शर्मनाक: सरकारी पेंशन के साथ वृद्धावस्था और विधवा पेंशन पर भी ‘डाका’
प्रदेश में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। मोटी पेंशन लेने वाले कई पेंशनर वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के नाम पर भी सरकारी खजाने को लूट रहे हैं।

उत्तराखंड राज्य में सरकारी खजाने से मोटी पेंशन लेने के साथ 1363 से ज्यादा पेंशनर, समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था और विधवा पेंशन पर भी डाका डाल रहे हैं। यह खुलासा महालेखाकार-उत्तराखंड कार्यालय द्वारा किए गए सत्यापन के दौरान हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, महालेखाकार ने हाल में समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशनों की जांच की थी। इसमें विधवा और वृद्धावस्था पेंशन के ब्योरे का राज्य के सरकारी कर्मचारियों की पेंशन के डाटा के साथ मिलान किया गया। इस दौरान जो सामने आया उसे देखकर महालेखाकार कार्यालय के कर्मचारी भी सकते में आ गए। उन्होंने पाया कि कुल 1363 सरकारी पेंशनर ऐसे थे, जिनका आधार कार्ड नंबर, सरकारी पेंशन के रिकार्ड के साथ ही समाज कल्याण की विधवा और वृद्धावस्था पेंशन में भी दर्ज है।
बता दें कि राज्य में वर्तमान में वृद्धावस्था व विधवा पेंशन के 7.80 लाख से ज्यादा लाभार्थी हैं। सूत्रों के अनुसार, पांच लाख 61 हजार 306 लोगों को वृद्धावस्था जबकि दो लाख 19 हजार 651 महिलाओं काे विधवा पेंशन मिलती है। इन्हें सरकार 1500 रुपये प्रतिमाह पेंशन के रूप में देती है।
महालेखाकार कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डाटा से साफ साबित हो रहा है कि उक्त लोग, दो-दो पेंशन का लाभ ले रहे हैं। इसके बाद महालेखाकार कार्यालय ने इस संबंध में सरकार को भेजे पत्र के साथ प्रमाण के रूप में ऐसे पेंशनरों की पूरी लिस्ट भी भेजी है। महालेखाकार ने सरकार को मामले का सत्यापन कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट देने को कहा है।
महालेखाकार ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
महालेखाकार ने इस मामले में मुख्य सचिव और वित्त सचिव को अपनी सत्यापन रिपोर्ट भेजते हुए कहा कि समाज कल्याण विभाग की पेंशन आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए है। इसका लाभ वहीं लोग ले सकते हैं, जिनकी कोई नियमित आजीविका का कोई साधन नहीं है। उन्होंने सरकार इसलिए उपरोक्त मामलों की पात्रता शर्तों और लागू योजना प्रावधानों के संदर्भ में जांच की जानी चाहिए। महालेखाकार ने सरकार से 15 दिन में इस विषय पर उनके विचार और रिपोर्ट मांगी है।
वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि उत्तराखंड में पेंशन में गड़बड़ी का यह मामला संज्ञान में आया है। इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। इस मामले की जांच में जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, उनसे रिकवरी कराते हुए नियमानुसार कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
सवाल: सरकारी पेंशनर का आय प्रमाण पत्र कैसे बना?
समाज कल्याण विभाग के मानक के अनुसार वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन के लिए व्यक्ति की मासिक आय केवल चार हजार रुपये होनी चाहिए। पेंशन के लिए आवेदन करते वक्त व्यक्ति अपनी आय का प्रमाणपत्र भी जमा कराना होता है। यह प्रमाणपत्र राजस्व विभाग के स्तर से बनता है। अब सवाल यह है कि सरकारी पेंशन के दायरे में आने वाले सरकारी कर्मचारी को वर्तमान में औसतन 35 हजार रुपये से अधिक ही पेंशन मिलती है। ऐसे व्यक्ति का चार हजार रुपये मासिक की आय का प्रमाणपत्र किस आधार पर बनाया गया? दूसरा, 30-35 हजार रुपये मासिक पेंशन पाने वाला रिटायर कर्मचारी महज 1500 रुपये की एक और पेंशन का लालच क्यों कर रहा है? जबकि उसे पता है कि यह गलत है।
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