supreme court refuses to stay on eviction drive in haldwani railway lands रेलवे को शर्त नहीं बता सकते, हल्द्वानी लैंड केस में SC का बेदखली पर रोक से इनकार, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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रेलवे को शर्त नहीं बता सकते, हल्द्वानी लैंड केस में SC का बेदखली पर रोक से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर कथित अतिक्रमण मामले में बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा? इस रिपोर्ट में जानें…

Tue, 24 Feb 2026 06:40 PMKrishna Bihari Singh एएनआई, नई दिल्ली
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रेलवे को शर्त नहीं बता सकते, हल्द्वानी लैंड केस में SC का बेदखली पर रोक से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कथित रेलवे की जमीन से बेदखली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हल्द्वानी में रेलवे के विस्तार की वजह से बेदखली का सामना कर रहे लोगों को उसी जगह पर पुनर्वास का कोई अधिकार नहीं है। चूंकि हजारों परिवारों के बेघर होने की संभावना है इसलिए अधिकारियों को पीएम आवास योजना के तहत उनकी योग्यता का परीक्षण करते हुए उनके पुनर्वास में मदद करनी चाहिए।

बड़ा फैसला, बेदखली पर रोक से इनकार

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने हल्द्वानी में कथित रेलवे की जमीन से बेदखली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने माना कि हजारों परिवारों के बेघर होने की संभावना है, इसलिए राज्य को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत प्रभावित लोगों की योग्यता की पुष्टि करनी चाहिए ताकि वे योजना के तहत घर के लिए अप्लाई कर सकें। अदालत ने अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट भी मांगी। इसमें अदालत को बताया जाएगा कि हाउसिंग योजना के तहत कितने परिवार योग्य हैं।

कब्जाधारी रेलवे को शर्तें नहीं बता सकते

वहीं बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुतबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हल्द्वानी में रेलवे के विस्तार की वजह से बेदखली का सामना कर रहे लोगों को उसी जगह पर पुनर्वास के लिए जोर देने का कोई अधिकार नहीं है। जमीन पर कब्जा करने वाले लोग रेलवे को शर्तें नहीं बता सकते हैं। जब बेहतर सुविधाओं वाली कोई दूसरी जगह हो सकती है तो उनसे वहीं रहने के लिए क्यों जोर दिया जाए। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए दोनों तरफ खाली जगह की जरूरत होती है। वहां रहने वाले लोग यह नहीं बता सकते कि रेलवे को लाइन वगैरह कहां बिछानी चाहिए।

पुनर्वास में मदद करने के आदेश

सर्वोच्च अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले 27 हजार से अधिक लोगों के पुनर्वास में मदद करें। बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि हम इन लोगों को 'अतिक्रमण करने वाले' नहीं कह रहे हैं। हमने उनको 'कब्जा करने वाले' कहा है। ऐसे में जब उनका पुनर्वास किया जा रहा है तो उन्हें अतिक्रमणकारी नहीं कहा जा सकता है। विस्थापन के असर को कम करने के लिए पीएम आवास योजना के तहत दावेदारी का निर्धारण बेहद जरूरी है।

पीएम आवास योजना के आवेदन फार्म देने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में नैनीताल, हल्द्वानी के कलेक्टर और रेवेन्यू अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को पीएम आवास योजना के आवेदन फार्म उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ताकि योजना के तहत उनका नामांकन आसान हो सके। सर्वोच्च अदालत ने जिला प्रशासन से योजना से जुड़ी प्रक्रिया को आसानी से लागू करने के लिए लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को पूरा सहयोग देने के लिए भी आदेश दिया।

स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी लगाएगी कैंप

अदालत ने उत्तराखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (एसएलएसए) को 18 मार्च से साइट पर पुनर्वास कैंप लगाने को कहा। अथॉरिटी के मेंबर सेक्रेटरी को कैंप शुरू होने के बाद लोकेशन पर मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने उम्मीद जताई कि यह काम 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि जरूरत पड़ने पर कई कैंप लगाए जा सकते हैं। अथॉरिटी जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने के लिए घर-घर जाकर आउटरीच कैंप भी लगा सकती है। कोर्ट ने कहा कि वह स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद अगली सुनवाई में उन लोगों के लिए दूसरे तरीकों पर विचार करेगी जो पीएम आवास योजना के योग्य नहीं पाए गए हैं।

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