There is no shortage of LPG in this village of Rajasthan, people have built their own gas plant. राजस्थान के इस गांव में नहीं है LPG किल्लत, लोगों ने बनाया अपना गैस प्लांट; दिलचस्प कहानी, Rajasthan Hindi News - Hindustan
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राजस्थान के इस गांव में नहीं है LPG किल्लत, लोगों ने बनाया अपना गैस प्लांट; दिलचस्प कहानी

न एलपीजी गैस सिलेंडर खत्म होने का झंझट, न बुकिंग की समस्या… राजस्थान के इस गांव में लोगों ने बना रखे हैं अपने गैस प्लांट। पढ़िए दिलचस्प कहानी।

Sat, 21 March 2026 07:31 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, भीलवाड़ा
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राजस्थान के इस गांव में नहीं है LPG किल्लत, लोगों ने बनाया अपना गैस प्लांट; दिलचस्प कहानी

गैस सिलेंडर, गैस सिलेंडर और गैस सिलेंडर... सोशल मीडिया पर देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आतीं तस्वीरों-वीडियो में एजेंसी के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगी दिखाई दे रही हैं। वजह है- LPG सिलेंडर मिलने में होने वाली देरी। लेकिन, राजस्थान का एक गांव ऐसा भी है, जो गैस सिलेंडर खत्म होने की चिंता से मुक्त है। वहां के लोगों को बार-बार गैस की बुकिंग कराने के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं है।

अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों? तो इसके पीछे की वजह एकदम साफ है- वहां के परिवारों द्वारा अपनाया गया "बायोगैस मॉडल"। अब आप सोच रहे होंगे कि ये क्या बला है! दरअसल यही वो तकनीक है, जिसकी मदद से गांव के परिवारों ने अपना खुद का गैस प्लांट लगाया हुआ है। इसकी मदद से अब ये लोग बेरोकटोक गैस का इस्तेमाल करते हैं।

मोतीपुर के लोगों के पास हैं अपने गैस प्लांट

ऐसा अनोखा गांव है- मोतीपुर। ये गांव भीलवाड़ा की आसींद तहसील के अंतर्गत आता है। यहां करीब 200 परिवार रहते हैं। जानकारी के मुताबिक, यहां घरों के बाहर बाड़ों में सबके पर्सनल बायोगैस प्लांट लगे हैं। इसके चलते ये लोग एलपीजी गैस नहीं भराते। इनके बाड़े में लगे बायोगैस प्लांट से निकली गैस की मदद से खाना बनाना, पानी गर्म करना जैसे तमाम काम होते हैं।

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दूसरों की भी गैस जरूरत पूरी कर सकते

गांव वालों का कहना है कि वो अपने बाड़े में लगे बायोगैस प्लांट से इतनी गैस बना लेते हैं कि अपनी और दूसरों की जरूरतों को भी पूरा कर सकें। यानी वो चाहें तो अपने पड़ोसियों को भी गैस की सप्लाई कर सकते हैं। घर में छोटे-बड़े कार्यक्रम होने पर भी एलपीजी गैस सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती है। दिलचस्प बात ये भी है कि इस प्लांट से न केवल गैस बनती है, बल्कि गांव के लोग खाद भी बनाते हैं, जिसका उपयोग खेतों में अच्छी पैदावार करने के लिए करते हैं। अब तक आप सोच रहे होंगे कि है क्या ये बायोगैस प्लांट? चलिए आगे के हिस्से में इसके बारे में समझते हैं।

जैविक कचरे से बनाया जाता है बायोगैस प्लांट

बायोगैस प्लांट एक ईको फ्रेंडली तकनीक है। इसमें गोबर, किचन वेस्ट और अन्य जैविक कचरे से गैस बनाई जाती है। इस गैस को बायोगैस कहा जाता है, जिसमें मुख्य रूप से मीथेन होती है। इसका उपयोग खाना पकाने, पानी गर्म करने और बिजली पैदा करने में किया जाता है। साथ ही साथ इससे बचा हुआ मैटेरियल जैविक खाद के रूप में काम आता है।

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अब समझिए इस प्लांट में कैसे बनती है गैस

बायोगैस प्लांट का कार्य सिद्धांत “एनेरोबिक डाइजेशन” पर आधारित है, यानी बिना ऑक्सीजन के कचरे का विघटन। इसमें गोबर और अन्य कचरे को पानी में मिलाकर एक बंद टैंक में डाला जाता है, जहां बैक्टीरिया इसे सड़ाकर गैस उत्पन्न करते हैं। यह गैस टैंक के ऊपरी हिस्से में जमा हो जाती है और पाइप के माध्यम से उपयोग के लिए भेजी जाती है।

इस प्लांट को बनाने के लिए जमीन में एक टैंक या गड्ढा तैयार किया जाता है, जिसमें इनलेट और आउटलेट पाइप लगाए जाते हैं। ऊपर गैस संग्रह के लिए डोम बनाया जाता है। छोटे प्लांट घरों के लिए और बड़े प्लांट गांव या फार्म स्तर पर लगाए जाते हैं।

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बायोगैस प्लांट के कई फायदे हैं

बायोगैस प्लांट के कई फायदे हैं, जैसे ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और जैविक खाद की उपलब्धता। हालांकि, इसकी स्थापना में शुरुआती लागत और नियमित देखभाल की आवश्यकता होती है, लेकिन लंबे समय में यह एक किफायती और टिकाऊ समाधान साबित होता है।

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