New Arms Policy to be Formulated for Ex-Servicemen and Agniveers in UK, proposal may brought up in the Cabinet उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए बनेगी नई शस्त्र नीति, कैबिनेट बैठक में आ सकता है प्रस्ताव, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए बनेगी नई शस्त्र नीति, कैबिनेट बैठक में आ सकता है प्रस्ताव

धामी सरकार पहले ही पुलिस, जेल प्रहरी और वन सुरक्षा जैसे विभागों में अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा कर चुकी है। सरकार ने संबंधित विभागों को दिसंबर से पहले भर्ती के लिए रिक्तियां निकालने को कहा है।

Wed, 3 June 2026 10:16 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून, उत्तराखंड
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उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए बनेगी नई शस्त्र नीति, कैबिनेट बैठक में आ सकता है प्रस्ताव

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए एक नई सरल शस्त्र लाइसेंस नीति लाने पर विचार कर रही है। जिसमें पूर्व सैनिकों के लिए शस्त्र लाइसेंस पाने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। इस संबंध में गृह विभाग स्तर पर मंथन चल रहा है और आने वाली कैबिनेट की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव रखा जा सकता है। दरअसल लंबे समय से पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस दिए जाने की मांग उठती रही है, इसी वजह से सरकार अब इस बारे में गंभीरता से विचार कर रही है। इस नई नीति में पूर्व सैनिकों को पुलिस सत्यापन प्रक्रिया से भी बाहर रखने पर विचार किया जा रहा है।

इसके साथ ही सरकार अग्निवीर योजना के तहत सेवानिवृत्त होकर लौटने वाले युवाओं के रोजगार, स्वरोजगार और पुनर्वास की रूपरेखा पर भी काम कर रही है। साथ ही उन्हें भी शस्त्र लाइसेंस लेने में किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए उन्हें भी नई शस्त्र नीति में राहत देने के बारे में सरकार सोच रही है। दरअसल पूर्व सैनिकों को शस्त्र लाइसेंस में राहत देने की एक वजह यह भी है कि सरकार का मानना है कि इन सैनिकों को हथियार चलाने और इसे संभालकर रखने का पहले से ही अनुभव होता है, ऐसे में उन्हें कई राहत दी जा सकती हैं।

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इसके अलावा राज्य सरकार पूर्व सैनिकों और पूर्व अर्धसैनिक बलों के कल्याण से जुड़े कई प्रस्तावों को भी मंजूर कर सकती है, जिनमें उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता देना भी शामिल है। दरअसल पूर्व सैनिकों के बढ़ते जमीनी विवादों को देखते हुए सरकार उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

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सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस विषय पर शासन स्तर पर कई दौर की चर्चा भी हो चुकी है। सरकार यह भी चाहती है कि सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके बच्चों को राष्ट्र निर्माण से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, ताकि उनके लिए नए अवसर तैयार हो सकें।

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