हरीश रावत बोले- भाजपा से हार के पीछे मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद, जनता से पूछकर चुनाव लड़ूंगा
उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने खुलासा किया है कि पिछली हार का कारण मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद रहा। अपनी ही पार्टी के कुछ लोगों ने इसे हवा दी और भाजपा ने चुनाव में मुद्दा भुनाया।

Harish Rawat News: राजनीति से संन्यास के कयासों पर विराम लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई इरादा नहीं है। वे एक बार फिर मैदान में उतरने को तैयार हैं, मगर इससे पहले जनता और अपने समर्थकों की राय जानेंगे। हरीश रावत ने वर्ष 2022 के चुनाव में मिली हार के लिए मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद को जिम्मेदार ठहराया।
हरीश रावत ने बताया कि 15 अप्रैल से वे उत्तराखंड भ्रमण पर निकलेंगे। वे 2017 और 2022 के चुनाव में कांग्रेस की हार के कारणों पर भी बात करेंगे। शनिवार को ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में रावत ने मन की बात साझा की। एक सवाल के जवाब में रावत ने बताया कि उन्होंने एक बार चुनावी राजनीति से पीछे हटने पर विचार किया था। उन्हाेंने पार्टी के युवा नेतृत्व को स्वीकारते हुए पांच प्रमुख नेताओं को पंचमुखी रुद्राक्ष की उपमा भी दी।
इन-दिनों अवकाश पर हरीश
मगर, हाल ही में पार्टी में नई ज्वाइनिंग और अर्जित अवकाश को लेकर जिस प्रकार सवाल उठाए गए, रावत के अनुसार-इसका जवाब देना जरूरी है। बकौल रावत, कई मित्रों ने मेरे नेतृत्व और चुनावी हार को लेकर तरह-तरह की बातें कीं। अब मैं जनता की अदालत में जाकर सारे सवालों के जवाब खोजूंगा। रावत ने बताया कि उनके दौरे की शुरुआत उत्तरकाशी के गंगोत्री राजमार्ग और धराली से होगी। कहा कि मैं जनता से यह भी जानूंगा कि उत्तराखंड के विकास के लिए किए गए कार्यों के बावजूद मुझे हराया क्यों गया। जब उत्तराखंडियत का ध्वजवाहक ही हार जाए, तो यह बड़ा सवाल है।
चुभती है हरिद्वार ग्रामीण की हार
सक्रिय राजनीति में 60 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे रावत ने बताया कि 2017 में हरिद्वार ग्रामीण से मिली हार का सबसे ज्यादा दुख है। वे वहां लगभग हर परिवार को जानते थे और अपनी जीत को लेकर आश्वस्त भी थे, लेकिन राजनीतिक हालात ने पूरी बाजी पलटकर रख दी।
‘धामी बेहतरीन इंसान, पर काम से संतुष्ट नहीं’
रावत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बेहतरीन राजनीतिज्ञ मानते हैं। मगर, वे मुख्यमंत्री के रूप में धामी के काम से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि, रावत के अनुसार, सियासी शिष्टाचार में धामी का रिकाॅर्ड बहुत अच्छा है। ऐसा कम ही लोगों में देखने को मिलता है।
मुस्लिम विवि: ‘अपनों’ ने दी हवा, भाजपा ने भुनाया
हरीश रावत ने वर्ष 2022 के चुनाव में मिली हार के लिए मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा वास्तविक नहीं था, लेकिन पार्टी के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे हवा दी, मीम बनाए, जिसे भाजपा ने भुना लिया।
रावत बोले-‘उत्तराखंडियत’ ही भाजपा का जवाब
रावत ने भाजपा पर छद्म सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का आरोप लगाकर कहा कि इसका मुकाबला ‘उत्तराखंडियत’ से संभव है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की पहल की थी, जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सलाह दी कि कहनेभर से काम नहीं बनने वाला। जनता के बीच विचारधारा के रूप में जाना होगा। रावत ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस का जनाधार बढ़ रहा। हालांकि, उन्होंने माना कि भाजपा का मत प्रतिशत अधिक तेजी से बढ़ा है, लेकिन अब भाजपा के पक्ष में हालात नहीं हैं।
विकास ही सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए
हरीश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते मैंने राज्यहित में कई पहल की और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया। सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन विकास की प्राथमिकताएं नहीं बदलनी चाहिए। राज्य का विकास सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए।
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