LPG संकट से ब्लैक में खरीदना पड़ रहा सिलेंडर, इंदिरा अम्मा कैंटीन में थाली के दाम बढ़े
इंदिरा अम्मा कैंटीन के संचालक का कहना है कि एलपीजी संकट के कारण ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इसलिए अब थाली के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में गहराए रसोई गैस संकट का सीधा असर अब आम आदमी की थाली पर पड़ने लगा है। सर्वे चौक स्थित इंदिरा अम्मा कैंटीन में भोजन के दामों में 10 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। पहले यहां दाल, चावल, सब्जी और एक रोटी वाली पौष्टिक थाली मात्र 20 रुपये में उपलब्ध थी। इसकी कीमत बढ़ाकर 30 रुपये कर दी गई है।
कैंटीन संचालक के अनुसार नियमित रूप से गैस की आपूर्ति न होने के कारण उन्हें मजबूरन 1200 रुपये में ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। लागत में इस बेतहाशा वृद्धि के कारण कीमतें बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है। कैंटीन में भोजन करने आने वाले दैनिक मजदूरों और छात्रों का कहना है कि कम दामों के कारण वे यहां आते थे। अब भोजन महंगा होने से उनके दैनिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। महंगाई और अधिक बढ़ सकती है।
रसोई गैस की डिलीवरी 18 हजार , बैकलॉग 90 हजार
रसोई गैस संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को जिलेभर की गैस एजेंसियों ने राहत देने की कोशिश करते हुए लगभग 18 हजार घरेलू सिलेंडरों की होम डिलीवरी की। इसके बावजूद संकट की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में अभी भी 90,213 सिलेंडरों का भारी बैकलॉग बना हुआ है। जिल की अधिकांश एजेंसियों में उपभोक्ताओं को रिफिल के लिए 5 से 7 दिनों तक का इंतजार करना पड़ रहा है।
घरेलू गैस की श्रेणी में सबसे अधिक मार आईओसीएल के उपभोक्ताओं पर पड़ रही है, जहां अकेले 72,791 सिलेंडरों का बैकलॉग दर्ज किया गया है। वहीं, बीपीसीएल में 12,729 और एचपीसीएल में 4,693 सिलेंडरों की वेटिंग चल रही है। शनिवार को जिले को 14,847 नए सिलेंडरों की प्राप्ति हुई, लेकिन भारी डिमांड के सामने यह आपूर्ति नाकाफी हो रही है। वर्तमान में जिले के पास केवल 37,488 सिलेंडरों का ही स्टॉक बचा है।
384 कॉमर्शियल सिलेंडर बांटे
दून में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। शनिवार को जिले भर में कुल 384 व्यावसायिक सिलेंडरों का वितरण किया गया। वर्तमान में वितरण के बाद एजेंसियों के पास 1,616 सिलेंडरों का स्टॉक शेष है।
सिडकुल: डीजल महंगा और कच्चे माल का भी हुआ संकट
इंडस्ट्रियल डीजल के बढ़ते दाम और खाड़ी देशों में जारी युद्ध के चलते कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से सिडकुल का फार्मा सेक्टर संकट से जूझ रहा है। बढ़ती लागत के बीच इन उद्योगों का उत्पादन करीब 25 फीसदी तक घट गया है। लिहाजा, आने वाले समय में दवाइयों के दाम बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है।
उद्यमियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से कच्चे माल की सप्लाई अनियमित बनी हुई है। जो सामग्री मिल भी रही है, वह पहले की तुलना में काफी महंगे दामों पर उपलब्ध हो रही है। इस बीच, इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने इन उद्योगों की लागत को और बढ़ा दिया है। फार्मा इकाइयों में उत्पादन के लिए मशीनों के संचालन और बिजली आपूर्ति के लिए जेनरेटर का इस्तेमाल होता है, जिसमें डीजल की खपत अधिक होती है। डीजल महंगा होने से उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। परिवहन लागत बढ़ने से तैयार दवाइयां महंगी हो रही हैं।
लागत में भी हो रही है बढ़ोतरी
उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, उत्पादन लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा असर दवाइयों की कीमतों पर पड़ेगा। कच्चे माल और डीजल की महंगाई के चलते कंपनियां लंबे समय तक घाटा नहीं झेल सकतीं हैं।
गैस और ऊर्जा लागत हो चुकी दोगुनी
जंग के चलते प्लास्टिक समेत तमाम कच्चे माल की कीमतों में 50 फीसदी तक वृद्धि हुई है। सेलाकुई के उद्यमियों के अनुसार, बिजली और हीटिंग के लिए इस्तेमाल गैस के दाम भी दोगुने हो गए हैं, जिससे सिरिंज और कैथेटर जैसे जरूरी उत्पादों का निर्माण महंगा हो गया है।
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