last date for marriage registration in Uttarakhand UCC is 26 January which done 2010 to 2025 2010 से 2025 के बीच हुई जिनकी शादी, वो UCC के तहत जल्द कराएं विवाह पंजीयन; आ गई आखिरी तारीख, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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2010 से 2025 के बीच हुई जिनकी शादी, वो UCC के तहत जल्द कराएं विवाह पंजीयन; आ गई आखिरी तारीख

यूसीसी से पहले ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत, विवाह पंजीकृत किए जाते थे जिसकी पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी। यूसीसी में विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं।

Thu, 22 Jan 2026 08:52 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून, उत्तराखंड
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2010 से 2025 के बीच हुई जिनकी शादी, वो UCC के तहत जल्द कराएं विवाह पंजीयन; आ गई आखिरी तारीख

उत्तराखंड राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू हुए 27 जनवरी को पूरा एक साल होने वाला है और इस अवधि में अब तक 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण हो चुका है। यूसीसी के तहत 26 मार्च 2010 के बाद राज्य में हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इस दौरान यूसीसी लागू होने के बाद होने वाली शादियों को रजिस्ट्रेशन के लिए 60 दिन का समय दिया जाता है। वहीं 26 मार्च 2010 से लेकर 27 जनवरी 2025 के बीच हुई शादियों के लिए मैरिज रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 26 जनवरी 2026 है। तो इस समयसीमा के बीच जिन लोगों की शादी हुई थी, और अगर उन लोगों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो ऐसे लोगों के पास बिना जुर्माने के शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सिर्फ कुछ दिन का समय बचा है।

इससे पहले ऐसी शादियों के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की आखिरी तारीख 27 जुलाई 2025 तय की गई थी, लेकिन पिछले साल इस समय सीमा को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था। जिसके बाद फिलहाल यह तारीख 26 जनवरी है। इस तारीख के बाद मार्च 2010 से पहले हुई शादी का रजिस्ट्रेशन कराने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।

बता दें कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने से प्रक्रियाएं आसान हो गई हैं और इसके तहत एक साल में राज्य में साढ़े चार लाख से अधिक शादियों का पंजीकरण हो चुका है। इस कानून के तहत महिला एवं पुरुषों के लिए विवाह की आयु निर्धारित की गई है, वहीं सभी धर्मों में तलाक एवं अन्य प्रक्रियाओं के लिए समान और कड़े प्रावधान किए गए हैं। यूसीसी के लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है।

इस बारे में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि यूसीसी के तहत अब पति-पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन तरीके से विवाह पंजीकरण करवा रहे हैं जबकि पुराने अधिनियम में उन्हें दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।

यूसीसी से पहले ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत, विवाह पंजीकृत किए जाते थे जिसकी पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी। यूसीसी में विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं जिसमें दंपति या गवाह कहीं से भी, अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान दर्ज कराते हुए पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। यही कारण है कि बीते करीब एक साल में 4 लाख 74 हजार 447 से ज्यादा विवाह पंजीकृत हो चुके हैं।

यूसीसी में विवाह पंजीकरण का प्रतिदिन औसत 1400 के करीब है जबकि पिछले अधिनियम में विवाह पंजीकरण का प्रतिदिन औसत प्रतिदिन 67 का आता था। यही नहीं, इस दौरान, 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से ही विवाह विच्छेद करने और 68 ने सहवास संबंधों में रहने, दो ने सहवास संबंध समाप्त करने का प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है।

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यूसीसी के तहत आवेदन के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन आवेदन करने के बाद औसतन पांच दिन के भीतर ही पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो रहा है। इस बारे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखंड ने यूसीसी लागू करते हुए अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। उन्होंने कहा था, ‘बीते एक साल में जितनी पारदर्शिता और सरलता से यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे लोगों में पूरी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत पंजीकरण करवा रहे हैं। उत्तराखंड यूसीसी हर तरह से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।’

धामी ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने का वादा किया था और सत्ता में आने के बाद मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में इसे लागू करने का निर्णय लिया। सभी औपचारिकताओं और व्यापक जनमत संग्रह के बाद प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून लागू कर दिया गया। (एजेंसी इनपुट्स के साथ)

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