उत्तराखंड: तापमान में भारी गिरावट, दून में 10 डिग्री गिरा पारा; गर्मी के बीच ठंड का अहसास
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार रविवार को उत्तराखंड के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से बेहद कम रहे। दून में अधिकतम तापमान सामान्य से नौ डिग्री कम यानी 26.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

उत्तराखंड में मौसम के बदले मिजाज ने मई के महीने में सर्दियों जैसी गुलाबी ठंड का अहसास करा दिया है। प्रदेशभर में हो रही झमाझम बारिश और पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण पिछले 24 घंटों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कई शहरों में पारा सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया है।
तपती गर्मी के बीच अचानक लौटी इस ठंड के कारण लोगों को अलमारियों से पूरी बांह की शर्ट और हल्की विंड चीटर (जैकेट) निकालने पर मजबूर होना पड़ा है। राजधानी देहरादून में तो महज 24 घंटे के भीतर अधिकतम तापमान में 7.2 डिग्री की भारी कमी दर्ज की गई है।
दून में तो नई टिहरी और मुक्तेश्वर में 10 डिग्री नीचे गिरा पारा
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार रविवार को उत्तराखंड के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से बेहद कम रहे। दून में अधिकतम तापमान सामान्य से नौ डिग्री कम यानी 26.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 17.0 डिग्री रहा। पहाड़ों में ठिठुरन बढ़ गई है। नई टिहरी में पारा सामान्य से 10 डिग्री लुढ़ककर 18.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यहां 2.2 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं नगर निगम ने इंद्रप्रस्थ एन्क्लेव लेन नंबर-16 में हो रहे जलभराव का समाधान निकालते हुए रविवार को कॉलोनी में रिचार्ज पिट का निर्माण शुरू कर दिया। खाली प्लॉटों में चाहारदीवारी बनने के बाद ड्रेनेज की समस्या हो गई थी।
नमी का ऐसा स्तर अक्सर सर्दियों में देखा जाता है
पिछले दिनों पड़ी प्रचंड गर्मी ने जहां दून और आसपास के इलाकों की नमी सोख ली थी, वहीं लगातार हो रही बारिश और बादलों ने हवा में वापस भारी नमी घोल दी है। रविवार को दून में आर्द्रता (नमी) का स्तर पूरे दिन 65 से 80 फीसदी के बीच रिकॉर्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हवा में नमी का ऐसा स्तर अक्सर सर्दियों के सीजन में देखा जाता है, यही वजह है कि मई के आखिरी दिनों में भी लोगों को अच्छी-खासी ठंड का अहसास हो रहा है।
बड़ा हादसा होते-होते टल गया
लखवाड़ बहुउद्देशीय बांध परियोजना क्षेत्र में भारी बारिश के चलते मोई खड्ड में अचानक आए मलबे से बड़ा हादसा होते-होते टल गया। तेज बारिश के बाद पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर आने से निर्माण कार्य में लगी तीन पोकलेंड मशीनें मलबे में दब गईं। अचानक खतरा बढ़ता देख आपरटरों ने मशीनों से कूदकर किसी तरह भागते हुए अपनी जान बचाई। मोई खड्ड का मलबा लखवाड़ बैंड झरने के पानी के साथ तेजी से सड़क से नीचे बांध निर्माण स्थल तक पहुंच गया। उस समय मुख्य बांध स्थल से कुछ ऊपर तीन पोकलैंड मशीने पहाड़ी को काट रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शनिवार देर शाम को घटना इतनी तेजी से हुई कि चालकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर उन्होंने खुद को बचाया। समय रहते चालक बाहर नहीं निकलते तो बड़ा हादसा हो सकता था। मलबे के मार्ग में तीन बड़ी पोकलैंड मशीने आने से उसकी गति कुछ कम हो गई।
मसूरी में बारिश के बाद गर्म कपड़ों में दिखे लोग
रविवार को पर्यटन नगरी मसूरी में सुबह से लेकर दोपहर 12 बजे तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। ठंड बढ़ने से लोग गर्म कपड़ों में दिखे। चंडीगढ़ से मसूरी घूमने आए केशव सिंह, राघव ने बताया कि वह शनिवार को मसूरी आए थे तब यहां पर इतनी ठंड नहीं थी जितनी बारिश के बाद रविवार को हुई।
डोभालवाला में घरों में घुसा बारिश का पानी
दून के सालावाला, जाखन, डोभालवाला क्षेत्र में बारिश से हुए नुकसान का पार्षद भूपेंद्र कठैत, पूर्व पार्षद संजय नौटियाल और पार्षद मोहन बहुगुणा ने अधिकारियों संग निरीक्षण कर जेसीबी की मदद से मलबा हटाया। भूपेंद्र कठैत ने कहा कि अभी तो बरसात शुरू ही नहीं हुई इतने में ही जाखन, डोभालवाला क्षेत्रों में पानी घुस रहा है।
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