उत्तराखंड CM पुष्कर धामी ने अपने आधे विभाग मंत्रियों में बांटे, किसका कद बढा; किसका घटा
उत्तराखंड सीएम पुष्कर धामी 35 से अधिक विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उनके पास 18 विभाग बचे हैं। कुछ मंत्रियों का कद घटा है, जबकि कुछ का कद बढ़ा है। नए मंत्रियों को बड़े विभागों का जिम्मा सौंपा गया है।

Uttarakhand Cabinet Reshuffle: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मंत्रियों के बीच विभागों का बहुप्रतीक्षित बंटवारा कर दिया है। गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार के दो दिन बाद ही मंत्रियों को विभाग आवंटित कर दिए गए। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने खुद को हल्का करते हुए अपने कई भारी-भरकम विभागों का सहयोगी मंत्रिमंडल के सदस्यों के बीच बंटवारा किया है। अब तक 35 से अधिक विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे धामी ने अपने पास 18 विभाग रखें हैं। सतपाल महाराज से जलागम, गणेश जोशी से ग्राम्य विकास और धन सिंह रावत से स्वास्थ्य हटाया गया है। वहीं, सुबोध उनियाल का कद बढ़ा है। जबकि नए मंत्रियों को बड़े विभागों का जिम्मा सौंपा गया है।
राज्यपाल की संस्तुति के बाद जारी सूची के अनुसार मुख्यमंत्री सामान्य प्रशासन, गृह, कार्मिक, सतर्कता, नियुक्ति एवं प्रशिक्षण और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे प्रमुख विभाग स्वयं देखेंगे। इन विभागों को शासन संचालन की रीढ़ माना जाता है, जिनके माध्यम से प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण सुनिश्चित किया जाता है। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, आयुष एवं आयुष शिक्षा, परिवहन, शहरी विकास विभाग, विधायी एवं संसदीय कार्य और समाज कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों का सहयोगी मंत्रियों के बीच आवंटन किया गया है। ताकि कम समय में विभागीय कार्यों प्रभावी ढंग से गति दी जा सके।
खजान दास, कौशिक, चौधरी, प्रदीप और राम सिंह कैड़ी नए मंत्री
बता दें कि मुख्यमंत्री ने कैबिनेट का विस्तार करते हुए दो दिन पहले ही विधायक खजान दास, मदन कौशिक, भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। दरअसल, मंत्रिमंडल में पांच पद लंबे समय से रिक्त चल रहे थे, जिनमें तीन पद पहले से खाली थे, एक पद पूर्व मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद रिक्त हुआ था, जबकि एक पद प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के कारण खाली हुआ। इन परिस्थितियों में संबंधित विभागों का दायित्व भी मुख्यमंत्री के पास ही था। यह बंटवारा संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए विभागों का पुनर्गठन किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि सीएम की ओर से प्रमुख प्रशासनिक विभाग अपने पास रखना एक रणनीतिक कदम है, जिससे शासन की मुख्य कमान उनके नियंत्रण में बनी रहेगी, वहीं अन्य विभाग मंत्रियों को सौंपकर कार्यों का प्रभावी वितरण सुनिश्चित किया गया है।
सतपाल से जलागम, जोशी से ग्राम्य विकास हटाया
मंत्री सतपाल महाराज से जलागम और पंचायतीराज विभाग वापस लिया गया है। जबकि गणेश जोशी से ग्राम्य विकास जैसा बड़ा विभाग वापस लिया गया है। हालांकि सतपाल महाराज को सामान्य प्रशासन विभाग देकर बैलेंस किया गया है। मंत्री सुबोध उनियाल से भाषा और तकनीकी शिक्षा वापस लिए गए हैं लेकिन उसके बदले अहम विभाग दिए गए हैं।
सुबोध उनियाल का कद बढ़ा, धन सिंह से स्वास्थ्य हटाया
कैबिनेट विस्तार के बाद हुए विभागों के बंटवारे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का कद बढ़ा दिया है। उनके पास अब वन के साथ ही संसदीय कार्य, विद्यायी और स्वास्थ्य जैसे भारी भरकम विभाग की भी जिम्मेदारी होगी। जबकि डा. धन सिंह रावत से स्वास्थ्य वापस लेकर उन्हें अब तकनीकी शिक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुबोध उनियाल के पास अभी तक कैबिनेट में मुख्य रूप से वन, तकनीकी शिक्षा, भाषा और निर्वाचन की जिम्मेदारी थी। जबकि संसदीय कार्य और विधायी विभाग का जिम्मा उन्हें विधानसभा सत्र के दौरान प्रभार के रूप में दिया जाता रहा है। लेकिन नए सिरे से हुए विभागों के बंटवारे के बाद सुबोध को स्वास्थ्य विभाग के साथ ही संसदीय कार्य और विधायी विभाग की जिम्मेदारी भी पूरी तरह से दे दी गई है। ऐसे में कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने चुनावी साल में उनियाल पर भरोसा जताते हुए उन्हें अहम विभाग दिए हैं। विदित है कि राज्य में पिछले कुछ समय में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। खासकर चौखुटिया, पिलखी में हुए जन आंदोलन से दबाव बढ़ रहा था।
नए मंत्रियों को बड़े विभागों का जिम्मा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट में शामिल नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी है। पहली बार मंत्री बने विधायकों में राम सिंह कैड़ा, प्रदीप बत्रा और भरत चौधरी को बड़े विभाग देकर उन पर भरोसा जताया है।
राम सिंह कैड़ा को शहरी विकास
कैबिनेट विस्तार में मंत्री बने खजान दास और मदन कौशिक पूर्व में भी मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में धामी सरकार ने कैबिनेट विस्तार के बाद विभाग बंटवारे में अनुभवों के साथ पहली बार मंत्री बने विधायकों को भी बराबर की तव्वजो दी है। राम सिंह कैड़ा को शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और जलागम प्रबंधन विभाग की अहम जिम्मेदारी दी है। उनके पास शहरी विकास विभाग सबसे महत्वपूर्ण विभाग है। जो राज्य में बढ़ते शहरीकरण के बीच उनकी भूमिका और विजन को सामने रखने में अहम रहेगा।
प्रदीप बत्रा को परिवहन और सूचना
वहीं, रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा को परिवहन के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुराज, विज्ञान प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विभाग दिए हैं। उन पर नई सोच के साथ डिजिटल विजन को आगे बढ़ाने के अलावा परिवहन ढांचे में व्यापक सुधार की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
भरत चौधरी को उद्योग और ग्राम्य विकास
रुद्रप्रयाग से विधायक भरत चौधरी को ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम और खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग मिले हैं। राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दिलाने में चौधरी अहम भूमिका इन विभागों के माध्यम से निभा सकते हैं। मदन कौशिक और खजान दास को उनके अनुभव के आधार पर अहम मोर्चों पर तैनात किया गया है। मदन कौशिक को आपदा प्रबंधन और आयुष जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं। सरकार और संगठन में लंबे अनुभव रखने वाले खजान दास को समाज कल्याण विभाग देकर सरकार ने चुनावी साल में समाज के हर तबके तक पहुंचने के लिए उन पर भरोसा जताया है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन