिलेश की संपत्तियां भी संभाल रहा था।

विक्रम देता था जूडो-कराटे का प्रशिक्षण

वर्ष 1992 में जमशेदपुर के सिदगोड़ा के सिनेमा दीवार मैदान में जूडो-कराटे का प्रशिक्षण देने वाला एक सेंसेई (कोच) आपराधिक जगत का चर्चित नाम बन गया। इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान उसकी मुलाकात उस युवक से हुई, जो बाद में जमशेदपुर के कुख्यात अपराधी के रूप में पहचाना गया।

यह कहानी है विक्रम शर्मा और अखिलेश सिंह की, जिनके आपसी संबंधों की शुरुआत खेल मैदान से हुई और आगे चलकर अपराध जगत तक जा पहुंची। बताया जाता है कि अखिलेश सिंह तत्कालीन पुलिस हवलदार चन्द्रगुप्त सिंह का पुत्र था। सिदगोड़ा स्थित सिनेमा दीवार मैदान में कराटे सीखने के दौरान उसकी मुलाकात जूडो-कराटे का प्रशिक्षण देने वाले विक्रम शर्मा से हुई। प्रशिक्षण के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। कराटे प्रशिक्षण के दौरान ही दोनों ने मिलकर कुछ नया करने की योजना बनाई।

साझेदारी में शुरू किया ट्रांसपोर्ट कारोबार

वर्ष 1990 के दशक की शुरुआत में जमशेदपुर में ट्रांसपोर्ट कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। इस दौर में अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा ने ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में कदम रखा। प्रारंभ में यह साझेदारी सामान्य कारोबारी संबंधों की तरह थी, लेकिन धीरे-धीरे उनके यह संबंध और गहरे होते गए।

काबरा हत्याकांड-अपहरण के बाद चर्चा में आया

जमशेदपुर में कारोबारी काबरा अपहरण और हत्याकांड की घटना के बाद विक्रम शर्मा का नाम पहली बार व्यापक रूप से सामने आया। इस सनसनीखेज मामले ने जमशेदपुर को झकझोर दिया था। पुलिस जांच में कई नाम उभरे, जिनमें विक्रम शर्मा भी शामिल था। घटना के बाद अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा के संबंधों पर भी चर्चा तेज हो गई। शहर में बढ़ते वर्चस्व की लड़ाई, ठेकेदारी और रंगदारी जैसे मामलों में दोनों के नाम जोड़े जाने लगे।

पहली बार ट्रांसपोर्टर की हत्या में आया था नाम

जमशेदपुर के चर्चित ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा हत्याकांड में विक्रम शर्मा पर पहली बार आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। यह मामला 18 दिसंबर 1998 का है, जब बिष्टूपुर में अशोक शर्मा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने उस समय शहर में दहशत फैला दी थी। हत्या की जांच स्थानीय पुलिस के साथ CID ने भी की थी। इसमें अखिलेश सिंह गिरोह का नाम सामने आया। आरोप था कि विक्रम के कहने पर हत्या की गई थी।

नेताओं से संपर्क दिखाने की करता था कोशिश

विक्रम रील्स में बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ अपने संपर्क को प्रमुखता से दर्शाता था। कार्यक्रमों, मुलाकात और सार्वजनिक आयोजनों की तस्वीरों व वीडियो क्लिप को जोड़कर वह यह संदेश देने की कोशिश करता था कि उसका राजनीतिक गलियारों में गहरा प्रभाव है। सूत्रों के मुताबिक, उसके साथ हमेशा छह निजी अंगरक्षक रहते थे। शहर में उसकी आवाजाही सुरक्षा घेरे के साथ होती थी।

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जेल में बंद अखिलेश की संपत्ति संभाल रहा था विक्रम

झारखंड की दुमका जेल में बंद अपराधी अखिलेश सिंह के आर्थिक साम्राज्य की देखरेख जेल के बाहर से ही संचालित हो रही थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसके अवैध कारोबार और रंगदारी की रकम से जुटाई संपत्तियों का संचालन विक्रम शर्मा कर रहा था। इसका खुलासा 29 मार्च 2017 को बिरसानगर स्थित सृष्टि गार्डेन के फ्लैट नंबर 503 में छापेमारी के दौरान हुआ। इस पूरी संपत्ति को बाद में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत मुक्त कर दिया गया था।

टाटा स्टील में नौकरी करते थे विक्रम के पिता

विक्रम शर्मा का पारिवारिक और कारोबारी नेटवर्क जमशेदपुर से काफी जटिल रहा। मूल रूप से उत्तराखंड निवासी विक्रम शर्मा के पिता गोविंद शर्मा टाटा स्टील में नौकरी करते थे। परिवार पहले सिदगोड़ा में टाटा स्टील के क्वार्टर में रहता था। इस दौरान विक्रम शर्मा ने बच्चों को कराटे का प्रशिक्षण देना शुरू किया और उनका छोटा भाई अरविंद शर्मा भी इस प्रशिक्षण में शामिल था। पिता के रिटायर होने के बाद परिवार देहरादून शिफ्ट हो गया।

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