ऋषिकेश में आरती स्थल पर दिखा 7 फीट लंबा दुर्लभ प्रजाति का सांप, देख लोगों में मच गया हड़कंप
यह सांप जहरीला नहीं होता है, लेकिन देखने में किसी भी अन्य खतरनाक सांप की तरह ही होता है। जिसकी वजह से लोग इसे देखकर डर भी जाते हैं। धमन्दा ने बताया कि फिलहाल सांप को रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।

उत्तराखंड में ऋषिकेश के आवास विकास इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब यहां गंगा किनारे स्थित एक आरती स्थल पर कॉपरहेड सांप निकल गया। यह सांप आसपास के क्षेत्र में कौतूहल का विषय बन गया। इस बारे में जानकारी देते हुए इलाके के रेंजर जीएस धमन्दा ने बताया कि पकड़ में आए सांप की लंबाई करीब 7 फिट है।
धमन्दा के अनुसार दुर्लभ प्रजाति का यह सांप 'वन सुंदरी' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि यह सांप जहरीला नहीं होता है, लेकिन देखने में किसी भी अन्य खतरनाक सांप की तरह ही होता है। जिसकी वजह से लोग इसे देखकर डर भी जाते हैं। धमन्दा ने बताया कि फिलहाल सांप को रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।
तीन लोगों पर हमला करने वाले भालू को मारने के आदेश जारी
उधर एक अन्य मामले में प्रशासन ने प्रदेश के टिहरी जिले के थौलधार क्षेत्र में पिछले काफी समय से सक्रिय एक खूंखार भालू को मारने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह फैसला गुरुवार को हुई उस घटना के बाद लिया गया, जब इस भालू ने हमला कर एक वन दरोगा (फॉरेस्टर) समेत तीन व्यक्तियों को घायल कर दिया। घटना के बाद घायलों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे आक्रोशित ग्रामीणों ने टिहरी के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) पुनीत तोमर को हटाने की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया जिसके बाद भालू को मारने के आदेश जारी कर दिए गए।
खूंखार भालू ने पिछले महीने किया था महिला को घायल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थौलधार ब्लॉक के चंबा-धरासू राजमार्ग पर सुल्याधार क्षेत्र में पिछले काफी समय से खूंखार भालू सक्रिय है जिसने पिछले महीने हमला करते हुए एक महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस घटना के बाद से वन विभाग की एक टीम क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही है।
गुरुवार को तीन लोगों पर कर दिया हमला
बीते दिन ग्रामीण जब गश्ती दल को भालू की गतिविधि वाला क्षेत्र दिखाने के लिए गए तो वहां पहले से घात लगाए बैठे भालू ने उन पर अचानक हमला बोल दिया । भालू के हमले में वन दरोगा अजयपाल पंवार, बेरगणी गांव के ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह रावत तथा एक अन्य ग्रामीण विनोद रावत घायल हो गए।
डीएफओ द्वारा सबूत मांगने पर भड़के ग्रामीण
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने जब घटना की सूचना डीएफओ को दी तो उन्होंने भालू के हमले के सबूत मांगे जिससे गुस्साए ग्रामीण एंबुलेंस के माध्यम से घायलों को अस्पताल ले जाने की बजाय टिहरी के जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए।
ग्रामीणों ने वहां डीएफओ तोमर को हटाने की मांग करते हुए प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में, मौके पर पहुंची टिहरी की मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) वरूणा अग्रवाल तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को किसी तरह शांत किया। डीएफओ तोमर भी कलेक्ट्रेट धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से माफी मांगी। (भाषा इनपुट के साथ)
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