UCC के बाद हलाला का पहला केस, हरिद्वार में विवाहिता को तीन तलाक के बाद किया मजबूर
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद हलाला से जुड़े पहले मामले में पुलिस ने चार्जशीट दायर की है। घटना दो महीने पहले की है, जब एक विवाहिता को हलाला के लिए मजबूर किया।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद हलाला से जुड़ा पहला मामला अब अदालत के पास है। घटना हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाना क्षेत्र में दो महीने हुई थी। पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। हालांकि अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जिन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है।
पहले तीन तलाक और फिर किया मजबूर
हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाना क्षेत्र में करीब दो महीने पहले एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी थी। महिला का कहना था कि शादी के बाद उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उसने हलाला जैसी कुप्रथा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में तीन तलाक और दहेज उत्पीड़न से जुड़ी बातें भी शामिल थीं।
यूसीसी लागू होने के बाद पहला मामला
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद हलाला से जुड़ा यह पहला मामला माना जा रहा है। इसी वजह से शुरुआत से ही यह केस चर्चा में बना हुआ है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यूसीसी का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और विवाह से जुड़ी कुप्रथाओं पर रोक लगाना है।
पुलिस ने जुटाए बयान और साक्ष्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता, उसके परिजनों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए। जांच पुलिस अधिकारी मनोज कुमार को सौंपी गई थी। पुलिस ने दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की।
पति-ससुर समेत कई लोग बनाए गए आरोपी
जांच के बाद पुलिस ने महिला के पति, ससुर और अन्य आरोपियों को केस में नामजद किया। इसके बाद पूरी विवेचना पूरी कर न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रुड़की की अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। अब मामले की सुनवाई अदालत में होगी।
इन धाराओं में मुकदमा
पुलिस ने इस केस में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता 2024 (संशोधन 2026) की धारा 32(1)(ii) और 32(1)(iii) लगाई हैं, जिनमें हलाला जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित और दंडनीय माना गया है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 115(2) और धारा 85 को भी शामिल किया गया है। मुकदमे में मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम 2019 की धारा 3 और 4 के तहत तीन तलाक से जुड़े आरोप भी जोड़े गए हैं। वहीं दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 भी लागू की गई हैं।
गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि पुलिस ने तय समय के भीतर जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुकदमे में शामिल धाराओं में गिरफ्तारी का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसलिए किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई। आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुसार होगी।
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