CJI SuryaKant Banbhoolpura Verdict says Occupants Cannot Dictate Land Use to Railways कब्जाधारी रेलवे को न बताएं इस्तेमाल कैसे करें; वनभूलपुरा केस पर CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी, Haldwani Hindi News - Hindustan
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कब्जाधारी रेलवे को न बताएं इस्तेमाल कैसे करें; वनभूलपुरा केस पर CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी

CJI SuryaKant: वनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा ‘सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को अपनी जमीन का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए।’

Wed, 25 Feb 2026 07:49 AMGaurav Kala नई दिल्ली
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कब्जाधारी रेलवे को न बताएं इस्तेमाल कैसे करें; वनभूलपुरा केस पर CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी

CJI SuryaKant: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हल्द्वानी स्थित वनभूलपुरा इलाके में लंबे समय से रह रहे हजारों परिवारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने रेलवे की विस्तार और विकास परियोजनाओं के मद्देनजर सार्वजनिक भूमि पर बसे लोगों को जगह खाली करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी भी की। कहा कि ‘सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को अपनी जमीन का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए।’

शीर्ष अदालत ने कहा कि लोगों के लिए रेलवे लाइनों के इतने पास रहना असुरक्षित और जोखिम भरा है, ऐसे में बेहतर होगा कि वे किसी बेहतर जगह पर चले जाएं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने का दावा नहीं कर सकता। लोग सिर्फ यही दावा कर सकते हैं कि उनका पुनर्वास किया जाए। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि यह राज्य की जमीन है और इसका इस्तेमाल कैसे करना है, यह तय करना राज्य का विशेषाधिकार है। बस अब मुद्दा यह है कि जो लोग वहां रह रहे हैं और उन्हें जब बेदखल किया जाए तो कुछ राहत दी जाए। हमारी नजर में यह अधिकार कम और विशेषाधिकार अधिक है।

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पीएम आवास के तहत पुनर्वास

मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि हम उन्हें (जमीन पर बसे लोगों) अतिक्रमण करने वाले नहीं कह रहे हैं, हमने उन्हें ‘कब्जा करने वाले’ कहा है। जब उनका पुनर्वास किया जा रहा है, तो उन्हें अतिक्रमणकारी नहीं कहा जा सकता। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विस्थापन के असर को कम करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास के लिए योग्यता तय करना बेहद जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश बोले-यह हजारों जिंदगियों का सवाल

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, इस मामले में संतुलन व लचीला दृष्टिकोण होना चाहिए, ताकि राज्य की विकास की जरूरतों के साथ लोगों का पुनर्वास भी पक्का किया जा सके। आखिरकार, यह हजारों परिवारों की जिंदगी का सवाल है। एक लचीला नजरिया उन्हें बचा सकता है क्योंकि सर्वाधिक नुकसान उन्हीं (प्रभावित लोगों) को होगा। अभी, हमें बच्चों की स्कूलिंग, उनके घरों की हालत, पीने का पानी कहां से आ रहा है, इसके बारे में नहीं पता...इसका हल होना चाहिए, एक संतुलित नजरिया होना चाहिए। इससे पहले प्रभावित लोगों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि इलाके में करीब 5000 परिवार हैं, जो वर्षों से वहां रह रहे हैं। वहां स्कूल और दूसरे पब्लिक इंस्टीट्यूशन भी हैं।

हाईकोर्ट के आदेश पर दिया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के दिसंबर 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर ये आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में सार्वजनिक जमीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा कर कई वर्षों से रह रहे हजारों परिवारों को जगह खाली करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ दाखिल अपीलों पर विचार करते हुए, शीर्ष कोर्ट ने जनवरी, 2023 में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और तब से अब तक इस पर रोक लगी हुई थी।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई व सितंबर 2024 में केंद्र व राज्य सरकार और रेलवे को प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास योजना पेश करने को कहा था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि प्रभावितों को पीएम आवास योजना के तहत पुनर्वास किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेलवे की विकास परियोजना के लिए जमीन जरूरी है।

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