Uttarakhand to scrap green cess on CNG hybrid vehicles this make travel more expensive उत्तराखंड में CNG-हाइब्रिड वाहनों से लिया जाएगा ग्रीन सेस, ढीली करनी होगी जेब; कितना चार्ज लगेगा?, Dehradun Hindi News - Hindustan
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उत्तराखंड में CNG-हाइब्रिड वाहनों से लिया जाएगा ग्रीन सेस, ढीली करनी होगी जेब; कितना चार्ज लगेगा?

विद्युत बैटरी, सोलर, हाइब्रिड और सीएनजी वाहनों को भी ग्रीन सेस के दायरे से बाहर रखा गया था। लेकिन, एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि इस छूट को खत्म करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जा रहा है।

Mon, 1 June 2026 07:45 AMMohit हिन्दुस्तान, चंद्रशेखर बुडाकोटी, देहरादून
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उत्तराखंड में CNG-हाइब्रिड वाहनों से लिया जाएगा ग्रीन सेस, ढीली करनी होगी जेब; कितना चार्ज लगेगा?

उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले सीएनजी और हाइब्रिड वाहनों को ग्रीन सेस में मिली छूट जल्द खत्म हो सकती है। परिवहन मुख्यालय ने इसकी संस्तुति करते हुए सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। वित्त विभाग भी इसको लेकर सहमति दे चुका है। कैबिनेट बैठक में जल्द ही संशोधित प्रस्ताव लाया जाएगा। मंजूरी के बाद नई व्यवस्था लागू हो सकेगी।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, धामी सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रही है। परिवहन विभाग का मानना है कि सीएनजी और हाइब्रिड वाहन पूर्ण रूप से ईवी की श्रेणी में नहीं आते। हाल के वर्षों में इन वाहनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सीएनजी-हाइब्रिड वाहन का मूल उद्देश्य ईंधन बचाना है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी पर ही निर्भर होते हैं। ईवी की हरे रंग की नंबर प्लेट के कारण एएनपीआर कैमरों से पहचान आसान है। इसे ध्यान में रख परिवहन मुख्यालय ने केवल ईवी को ग्रीन सेस में छूट की सिफारिश की है।

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₹80 से 700 रुपये तक वसूला जाता है ग्रीन सेस

राज्य सरकार ने नौ फरवरी 2024 से दूसरे राज्यों से उत्तराखंड आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस को लागू किया था। शुरुआत में इसकी दर 20 से 80 रुपये के बीच निर्धारित की गई थी, लेकिन मई 2025 में इसको बढ़ाकर 80 से 700 रुपये तक कर दिया गया।

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फिलहाल इन वाहनों को मिल रही ग्रीन सेस से छूट

दोपहिया वाहन, केंद्र एवं राज्य सरकार के वाहन, दूसरे राज्यों के सरकारी वाहन, कृषि से जुड़े ट्रैक्टर, ट्रेलर, रोड रोलर, कंबाइन हार्वेस्टर, शव वाहन, फायर टेंडर, एंबुलेंस और सेना के वाहनों को ग्रीन सेस से छूट दी गई है। विद्युत बैटरी, सोलर, हाइब्रिड और सीएनजी वाहनों को भी ग्रीन सेस के दायरे से बाहर रखा गया था। लेकिन, एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि इस छूट को खत्म करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जा रहा है। मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा।

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परिवहन विभाग ने सरकार को सौंपा नई नीति का मसौदा

इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए परिवहन मुख्यालय ने नई ईवी नीति का मसौदा सरकार को सौंप दिया है। अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के नेतृत्व में तैयार मसौदे में ईवी खरीद, ई-चार्जिंग स्टेशन और इससे जुड़ी ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए सब्सिडी एवं प्रोत्साहन राशि देने की सिफारिश की गई है। बता दें कि वैश्विक संकट के मद्देनजर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ईवी को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए परिवहन विभाग को नई नीति तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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