एक परिवार-एक टिकट फॉर्मूला अपनाएगी कांग्रेस, उत्तराखंड में चुनाव से पहले बड़ा ऐलान
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने स्पष्ट किया कि एक परिवार-एक टिकट का फॉर्मूला सख्ती से अपनाया जाएगा। उन्होंने नेताओं को मैं के बजाय पार्टी के निशान पंजे को अहमियत देने की सलाह दी।

Uttarakhand Congress News: कांग्रेस ने उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बीच, पार्टी नेताओं को अनुशासन और एकजुटता की सीख देते हुए कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने स्पष्ट किया कि इस बार ‘एक परिवार-एक टिकट’ का फॉर्मूला सख्ती से लागू किया जाएगा।
प्रदेश प्रभारी का उत्तराखंड दौरा रणनीतिक रूप से काफी अहम रहा। हालांकि, यह दौरा पांच दिनों के लिए प्रस्तावित था, लेकिन शैलजा चार दिन में ही अपने संगठनात्मक कार्यों को पूरा कर दिल्ली लौट गईं। शैलजा को रविवार को एनएसयूआई के कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन इससे पहले ही शनिवार देर शाम उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में भाग लिया और दिल्ली रवाना हो गईं।
एक परिवार-एक टिकट
प्रदेश के इस चार दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं की नब्ज टटोली तथा पार्टी के लिए भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रोडमैप तैयार किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश प्रभारी ने स्पष्ट किया कि इस बार परिवारवाद को पीछे रखते हुए विधानसभा चुनाव में ‘एक परिवार-एक टिकट’ कर फार्मूला सख्ती से लागू किया जाएगा।
बदल सकते हैं समीकरण: प्रदेश
प्रभारी के फार्मूले से साफ है कि पार्टी इस बार टिकट बंटवारे में किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएगी। उधर, ‘एक परिवार-एक टिकट’ के फॉर्मूले से पार्टी के भीतर कई दिग्गजों के समीकरण बदल सकते हैं। दूसरी ओर संगठन का मानना है कि इस फार्मूले से कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश जाएगा और पार्टी ज्यादा मजबूती के साथ चुनाव मैदान में बेहतर प्रदर्शन करेगी। सियासी जानकारों की मानें तो उत्तराखंड कांग्रेस में टिकट बंटवारे के दौरान परिवारवाद हमेशा ही हावी रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता दबाव बनाकर अपने पारिवारिक सदस्यों को टिकट दिलाने में कामयाब भी रहे हैं।
मैं नहीं पंजे को पहचान बनाएं
उत्तराखंड कांग्रेस में नई जान फूंकने और गुटबाजी को खत्म करने के लिए प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं को पांच मंत्र दिए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हर नेता को ‘मैं’ के अहंकार से ऊपर उठकर ‘पंजे’ (पार्टी के चुनाव चिह्न) को अपनी असली पहचान बनाना होगा।
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