'मोहम्मद दीपक' की चिंगारी, कैसे उत्तराखंड में छोटी सी दुकान पर सांप्रदायिक विवाद भड़का
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक छोटी सी कपड़ों की दुकान है। दुकान के नाम को लेकर शुरू हुए विवाद की चिंगारी मोहम्मद दीपक नाम से भड़की और फिर सांप्रदायिक विवाद तक पहुंच गया।

Mohammad Deepak Controversy: उत्तराखंड के कोटद्वार में एक छोटी सी कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ विवाद बीते दो हफ्तों में इतना बढ़ गया कि वह कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव का मुद्दा बन गया। सड़क पर प्रदर्शन, आमने-सामने की झड़पें, सोशल मीडिया पर अभियान और बाहरी लोगों की एंट्री तक हालात पहुंच गए। हालांकि, पुलिस की सख्त कार्रवाई, फ्लैग मार्च और प्रशासनिक दखल के बाद अब हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। इस पूरे विवाद की कहानी को समझते हैं।
विवाद की जड़: ‘बाबा’ नाम
इस पूरे विवाद के केंद्र में पटेल मार्ग पर स्थित एक कपड़ों की दुकान है, जिसके मालिक वकील अहमद हैं और दुकान का नाम है—‘बाबा’। स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने इस नाम पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि ‘बाबा’ शब्द कोटद्वार के प्रसिद्ध सिद्धबली बाबा हनुमान मंदिर से जुड़ा है और एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा इसका इस्तेमाल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।
करीब ढाई महीने पहले बजरंग दल ने अहमद से दुकान का नाम बदलने की मांग की थी। उस वक्त उन्होंने कथित तौर पर भरोसा दिलाया कि दुकान शिफ्ट करने के बाद वह नाम बदलने पर विचार करेंगे, जिससे तनाव कुछ समय के लिए थम गया।
दुकान शिफ्ट हुई, नाम वही रहा
जनवरी में वकील अहमद ने दुकान को पटेल मार्ग से करीब 30–40 मीटर दूर दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया, लेकिन दुकान का नाम ‘बाबा’ ही रखा। यही बात फिर से विवाद की वजह बन गई। बजरंग दल ने वादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए दोबारा प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो जल्द ही उग्र हो गया।
झड़प और ‘मोहम्मद दीपक’ का उभार
28 जनवरी को प्रदर्शनकारियों और दुकान पक्ष के बीच पहली बड़ी झड़प हुई। इसी दौरान वहां मौजूद जिम संचालक दीपक कुमार बीच-बचाव के लिए आगे आए। वायरल हुए एक वीडियो में जब उनसे पहचान पूछी गई तो उन्होंने कहा- “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। कुछ लोगों ने दीपक को सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बताया, तो कुछ ने उन पर जानबूझकर भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया।
दीपक ने इस मामले में एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया था। वो कहते हैं कि “मैं हिंदू हूं और अपने धर्म पर गर्व करता हूं, लेकिन उससे पहले मैं इंसान हूं। अगर हम एक-दूसरे को दुश्मन मानेंगे तो देश आगे कैसे बढ़ेगा?”
सोशल मीडिया से सड़क तक, 31 जनवरी को फिर उबाल
28 जनवरी की घटना के वीडियो और पोस्ट ने विवाद को और भड़का दिया। 31 जनवरी को हालात फिर तनावपूर्ण हो गए, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी देहरादून और ऋषिकेश से बुलाए गए। सभी दुकान के बाहर जमा हुए। नारेबाजी हुई और दीपक के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तुरंत अतिरिक्त बल तैनात किया। एएसपी और एसडीएम मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर हालात संभाले।
पुलिस की कार्रवाई: तीन FIR, फ्लैग मार्च
लगातार बढ़ते तनाव के बाद कोटद्वार पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज कीं। जिसमें 30–40 अज्ञात लोगों के खिलाफ शांति भंग और सरकारी काम में बाधा डालने का केस, प्रदर्शन के दौरान गाली-गलौज को लेकर एक शिकायत और 28 जनवरी की घटना में धमकी और आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में दीपक और उनके साथियों पर मामला दर्ज हुआ। इसके साथ ही शहर में फ्लैग मार्च निकाले गए, संवेदनशील इलाकों में पुलिस तैनाती बढ़ाई गई और यूपी से सटी कौरिया सीमा पर सख्त चेकिंग शुरू की गई।
फैसला: दुकान का नाम नहीं बदलेगा
कई दौर की मध्यस्थता के बाद प्रशासन ने साफ किया कि दुकान ‘बाबा’ नाम से ही चलेगी। पुलिस ने सभी पक्षों को चेतावनी दी कि किसी भी तरह से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश पर सख्त कार्रवाई होगी। एएसपी चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि कोटद्वार में हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में हैं और शांति बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
दीपक ने बताई अपनी पीड़ा
इस पूरे विवाद का असर दीपक की निजी जिंदगी पर भी पड़ा है। उनका कहना है कि उनका जिम कई दिनों से बंद है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। सिर्फ किराया ही करीब 50 हजार रुपये महीने का है। दीपक ने कहा, “नुकसान झेल लूंगा, लेकिन पत्नी, मां और छोटी बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।”
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